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तेल पर भारी सियासत
स्टेनली रीड
Updated Fri, 06 Jul 2018 06:19 PM IST
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तेल पर भारी सियासत
जब वियना में हुई पिछली बैठक में प्रमुख तेल उत्पादकों ने कहा था कि तेल का उत्पादन बढ़ाकर कीमतों पर काबू करेंगे, तो फिर तेल की कीमत में उछाल क्यों जारी है? पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन के अधिकारियों और रूस जैसे अन्य प्रमुख तेल उत्पादकों ने पिछले वर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब एक फीसदी तक उत्पादन में वृद्धि की प्रतिबद्धता जताई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर और जोर डाला है और तेल की कीमत कम करने का आह्वान किया है। फिर भी कीमतें ऊंचाई पर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत इस वर्ष अब तक बीस फीसदी से ज्यादा बढ़ी है और प्रति बैरल कीमत 78 डॉलर है। तेल की कीमत बढ़ाने वाले कुछ प्रमख कारक निम्न हैं।
जोखिमपूर्ण उत्पादक-तेल के उत्पादन में तेजी लाने के लिए सऊदी अरब दबाव में है, लेकिन ये बढ़ोतरी संकटग्रस्त तीन देशों-ईरान, लीबिया और वेनेजुएला में आई गिरावट की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने अपनी इस मांग में नरमी लाई है कि चीन एवं भारत जैसे देश ईरान से अपने सारे तेल आयात बंद करें। इसके बावजूद उसने तेहरान के खिलाफ समर्थन बढ़ाने की मांग की है, क्योंकि अमेरिका उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों को फिर से थोपने के लिए तैयार है।
इस समय ईरान प्रति दिन करीब बीस लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति के करीब दो फीसदी के बराबर है। लेकिन अमेरिका सऊदी अरब, रूस या अन्य कहीं से भी अतिरिक्ति आपूर्ति के बल पर तेहरान को अपने प्राकृतिक संसाधनों की विक्रय क्षमता पर कड़ाई के अंकुश लगाना चाहता है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व प्रतिबंध विशेषज्ञ एंड्र्यू केलर कहते हैं, ट्रंप प्रशासन कुछ हद तक अपना कड़ा रुख जता रहा है। फिर भी विश्लेषकों ने अपने अनुमानों में बढ़ोतरी की है कि किस तरह ईरानी कच्चे तेल का निर्यात कम हो सकता है, प्रति दिन हजारों बैरल से दस लाख बैरल तक। इस सीमा के ऊपरी स्तर में कमी वियना में तेल उत्पादकों द्वारा किए गए अतिरिक्त आपूर्ति के वायदे का सफाया कर सकता है।
यह उभरता हुआ संकट तेल बाजारों पर पड़ने वाले एकमात्र संभावित व्यवधान से बहुत दूर है। एक समय प्रमुख तेल उत्पादक रहे वेनेजुएला के उत्पादन में कमी आई है, प्रति दिन 14 लाख बैरल से कम, क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था में कमी आई है और इस देश पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध थोपे गए हैं। आगे उत्पादन में गिरावट लगभग निश्चित है। इस बीच लीबिया में विभिन्न सशस्त्र गुटों के बीच लड़ाई का मतलब है कि यह उत्तरी अफ्रीकी देश प्रति दिन करीब 8.5 लाख बैरल तेल आपूर्ति में सक्षम नहीं हैं, जो इसका अधिकांश उत्पादन है। निवेश बैंक आरबीसी कैपिटल मार्केट के विश्लेषक हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि यह तेल बाजारों के लिए तकरीबन भूराजनीतिक तूफान में बदल रहा है। ऐसे में सऊदी अरब के लिए वेनेजुएला, ईरान और अब लीबिया के कारण बढ़ती कमी को पूरा कर पाना मुश्किल होगा।
आपूर्ति और मांग-इस समय तेल की आपूर्ति अल्पकालिक नहीं है। ओपेक ने दीर्घकालीन उत्पादन में कटौती की है और रूस ने भरे हुए भंडारण टैंक को ज्यादा स्तर तक सुखा दिया है। इसका अर्थ है कि उत्पादन के किसी भी खतरे का तेल की कीमतों पर काफी असर पड़ता है।
