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लंबी यात्रा की शुरुआत भर है पोलियो उन्मूलन

Wed, 26 Mar 2014 08:24 PM IST
पूनम खेत्रपाल सिंह
पूनम खेत्रपाल सिंह Updated Wed, 26 Mar 2014 08:24 PM IST
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Polio eradication is begining of long journey

पूरा विश्व दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में पोलियो के खिलाफ विश्व स्वास्थ्य संगठन के संघर्ष की लंबी यात्रा को आज यानी 27 मार्च को सफलतापूर्वक पूरा होते देख रहा है। उम्मीद है कि आज इस क्षेत्र को विश्व स्वास्थ्य संगठन आधिकारिक तौर पर पोलियो-मुक्त घोषित कर देगा। किसी भी अकेले देश को पोलियो-मुक्त घोषित नहीं किया जा सकता। किसी क्षेत्र के सभी देशों में पोलियो वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आने के बाद ही उस क्षेत्र को विश्व स्वास्थ्य संगठन पोलियो-मुक्त के रूप में प्रमाणित करता है।

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उल्लेखनीय है कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी, 2011 को भारत में दर्ज किया गया था और पिछले तीन साल में इस क्षेत्र में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है। दक्षिण-पूर्व एशिया यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा क्षेत्र है। इससे पहले अमेरिका, पश्चिमी प्रशांत और यूरोपीय क्षेत्र को ही पोलियो मुक्त घोषित किया गया है। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को पोलियो मुक्त करना लाखों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए, जिन्होंने इस क्षेत्र से पोलियो का उन्मूलन करने के लिए सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और साझेदारों के साथ कार्य किया है, एक महान अवसर है।
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पोलियो उन्मूलन का प्रत्यक्ष लाभ बचाई गई जिंदगियों और खत्म की गई जीवनकालिक अपंगता के अर्थों में बिल्कुल स्पष्ट है। इस अभियान की सफलता साबित करती है कि हैजा और खसरा जैसी बीमारियों के क्षेत्र में भी ऐसी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। आज स्थिति यह है कि मलेरिया, तपेदिक और एचआईवी/एड्स जैसी कई बीमारियां टीकों से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से अधिक आम हो गई हैं। लिहाजा पोलियो उन्मूलन से सबक लेकर दूसरी बीमारियों का मुकाबला करने के लिए बुनियादी ढांचे बनाने, क्षमताओं एवं नई सोच वाली नीतियों को लागू करने आदि के बारे में हमें गंभीरता से सोचना चाहिए। इसमें हमारी मदद वह तंत्र कर सकता है, जिसे हमने पोलियो से लड़ने के लिए बनाया है।
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यह निर्विवाद है कि पोलियो उन्मूलन परियोजना के तहत टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने के साथ ही अत्यावश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त, व्यापक वैश्विक प्रयोगशाला एवं संवाद नेटवर्क का निर्माण भी किया गया है। विकासशील देशों में स्वास्थ्य सूचना तंत्रों का विकास और कंप्यूटर क्षमता का विस्तार भी उल्लेखनीय रहा है। लिहाजा अन्य रोगों के निदान के लिए इस तंत्र का उपयोग किया जा सकता है। पोलियो उन्मूलन अभियान की एक खासियत यह भी रही कि इसके अंतर्गत लाखों कर्मचारी उन बच्चों तक पहुंचने के लिए तैनात किए गए, जिन तक इससे पूर्व इतनी व्यापकता में कोई दूसरी स्वास्थ्य सेवा नहीं पहुंच सकी थी। ये कर्मी सुदूर जगहों पर रहने वाले बच्चों तक भी पहुंचे और शहरी गंदी बस्तियों तक भी। नतीजतन आज यह पूरा क्षेत्र पोलियो मुक्त घोषित हो रहा है। लिहाजा अब कोई भी सरकार इन बच्चों तक दूसरी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने से पीछे हटने का कोई बहाना नहीं ढूंढ सकती।


दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में पोलियो उन्मूलन की यात्रा का पूरा होना शुरुआत भर है। अब हमें इस जीत का इस्तेमाल अन्य बीमारियों को नियंत्रित करने और स्वास्थ्य तंत्रों को सुदृढ़ करने के लिए करना चाहिए। हमारा सामूहिक स्वप्न हर जगह, हर समय प्रत्येक बच्चे की रक्षा करना होना चाहिए, और इसमें निर्विवाद रूप से सार्वजनिक निजी भागीदारी काफी मददगार साबित हो सकती है।

लेखिका विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की निदेशक हैं।

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