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पीएम मोदी की ब्रिटेन यात्रा: ऐतिहासिक समझौते की ओर, बन चुकी है सैद्धांतिक सहमति

Wed, 23 Jul 2025 06:57 AM IST
K S Tomar केएस तोमर
Updated Wed, 23 Jul 2025 06:57 AM IST
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सार
मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बनने वाला है। चौदह कठिन दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों की सरकारों ने सैद्धांतिक सहमति बना ली है। वर्षों की मेहनत से तैयार यह एफटीए ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन के साथ भारत के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगा।
 
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PM Modi UK visit: Towards historic agreement, consensus in principle has been reached
पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की मुलाकात - फोटो : ANI

विस्तार

सत्ता में वापसी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला प्रमुख द्विपक्षीय दौरा भारत की कूटनीति, व्यापार और क्षेत्रीय प्रभाव की दृष्टि से गहरे निहितार्थ रखता है। उम्मीद है कि लंदन में प्रधानमंत्री स्टार्मर कीर की नवनिर्वाचित लेबर सरकार के साथ प्रधानमंत्री मोदी बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देंगे। यह यात्रा कंजर्वेटिव पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद भारत-ब्रिटेन के राजनीतिक संबंधों की पुनर्बहाली का प्रतीक भी होगी। उसके बाद मोदी मालदीव जाएंगे। दोनों पड़ाव मोदी की दोहरी विदेश नीति को रेखांकित करते हैं-पश्चिम के साथ आर्थिक एकीकरण को गहरा करना और दक्षिण एशिया में चीनी अतिक्रमण को रोकना।



एफटीए से भारत को फायदा
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बनने वाला है। चौदह कठिन दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों की सरकारों ने सैद्धांतिक रूप से सहमति बना ली है। मोदी की मौजूदगी इसे अंतिम लक्ष्य तक ले जाने के लिए जरूरी राजनीतिक समर्थन प्रदान करेगी। 2018 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली ब्रिटेन यात्रा और स्टार्मर से पहली औपचारिक भेंट भी होगी, जिनकी लेबर पार्टी ने पिछले साल ही एक दशक से अधिक समय विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में वापसी की है। वर्षों की मेहनत से तैयार यह एफटीए ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन के साथ भारत के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह समझौता वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 120 अरब डॉलर तक पहुंचाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रवाह को नया आकार देने का वादा करता है।


भारत के लिए यह समझौता कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, दवाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित प्रमुख क्षेत्रों के लिए ब्रिटिश बाजारों में शुल्क-मुक्त या कम शुल्क वाली पहुंच प्रदान करता है। कथित तौर पर लगभग 99 प्रतिशत भारतीय शुल्क सीमाएं इसके दायरे में आ जाएंगी, जिससे भारत की निर्यात महत्वाकांक्षाओं को मजबूत बढ़ावा मिलेगा।

ब्रिटेन को लाभ
बदले में ब्रिटेन को प्रीमियम निर्यात पर पर्याप्त टैरिफ राहत मिलेगी। स्कॉच व्हिस्की पर अभी भारत में 150 फीसदी भारी शुल्क लगता है, जिसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 75 और फिर 40 फीसदी किया जाएगा। ब्रिटिश ऑटोमोबाइल, खाद्य उत्पाद और चिकित्सा उपकरण भी आयात बाधाओं में कटौती से लाभान्वित होंगे। स्टार्मर, जिनकी सरकार ब्रेग्जिट के बाद ठोस सफलता हासिल करने के दबाव में है, के लिए भारत के साथ एफटीए एक रणनीतिक और आर्थिक जीत है।