तेल एवं गैस कंस्लटेंसी कंपनी एफजीई के विश्लेषक ने ग्राहकों को एक नोट में लिखा कि विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी और ऊर्जा मांग में वृद्धि के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं, जब तक कि किसी भी संभावित कटौती को पूरा करने के लिए आपूर्ति तुरंत नहीं मिलती है। पेरिस स्थित कंपनी कायरोस-जो सेटेलाइट आंकड़ों के आधार पर तेल बाजार की गतिविधियों पर नजर रखती है, के विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब पहले से ही ईरान या अन्य किसी जगह से घटती आपूर्ति की जगह लेने की तैयारी कर रहा है-जून में सऊदी अरब के तेल निर्यात में काफी वृद्धि हुई, जबकि भंडारण का स्तर भी बढ़ा। रूस ने भी अपना निर्यात बढ़ाया है।
लेकिन इस बात पर संदेह है कि कोई देश कितना कर सकता है और कितने समय तक। रियाद दावा करता है कि उसका अतिरिक्त उत्पादन प्रतिदिन बीस लाख बैरल है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि गणराज्य यथार्थ रूप से अतिरिक्त खनन के बिना अपने दैनिक उत्पादन में केवल दस लाख बैरल जोड़ सकता है। ज्यादातर पूर्वानुमानकर्ता इस बात पर सहमत हैं कि अभी पर्याप्त वैश्विक बफर है, पर भविष्य में इसे फैलाया बढ़ाया जा सकता है। एक ऊर्जा परामर्शी कंपनी वुड मैकेंजी का अनुमान है कि अतिरिक्त उत्पादन से वैश्विक अतिरिक्त क्षमता पच्चीस लाख बैरल प्रतिदिन हो सकती है, जिनमें से अधिकांश का उत्पादन ओपेक में होगा। ईरान, लीबिया और वेनेजुएला में होने वाले उत्पादन के खतरे से यह क्षमता कमजोर पड़ रही है और नाइजीरिया की आपूर्ति भी मजदूरों की हड़ताल और अन्य मुद्दों के चलते कमजोर है। अमेरिका के कच्चे तेल निर्यात पर तेल बाजार की बढ़ती निर्भरता के अपने जोखिम हैं, क्योंकि गर्मी में तूफानों के कारण खाड़ी तट के बंदरगाहों को बंद किया जा सकता है।
बाजार का राजनीतिकरण-इन सभी कारकों से ज्यादा प्रमुख कारण है कि तेल बाजार का राजनीतिकरण बढ़ रहा है, जो संभावित रूप से अस्थिरता में बढ़ोतरी कर रहा है। मसलन, ट्रंप ने गैसोलीन की कीमत घटाने की कोशिश के तहत सऊदी अरब के किंग सलमान को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के नवीनीकरण पर ईरान की प्रतिक्रिया तेल बाजार की गतिशीलता को और भी प्रभावित कर सकती है। यदि देश का तेल निर्यात प्रति दिन दस लाख बैरल से नीचे गिर जाता है, तो स्थिति वास्तव में बहुत खतरनाक हो सकती है। ईरान के अधिकारी खतरों के बारे में मुखर रहे हैं। तेहरान से एक टेलीफोन इंटरव्यू में एक उच्च स्तरीय ईरानी तेल अधिकारी ने चेतावनी दी कि तनाव खत्म नहीं होने पर तेल की कीमत सौ डॉलर प्रति बैरल या 140 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि तेल बाजार को राजनीति से अलग रखें।
© The New York Times 2018
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जोखिमपूर्ण उत्पादक-तेल के उत्पादन में तेजी लाने के लिए सऊदी अरब दबाव में है, लेकिन ये बढ़ोतरी संकटग्रस्त तीन देशों-ईरान, लीबिया और वेनेजुएला में आई गिरावट की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है। ट्रंप प्रशासन ने अपनी इस मांग में नरमी लाई है कि चीन एवं भारत जैसे देश ईरान से अपने सारे तेल आयात बंद करें। इसके बावजूद उसने तेहरान के खिलाफ समर्थन बढ़ाने की मांग की है, क्योंकि अमेरिका उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों को फिर से थोपने के लिए तैयार है।
इस समय ईरान प्रति दिन करीब बीस लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति के करीब दो फीसदी के बराबर है। लेकिन अमेरिका सऊदी अरब, रूस या अन्य कहीं से भी अतिरिक्ति आपूर्ति के बल पर तेहरान को अपने प्राकृतिक संसाधनों की विक्रय क्षमता पर कड़ाई के अंकुश लगाना चाहता है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व प्रतिबंध विशेषज्ञ एंड्र्यू केलर कहते हैं, ट्रंप प्रशासन कुछ हद तक अपना कड़ा रुख जता रहा है। फिर भी विश्लेषकों ने अपने अनुमानों में बढ़ोतरी की है कि किस तरह ईरानी कच्चे तेल का निर्यात कम हो सकता है, प्रति दिन हजारों बैरल से दस लाख बैरल तक। इस सीमा के ऊपरी स्तर में कमी वियना में तेल उत्पादकों द्वारा किए गए अतिरिक्त आपूर्ति के वायदे का सफाया कर सकता है।
