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मेरे देश की धरती नेता उगले

Tue, 23 Apr 2013 09:55 PM IST
पूरन सरमा
पूरन सरमा Updated Tue, 23 Apr 2013 09:55 PM IST
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politics career

किसी जमाने में सोना उगलने वाली भारत भूमि इस समय नेताओं के लिए सबसे ज्यादा उर्वरा है। कोई भी व्यक्ति सौ-पचास लोगों को अपने साथ लेता है और निकल पड़ता है नेतागीरी करने। वैसे करियर भी इसी में सबसे ज्यादा ब्राइट है।

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नौकरी प्राप्त करने में बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। इसमें खुद-ब-खुद पापड़ खाने को मिलते हैं। जो थोड़ा भी बोल लेता है, उसकी दुकान चल निकलती है। नेता भी कई तरह के हैं, गांव के सरपंच से लेकर मंत्री, सांसद और विधायक स्तर के। राजनीति ही नहीं, कला, साहित्य, संस्कृति और समाज के अलग-अलग नेता। यानी हमारी भारत भूमि अब थोक के भाव नेता उगल रही है।
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देश की राजधानी दिल्ली नेताओं का भी गढ़ है। यहां हर मिनट में एक नेता पनपता है। बिना खाद, पानी और रोशनी के नेताओं की फसल लहलहा उठती है। पिछले दिनों भ्रष्टाचार मिटाने के मुद्दे पर बैठे-बिठाए कई नेता बन गए। यहां तक कि इस मुद्दे ने तो एक अलग राजनीतिक पार्टी को ही जन्म दे दिया। जागरूकता बढ़ने के कारण भीड़ को संचालित करने के लिए कोई भी खड़ा हो जाता है, तो वह भविष्य का नेता है।
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आजादी से पूर्व के मिशन भाव से काम करने वाले नेता तो आज रहे नहीं। अब प्रोफेशनल नेता हैं, जो अच्छा कमा-खा रहे हैं। पूरी योजना को चट कर जाने वाले विराट व्यक्तित्व के धनी नेता। पहले संसद और विधानसभाओं तक पहुंचने वालों को नेताजी का तमगा मिलता था।

आजकल तो इंडिया गेट, विजय चौक और रामलीला मैदान तक भाषण झाड़ने वाले भी नेता बन जाते हैं। इधर ब्यूरोक्रेट्स नेता की भी अलग नस्ल पैदा हो गई है। यानी मुफ्त की पेंशन और सरकार के खिलाफ नेतागीरी। ये जब तक सेवा में रहते हैं, तब तक इनकी बोलती बंद रहती है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद ये मुखर हो जाते हैं और हाई लेवल की नेतागीरी करते हैं।
 
कुछ धार्मिक-आध्यात्मिक लोग भी नेतागीरी के नए प्रोफेशन में कूदना चाहते हैं, लेकिन उनमें सत्ता से टकराने का वैसा साहस नहीं। वे आपको पहलवान बनने का गुर तो सिखा सकते हैं, लेकिन पुलिस की लाठियों के डर से जनाना ड्रेस पहनने में संकोच नहीं करते।


जाहिर है, नेताओं की यह नई पौध अनुभवी घाघ नेताओं के लिए खतरा नहीं है। अरे, उनका नेतागीरी के फील्ड में छह दशकों से अधिक का एक्सपीरिएंस है। इंडिया गेट वाले नेता क्या खाकर इनका मुकाबला करेंगे।

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