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दम घुटता है इस 'विकास' में

Fri, 22 Nov 2013 04:11 AM IST
थॉमस एल फ्रीडमैन
थॉमस एल फ्रीडमैन Updated Fri, 22 Nov 2013 04:11 AM IST
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Pollution problems in china

अक्तूबर में मैं जब चीन के पूर्वोत्तर के शहर हार्बिन पहुंचा, तो ठंडे मौसम, कम हवा, कोयले की आग वाली गर्मी और मड़ाई के बाद जलाए जाने वाले मलबे ने मेरा स्वागत किया। ये सब मिलकर तकरीबन एक करोड़ की आबादी वाले इस शहर में प्रदूषण का भीषण जाल बुन रहे हैं। धुंध के कारण यहां सड़कों पर बहुत मामूली दूरी तक ही देखा जा सकता है, जिसका खामियाजा बस चालक भुगत रहे हैं। हार्बिन की आधिकारिक वेबसाइट पर चेतावनी दी गई है कि सामने की लाइट जलाने के बाद भी कारों की रफ्तार पैदल चलने वालों से अधिक नहीं होनी चाहिए!

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नासा के मुताबिक, हार्बिन के कुछ पड़ोसी महसूस कर रहे हैं कि वहां हवा में प्रदूषणकारी ठोस पदार्थ और द्रव यानी फाइन पार्टिकुलर मैटर (पीएम 2.5) का जमाव प्रति क्यूबिक मीटर पर अत्यधिक लगभग 1,000 माइक्रोग्राम है। अमेरिकी पर्यावरणीय संरक्षण एजेंसी की वायु गुणवत्ता मानक के अनुसार, पीएम 2.5 प्रति क्यूबिक मीटर 35 माइक्रोग्राम से कम होना चाहिए। इस हिसाब से हार्बिन को निर्धारित मानक के उच्च स्तर पर पहुंचने के लिए प्रदूषण में 97 फीसदी कमी लाने की जरूरत है।
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नासा कहता है कि हार्बिन के अस्पतालों की रिपोर्ट के मुताबिक, सांस से संबंधित मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ी है और वहां प्रदूषण से बचाने के लिए मास्क बेचा जा रहा है। अमेरिकी गायक पैटी अस्टिन ने बीजिंग के धुंध भरे वातावरण को देखते हुए पिछले दिनों अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। अपनी वेबसाइट पर उन्होंने इसका कारण सांस लेने में हो रही दिक्कत बताया, जिस कारण उन्हंे दमे का दौरा पड़ा। स्वच्छ ऊर्जा पर अमेरिका-चीन के संयुक्त सहयोग (जेयूसीसीसीई) के एक कार्यक्रम में पिछले दिनों शंघाई में पर्यावरण पर काम करने वाले तमाम कार्यकर्ता जुटे। पर वहां ज्यादातर लोग इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि चीन में कहां रहना चाहिए, बच्चों को बाहर कब भेजना चाहिए और किस तरह के भोजन और पानी पर भरोसा करना चाहिए?
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ऊर्जा नवाचार पर अमेरिका के प्रमुख कार्यकारी हाल हॉर्वे चीन सरकार के साथ वायु की गुणवत्ता को नियंत्रण में लाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने बहुत प्रासंगिक बात कही है कि आर्थिक समृद्धि की अभूतपूर्व ऊंचाई पर भी अगर चीन पहुंच जाता है, तो उसका कोई फायदा नहीं, क्योंकि वैसे में लोग वहां रह ही नहीं पाएंगे। चीन की तेज तरक्की के कारण अगर बीजिंग के 40 लाख लोगों के पास अपनी कार हो, लेकिन ट्रैफिक कभी न चले, तो क्या हालात होंगे? चीन की प्रति व्यक्ति आय में इजाफे से अगर वहां के लाखों गरीबों को दूध और मांस जैसे पौष्टिक आहार मिलने लगे, लेकिन उनकी गुणवत्ता पर भरोसा न किया जा सके, तो ऐसे विकास का क्या फायदा? अगर सकल घरेलू उत्पाद बढ़ता रहे, पर सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु न हो, तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है?

चीन ने पिछले 30 साल के भीतर आधुनिक शहर बसाए, सड़कें, हवाई अड्डे, बंदरगाह बनाए, दूरसंचार के क्षेत्र में काफी काम किए। साथ ही विश्व इतिहास में किसी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा तेजी से अपने लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। चीन के हर नागरिक को इस पर गर्व होना ही चाहिए। पर हर स्वस्थ अर्थव्यवस्था का आधार स्वस्थ पर्यावरण होता है। अगर शिनपिंग और उनकी सरकार अब ऐसे संस्थागत कानून और नियम नहीं बनाती है, जो यह सुनिश्चित कर सकें कि भूमि और वायु के प्रदूषण की महामारी के चलते विकास प्रभावित नहीं होगा, तो चीन रुक जाएगा।

कहना आसान है, पर पर्यावरण के मुद्दे पर कुछ ठोस करना बहुत कठिन। दरअसल चीन में एकदलीय व्यवस्था है, जिसमें कई मुद्दों पर काफी मतभेद की स्थिति रहती है। बीजिंग में कई प्रबुद्ध नेता यह घोषणा कर सकते हैं कि पर्यावरण को स्वच्छ करने की दिशा में हमें काम करना होगा। पर वास्तव में उन्हें अपने स्थानीय मालिकों से जूझना होगा। इन स्थानीय मालिकों के हित आर्थिक वृद्धि से जुड़े हुए हैं, इसलिए उन्हें पर्यावरण के हितों के लिए तैयार कर पाना कठिन है।

अमेरिका में 1970 के शुरू में ही वायु और पानी के संरक्षण के लिए संस्थानों का निर्माण शुरू हो गया था। जेयूसीसीसीई के संस्थापक पेग्गी लियु यह तय करने और लागू करने की दिशा में चीनी उपभोक्ताओं, उत्पादकों और नौकरशाहों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं कि चीन के लोगों के लिए उनका घर, उनकी कार आदि अमेरिकियों की तुलना में किस तरह अलग हो। चीन के लोगों के समावेशी सपने के लिए संस्थागत सहयोग बेहद अहम है।

मसलन, चीन ऐसी नदियों के साथ आगे नहीं बढ़ सकता, जिनका पानी औद्योगिक कचरे के कारण चमकीला लाल हो गया है। वहां के झील और समुद्री तट हरे शैवाल की मोटी परत से जम गए हैं। और तो और, हाल ही में हुआंगपू नदी में 18,000 मरे सूअर मिले। चीनी बच्चे पहली बार जब बाहर जाते हैं तो पूछते हैं कि मम्मी, आसमान इतना नीला क्यों है? इस स्थिति को बेहतर बनाने की जरूरत है। बच्चों को बाहर खेलने जाने की अनुमति देने से पहले रोजाना अपने फोन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक वाला एप्लीकेशन देखने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।


चीन इससे बेहतर हो सकता है, पर संपन्न जीवन के लिए उसे समावेशी रास्ता अपनाना चाहिए। इस दिशा में जरूरी कदम अगर जल्दी नहीं उठाए गए, तो यह सब चीन के लिए दुःस्वप्न साबित हो सकता है। इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।

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