यह उभरता हुआ संकट तेल बाजारों पर पड़ने वाले एकमात्र संभावित व्यवधान से बहुत दूर है। एक समय प्रमुख तेल उत्पादक रहे वेनेजुएला के उत्पादन में कमी आई है, प्रति दिन 14 लाख बैरल से कम, क्योंकि इसकी अर्थव्यवस्था में कमी आई है और इस देश पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध थोपे गए हैं। आगे उत्पादन में गिरावट लगभग निश्चित है। इस बीच लीबिया में विभिन्न सशस्त्र गुटों के बीच लड़ाई का मतलब है कि यह उत्तरी अफ्रीकी देश प्रति दिन करीब 8.5 लाख बैरल तेल आपूर्ति में सक्षम नहीं हैं, जो इसका अधिकांश उत्पादन है। निवेश बैंक आरबीसी कैपिटल मार्केट के विश्लेषक हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि यह तेल बाजारों के लिए तकरीबन भूराजनीतिक तूफान में बदल रहा है। ऐसे में सऊदी अरब के लिए वेनेजुएला, ईरान और अब लीबिया के कारण बढ़ती कमी को पूरा कर पाना मुश्किल होगा।
आपूर्ति और मांग-इस समय तेल की आपूर्ति अल्पकालिक नहीं है। ओपेक ने दीर्घकालीन उत्पादन में कटौती की है और रूस ने भरे हुए भंडारण टैंक को ज्यादा स्तर तक सुखा दिया है। इसका अर्थ है कि उत्पादन के किसी भी खतरे का तेल की कीमतों पर काफी असर पड़ता है।
तेल एवं गैस कंस्लटेंसी कंपनी एफजीई के विश्लेषक ने ग्राहकों को एक नोट में लिखा कि विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी और ऊर्जा मांग में वृद्धि के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं, जब तक कि किसी भी संभावित कटौती को पूरा करने के लिए आपूर्ति तुरंत नहीं मिलती है। पेरिस स्थित कंपनी कायरोस-जो सेटेलाइट आंकड़ों के आधार पर तेल बाजार की गतिविधियों पर नजर रखती है, के विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब पहले से ही ईरान या अन्य किसी जगह से घटती आपूर्ति की जगह लेने की तैयारी कर रहा है-जून में सऊदी अरब के तेल निर्यात में काफी वृद्धि हुई, जबकि भंडारण का स्तर भी बढ़ा। रूस ने भी अपना निर्यात बढ़ाया है।
लेकिन इस बात पर संदेह है कि कोई देश कितना कर सकता है और कितने समय तक। रियाद दावा करता है कि उसका अतिरिक्त उत्पादन प्रतिदिन बीस लाख बैरल है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि गणराज्य यथार्थ रूप से अतिरिक्त खनन के बिना अपने दैनिक उत्पादन में केवल दस लाख बैरल जोड़ सकता है। ज्यादातर पूर्वानुमानकर्ता इस बात पर सहमत हैं कि अभी पर्याप्त वैश्विक बफर है, पर भविष्य में इसे फैलाया बढ़ाया जा सकता है। एक ऊर्जा परामर्शी कंपनी वुड मैकेंजी का अनुमान है कि अतिरिक्त उत्पादन से वैश्विक अतिरिक्त क्षमता पच्चीस लाख बैरल प्रतिदिन हो सकती है, जिनमें से अधिकांश का उत्पादन ओपेक में होगा। ईरान, लीबिया और वेनेजुएला में होने वाले उत्पादन के खतरे से यह क्षमता कमजोर पड़ रही है और नाइजीरिया की आपूर्ति भी मजदूरों की हड़ताल और अन्य मुद्दों के चलते कमजोर है। अमेरिका के कच्चे तेल निर्यात पर तेल बाजार की बढ़ती निर्भरता के अपने जोखिम हैं, क्योंकि गर्मी में तूफानों के कारण खाड़ी तट के बंदरगाहों को बंद किया जा सकता है।
बाजार का राजनीतिकरण-इन सभी कारकों से ज्यादा प्रमुख कारण है कि तेल बाजार का राजनीतिकरण बढ़ रहा है, जो संभावित रूप से अस्थिरता में बढ़ोतरी कर रहा है। मसलन, ट्रंप ने गैसोलीन की कीमत घटाने की कोशिश के तहत सऊदी अरब के किंग सलमान को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के नवीनीकरण पर ईरान की प्रतिक्रिया तेल बाजार की गतिशीलता को और भी प्रभावित कर सकती है। यदि देश का तेल निर्यात प्रति दिन दस लाख बैरल से नीचे गिर जाता है, तो स्थिति वास्तव में बहुत खतरनाक हो सकती है। ईरान के अधिकारी खतरों के बारे में मुखर रहे हैं। तेहरान से एक टेलीफोन इंटरव्यू में एक उच्च स्तरीय ईरानी तेल अधिकारी ने चेतावनी दी कि तनाव खत्म नहीं होने पर तेल की कीमत सौ डॉलर प्रति बैरल या 140 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि तेल बाजार को राजनीति से अलग रखें।
© The New York Times 2018