व्यापार से परे
व्यापार के अलावा, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा, गतिशीलता, नवाचार, शिक्षा और जलवायु सहयोग पर व्यापक चर्चा होगी। मोदी एक औपचारिक समारोह में किंग चार्ल्स III से मिलेंगे, जो भारत-ब्रिटिश संबंधों की ऐतिहासिक गहराई को रेखांकित करता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रधानमंत्री स्टार्मर से मुलाकात राजनीतिक संबंधों को नए सिरे से गढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगी, क्योंकि भारतीय नेतृत्व उस लेबर पार्टी से वार्ता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसने कभी कश्मीर और घरेलू मुद्दों पर गंभीर प्रस्तावों के जरिये नई दिल्ली को नाराज किया था। स्टार्मर ने उस नाराजगी को कम करने का काम किया है और मोदी की यात्रा इस पहल की स्वीकृति का संकेत है।

घोषणाओं का इंतजार
जिन प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला जा सकता है, उनमें से एक सीमित गतिशील व्यवस्था है, जिसके तहत तीन साल तक के लिए ब्रिटेन में प्रतिनियुक्त भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट मिलेगी। यह लंबे समय से द्विपक्षीय श्रम वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। इसके अतिरिक्त, इस यात्रा के दौरान ग्रीन टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य साझेदारी और स्वच्छ ऊर्जा निवेश जैसे क्षेत्रों में घोषणाएं की जाएंगी, साथ ही भारतीय और ब्रिटिश संस्थानों के बीच शैक्षणिक समझौते भी होंगे।

तनाव के बीच कूटनीति
लंदन की भव्यता के बाद मोदी मालदीव के रणनीतिक रंगमंच का रुख करेंगे, जहां क्षेत्रीय भू-राजनीति स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ रही है। राष्ट्रपति मुइज्जू को भारतीय मदद और चिकित्सा कूटनीति की जरूरत है-ऐसा क्षेत्र, जहां चीन भारत की ऐतिहासिक भूमिका की बराबरी नहीं कर सकता-लेकिन उन्हें राष्ट्रवादी घरेलू भावनाओं को भी नियंत्रित करना होगा, जो भारत विरोधी बयानबाजी पर चलती हैं। मालदीव यात्रा तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगी-सामरिक सहयोग, आर्थिक सहायता और सॉफ्ट पावर सहभागिता। मोदी चीन के कर्ज सहायता को नियंत्रित करने के लिए नए ऋण या अनुदान की घोषणा कर सकते हैं, जिसने माले को बीजिंग के प्रभाव क्षेत्र में और अधिक धकेल दिया है। रक्षा वार्ता यद्यपि संवेदनशील है, लेकिन इस पर भी चर्चा होगी। भारत असैन्य व्यवस्था के जरिये समुद्री निगरानी सहयोग बनाए रखने का प्रयास करेगा तथा संगठित सुरक्षा वार्ता पर जोर देगा।

चीन की छाया और कूटनीतिक कामयाबी
लंदन व माले, दोनों पर भी चीन की छाया है। ब्रिटेन में, भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र और तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं में चीनी प्रभाव के प्रतिकार के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए मोदी का दौरा चीन का प्रभाव कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह दौरा मोदी की दृढ़ और व्यावहारिक विदेश नीति का प्रतिबिंब है, जहां व्यापार समझौते रणनीतिक प्रतिरोध के साथ गुंथे हुए हैं। ब्रिटेन की यात्रा भारत की आर्थिक विश्वसनीयता और पश्चिमी लोकतंत्रों के साथ उसके तालमेल को दर्शाने में मदद करेगी।

कुल मिलाकर, मोदी की ब्रिटेन यात्रा भारत की आर्थिक विश्वसनीयता और पश्चिमी लोकतंत्रों के साथ उसके तालमेल को प्रदर्शित करेगी। अगर लंदन में एफटीए पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह ऐसे समय में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी, जब वैश्विक शक्ति समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बहुध्रुवीयता से परिभाषित होती दुनिया में, मोदी की दोहरी कूटनीति (पश्चिम के साथ आर्थिक तालमेल और पड़ोस पर जोर) भारत की परिभाषित विदेश नीति की रणनीति के रूप में उभर रही है। 

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