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पाकिस्तानी जेल या कब्रगाह

Wed, 12 Apr 2017 07:20 PM IST
विवेक शुक्ला
विवेक शुक्ला Updated Wed, 12 Apr 2017 07:20 PM IST
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Pakistani prison or graveyard
विवेक शुक्ला

पाकिस्तान अपनी दुष्ट हरकतों से बाज आने का नाम ही नहीं ले रहा है। उसने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाई है। पाकिस्तान का दावा है कि जाधव रॉ का एजेंट हैं। वह पाकिस्तान में विध्वंसक और जासूसी गतिविधियों को प्लान करने, कोऑर्डिनेट करने और ऑर्गनाइज करने के लिए आया हुआ था। जाधव को पिछले साल बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान ने 1999 में शेख शमीम नाम के भारतीय को उन्हीं आरोपों पर फांसी पर चढ़ा दिया था, जिन आरोपों पर जाधव को फांसी की सजा सुनाई गई है। हालांकि भारत ने पाकिस्तान के कई गुप्तचरों को पकड़ा है, पर किसी को फांसी नहीं दी।

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पाकिस्तानी जेलें भारतीयों के लिए कब्रगाह साबित हो रही हैं। सरबजीत सिंह, फिर चमेल सिंह, उसके बाद लाहौर की जेल में भारतीय नागरिक किरपाल सिंह की वर्ष 2016 में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। 50-वर्षीय किरपाल सिंह वर्ष 1992 में कथित तौर पर वाघा सीमा से पाकिस्तान में चले गए थे। बाद में उन्हें पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बम विस्फोट करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। वहां की जेलों में न जाने कितने भारतीय मर गए या मौत का इंतजार कर रहे हैं। उधर भारतीय कैदियों को दी जाने वाली बर्बर यातनाओं को सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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दरअसल, हम दोस्ती का हाथ बढ़ाने के लिए हमेशा तत्पर रहे और उधर से मिली वादा खिलाफी। ये भी कोई पुरानी बात नहीं है, जब पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में मारे गए भारतीय कैदी चमेल सिंह के शरीर से किडनी और लीवर जैसे अहम अंग गायब मिले। जिस भारत ने पाकिस्तान के 90 हजार से ज्यादा युद्धबंदियों को 1971 की जंग के बाद हुए शिमला समझौते के तहत अपने वतन जाने के लिए छोड़ दिया था, उसी पाकिस्तान ने भारत के 54 युद्धबंदियों को कभी नहीं रिहा किया। ये सभी भारतीय सेना के आला अफसर थे। उनमें मेजर अशोक सूरी भी थे। उन्होंने  1971 की जंग में शिरकत की थी। पांच जुलाई,1988 को एक भारतीय कैदी मुख्तार सिंह को पाकिस्तान ने रिहा किया। वह उसी जेल में था, जिधर सरबजीत सिंह को मार डाला गया। उसने बताया था कि मेजर अशोक सूरी लखपत जेल में ही हैं। बीते दशकों से भारतीय सेना के उन 54 अफसरों के माता-पिता, पत्नी, बच्चे और दूसरे करीबी संबंधियों की आंखें पक गईं अपने दिल के टुकड़ों का चेहरा देखने के लिए। जिनेवा कन्वेशंन की अनदेखी करते हुए पाकिस्तान ने उन 54 सैन्य अधिकारियों को कभी भारत नहीं लौटाया। अब फ्लाइट लेफिनेंट वी.वी तांबे और उनकी राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन चैंपियन पत्नी दमयंती तांबे की दर्दभरी दास्तान भी सुन लीजिए। दमयंती तांबे जी ने बताया कि पांच दिसंबर,1971 को पाकिस्तान के प्रमुख अखबार संडे पाकिस्तान ने खबर छापी कि पांच भारतीय जंगी विमानों के पायलटों को गिरफ्तार कर लिया गया है। खबर में साफतौर पर तांबे का भी उल्लेख था। उन्होंने बताया कि उन्हें 1978 में एक बांग्लादेश नेवी के अफसर ने बताया था कि लायलपुर जेल में तांबे नाम का एक भारतीय कैदी था।
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बहरहाल, जाधव पर कार्रवाई का फैसला लेने के बाद भारत भी हरकत में आ गया है। बदले घटनाक्रम में भारत ने पाकिस्तान के करीब एक दर्जन कैदियों की रिहाई नहीं करने का फैसला किया है। इन कैदियों की रिहाई बुधवार को होने वाली थी। सरकार का मानना है कि पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई का यह सही समय नहीं है। यानी दोनों मुल्कों के संबंध जाधव के सवाल पर और कटु ही होंगे।

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