पाकिस्तान: संकट में इमरान का सियासी भविष्य, पीटीआई को खत्म करने की चल रही साजिश
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विस्तार
पाकिस्तान की सत्ताधारी गठबंधन सरकार, पाकिस्तान तहरीके-ए-इंसाफ पार्टी को अविश्वास प्रस्ताव के जरिये बेदखल करके अप्रैल, 2022 में सत्ता में आई थी। अवाम को उम्मीद थी कि यह सरकार उनकी मुश्किलों को दूर करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालात बद से बदतर हो गए हैं। राजनीतिक अस्थिरता, भारी कर्ज का बोझ, आसमान छूती महंगाई को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान गठबंधन सरकार व सेना पर बराबर निशाना साध रहे हैं। सरकार भी इमरान और उनकी पार्टी पर आरोप लगाने में जुटी हुई है। उधर सेना भी इमरान खान से सख्त नाराज है। इसकी मुख्य वजह है कि इमरान ने अपने मनपसंद आईएसआई प्रमुख फैज हमीद को अगला सेना प्रमुख नियुक्त करने की कोशिश की थी। हाल ही में इमरान खान को अल कादिर ट्रस्ट मामले में गिरफ्तार किया गया, जो एक रीयल एस्टेट कारोबारी के साथ हुए समझौते से जुड़ा है और जिससे कथित तौर पर सरकारी खजाने को 19 करोड़ पौंड का नुकसान हुआ है।
इमरान खान के समर्थकों ने अगले दिन नौ मई को भारी प्रदशर्न किया व सैनिक प्रतिष्ठानों व सरकारी ठिकानों पर हमला किया। सरकार ने सैकड़ों आक्रामक उपद्रवियों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। हिंसा में कुछ लोग मारे भी गए। सेना ने इसके खिलाफ सैनिक अदालत में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। सैनिक कानून के अनुसार, बगावत के मामले में फांसी भी दी जा सकती है। जबकि इमरान का मानना है कि गिरफ्तार किए गए लोग उनकी पार्टी के नहीं थे, बल्कि बाहर से आए थे। यह बात आसानी से गले नहीं उतरती। इमरान खान के घर में आतंकवादी छिपे होने के शक में छापे भी मारे गए, लेकिन वहां कोई आतंकवादी नहीं पाया गया।
हालत यह हो गई है कि सरकारी दमन के भय से पाकिस्तान तहरीके-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लगभग 100 कार्यकर्ता व नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, कई ने तो राजनीति से भी संन्यास ले लिया है। इनमें बहुतों का मानना है कि सेना के कारण ही पाक का वजूद है। इसलिए सेना के ठिकानों पर हमले नहीं होने चाहिए थे। देश की बदनामी हुई है। देश को अरबों रुपये का नुकसान हुआ है। पीटीआई लगभग बिखर गई है। इमरान खान का यह भी आरोप है कि गठबंधन सरकार के दबाव में ही उनकी पार्टी के नेताओं ने इस्तीफे दिए हैं। सरकार इससे इन्कार करती है।
खबर यह भी है कि गठबंधन सरकार ने सेना की मदद से पीटीआई को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई है। इमरान को अब अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा है। उनके खिलाफ अदालतों में 100 से ज्यादा मामले चल रहे हैं, जिनमें देशद्रोह का मामला भी है। अगर यह मामला साबित हो गया, तो उन्हें भी सजा देकर जेल में डाल दिया जाएगा। पाकिस्तान का राजनीतिक संकट दिन-ब-दिन गहरा होता जा रहा है। कायदे से वहां सत्ता बदलने के बाद संविधान के अनुसार, 90 दिन में चुनाव होने चाहिए थे। लेकिन अभी तक चुनाव की कोई तारीख तय नहीं हुई। पाकिस्तान पर दूसरे देशों व अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का 30 अरब डॉलर का कर्ज है। अगले साल 2024 में वित्तीय खर्चों के लिए 40 अरब डॉलर की जरूरत होगी। पाकिस्तान में रुपया 301 डॉलर के पार हो गया है। पाकिस्तान के मौजूदा हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था उसे कर्ज नहीं देना चाहती है।
वहां की जनता महंगाई से बेहाल है, उन्हें दो जून की रोटी भी मुश्किल से नसीब होती है। घी, तेल, आटा, सब्जियां, पेट्रोल की कीमत आसमान छू रही हैं। बेरोजगारी बेकाबू हो गई है। भ्रष्टाचार सारी हदें तोड़ चुका है। लूटमार इतनी आम हो चुकी है कि कोई गली, बाजार सुरक्षित नहीं है। जहां तक सरकार का सवाल है, वह इस संकट का कोई ठोस हल तलाश करने के बजाय कर्ज हासिल करने का एक आसान रास्ता अपनाए हुए है।
पाकिस्तान की समस्याएं गंभीर हैं। संकट से बाहर निकलने के लिए राजनीतिक वार्ता के सिवा कुछ नजर नहीं आता है। पाकिस्तान के प्रसिद्ध इतिहासकार डा. इश्तिहाक अहमद ने पाक की मौजूदा स्थिति पर कहा है कि अगर उसको अपना अस्तित्व बचाना है, तो उसे भारत के साथ व्यापार की शुरुआत व शांति स्थापना के लिए काम करना होगा।