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मंगल पर प्लॉट
सुरजीत सिंह
Updated Mon, 06 Oct 2014 06:52 PM IST
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उन्होंने आते ही जेब से एक कागज निकाला और हमारी तरफ फेंकते हुए बोले, जरा जल्दी से पढ़ लीजिए, इससे पहले कि मंगल पर प्लॉट काटने का दंगल मच जाए, हम इसी दीपावली में भूमि पूजन कर वहां स्कीम लांच कर देते हैं।
'मंगल पर प्लॉट! एयरपोर्ट से मात्र दो किलोमीटर दूर। भविष्य में बगल से रिंग रोड निकलना प्रस्तावित। जल्द ही मेट्रो के लिए सर्वे कार्य शुरू होने की संभावना। विश्वविद्यालय, स्टेडियम इत्यादि बनाने की योजना। निवेश का शानदार मौका हाथ से न जाने दें। आसान किस्तों में उपलब्ध। आगामी सौ पुश्तों के ऋण से इसी जन्म में मुक्त हो जाएं- मंगल प्रॉपर्टीज।
हमने देखा, वह रॉकेट की तरह उछल पड़े, क्यों हो गए न आप भी हमारे आइडिया पर क्लीन बोल्ड? चलिए, इस बात पर एक कॉर्नर प्लॉट आपका भी, क्या याद रखेंगे।
वह शिक्षक हैं, किंतु लोग उन्हें रीयल एस्टेट कारोबारी के तौर पर जानते हैं। स्कूली समय का पूरा निवेश उन्होंने प्रॉपर्टी में किया। बच्चे फेल होते गए, उनकी कॉलोनियां पास होती गईं। उनकी नजर में हर भूमि प्लॉट कटने की संभावना से उर्वरा है। एयरपोर्ट, रिंग रोड, बस अड्डा, विश्वविद्यालय, स्टेडियम-कुछ भी प्लान बने, उससे पहले ही वह स्कीम लांच कर अपार धन कूट लेते हैं। सरकार की हर योजना उनके लिए मंगल है। लेकिन अभी तो वहां जीवन की संभावनाएं खोजी जा रही हैं? मैंने कहा।
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जीवन को गोली मारिए। जहां भारतीय पहुंच गए, वहां जीवन भी पैदा हो ही जाएगा। फिर कौन-सा लोग अपने लिए जमीन-जायदाद खरीदते हैं। सबको सात पुश्तों की चिंता है। भविष्य में पृथ्वी पर मारामारी मचेगी, तो पीढ़ियां मंगल पर निकल ही लेंगी।
मैंने तंज में कहा, मंगल पर बाद में पहुंचना, पहले कक्षा में तो पहुंचिए। कहीं ऐसा न हो कि सरकार आप लोगों को कक्षाओं में पहुंचाने का जिम्मा भी 'इसरो' को सौंप दे। वह खिसियाकर चलने लगे।
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'मंगल पर प्लॉट! एयरपोर्ट से मात्र दो किलोमीटर दूर। भविष्य में बगल से रिंग रोड निकलना प्रस्तावित। जल्द ही मेट्रो के लिए सर्वे कार्य शुरू होने की संभावना। विश्वविद्यालय, स्टेडियम इत्यादि बनाने की योजना। निवेश का शानदार मौका हाथ से न जाने दें। आसान किस्तों में उपलब्ध। आगामी सौ पुश्तों के ऋण से इसी जन्म में मुक्त हो जाएं- मंगल प्रॉपर्टीज।
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हमने देखा, वह रॉकेट की तरह उछल पड़े, क्यों हो गए न आप भी हमारे आइडिया पर क्लीन बोल्ड? चलिए, इस बात पर एक कॉर्नर प्लॉट आपका भी, क्या याद रखेंगे।
वह शिक्षक हैं, किंतु लोग उन्हें रीयल एस्टेट कारोबारी के तौर पर जानते हैं। स्कूली समय का पूरा निवेश उन्होंने प्रॉपर्टी में किया। बच्चे फेल होते गए, उनकी कॉलोनियां पास होती गईं। उनकी नजर में हर भूमि प्लॉट कटने की संभावना से उर्वरा है। एयरपोर्ट, रिंग रोड, बस अड्डा, विश्वविद्यालय, स्टेडियम-कुछ भी प्लान बने, उससे पहले ही वह स्कीम लांच कर अपार धन कूट लेते हैं। सरकार की हर योजना उनके लिए मंगल है। लेकिन अभी तो वहां जीवन की संभावनाएं खोजी जा रही हैं? मैंने कहा।
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जीवन को गोली मारिए। जहां भारतीय पहुंच गए, वहां जीवन भी पैदा हो ही जाएगा। फिर कौन-सा लोग अपने लिए जमीन-जायदाद खरीदते हैं। सबको सात पुश्तों की चिंता है। भविष्य में पृथ्वी पर मारामारी मचेगी, तो पीढ़ियां मंगल पर निकल ही लेंगी।
मैंने तंज में कहा, मंगल पर बाद में पहुंचना, पहले कक्षा में तो पहुंचिए। कहीं ऐसा न हो कि सरकार आप लोगों को कक्षाओं में पहुंचाने का जिम्मा भी 'इसरो' को सौंप दे। वह खिसियाकर चलने लगे।