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विकास यात्रा: आत्मविश्वास से भरा गणतंत्र जिसमें जन को है तंत्र पर भरोसा

Fri, 26 Jan 2024 07:03 AM IST
शिव शरण शुक्ला शेखर अय्यर
शेखर अय्यर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 26 Jan 2024 07:03 AM IST
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सार
मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व और बढ़ती चुनौतियों से जूझने की इसकी क्षमता को देखते हुए तंत्र में गण (लोगों) का भरोसा बढ़ा है। निस्संदेह भारत वैश्विक आर्थिक लचीलेपन के मामले में खुद को सबसे आगे पाता है, मजबूत सरकारी खर्च के चलते मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर 6.9 फीसदी रहने की संभावना है।
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People confidence in system has increased given current political leadership
गणतंत्र दिवस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गणतंत्र दिवस साल का वह समय है, जब भारत की अब तक की यात्रा पर नजर डाली जा सकती है। एक राष्ट्र के रूप में हम अपने भविष्य को लेकर ज्यादा आश्वस्त हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारा जीवन बेहतर होगा। मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व और बढ़ती चुनौतियों से जूझने की इसकी क्षमता को देखते हुए तंत्र में गण (लोगों) का भरोसा बढ़ा है। निस्संदेह भारत वैश्विक आर्थिक लचीलेपन के मामले में खुद को सबसे आगे पाता है, मजबूत सरकारी खर्च के चलते मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर 6.9 फीसदी रहने की संभावना है, जो पहले के अनुमान 6.7 फीसदी से ज्यादा है। एक बार लोकसभा चुनाव संपन्न हो जाए और राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित हो जाए, तो आर्थिक मोर्चे पर चीजें बेहतर होनी तय हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं। सत्ता में फिर से वापसी पर मोदी निश्चित रूप से साहसिक नीतियों को आगे बढ़ाएंगे और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मौजूदा दृष्टिकोण में बदलाव लाएंगे।



हालांकि भारत को कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता, संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांतिपूर्ण समाधान की कमी, लाल सागर कॉरिडोर में जहाजों पर हमले, खाद्य महंगाई, ग्रामीण उत्पादन व सेवा क्षेत्र में मंदी से चुनौतियां आ सकती हैं। मालदीव जैसे देश को भारत से दूर करने, भूटान को धमकाने और ताइवान के साथ तनाव बढ़ाकर क्षेत्र को अस्थिर करने की चीन की नीतियों के प्रति हमें सतर्क रहना होगा। अल नीनो की स्थितियों के कारण मानसून सीजन में चार महीने औसत से कम वर्षा होने के चलते वर्ष 2023 में खरीफ उत्पादन में गिरावट देखी गई। गणतंत्र दिवस से ठीक चार दिन पहले अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन उत्साह की भावना लेकर आया है। अनुच्छेद 370 को हटाने की तरह राम मंदिर निर्माण को भी भाजपा द्वारा किए गए वादे को पूरा करने की तरह देखा जा रहा है। मोदी के आलोचक 22 जनवरी के समारोह को मोदी के चुनाव प्रचार और हिंदू राष्ट्र की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। शायद भाजपा को उम्मीद होगी कि मंदिर खुलने से उन्हें बेहतर चुनावी लाभ मिलेगा। लेकिन एक धार्मिक राष्ट्र निश्चित रूप से मोदी के एजेंडे में नहीं है। वह अपनी सरकार के प्रदर्शन और गरीबों के लिए किए गए कार्य के आधार पर लोगों के पास वोट मांगने जाना चाहते हैं। वर्ष 2014 में जबसे वह केंद्र की सत्ता में आए हैं, विपक्षी पार्टियां शासन का व्यावहारिक वैकल्पिक मॉडल पेश करने में विफल रही हैं। उनका यह विश्वास कि अंततः लोगों का भरोसा मोदी पर से उठ जाएगा, गलत साबित हुआ है। मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग भाजपा के साथ रहना चाहेगा, भले ही वह उसके शासन से असंतुष्ट हो।


हाल के चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' खुद निराश है। कांग्रेस जानती है कि उसे अपने नेतृत्व में सुधार करना होगा और एक नई चुनावी रणनीति बनानी होगी। विपक्षी दलों को गैर-भाजपा वोटों को बंटने से रोकने के लिए एकजुट रहना होगा। इस समय कांग्रेस के लिए यह बड़ी चुनौती है। जब तक ऐसा नहीं होता, लोगों को रोजगार सृजन, धन और विकास के लिए मोदी की प्राथमिकताओं में रामबाण नजर आएगा। लेकिन वे उन नेताओं से भी नाराज हैं, जो केवल अपनी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

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