गरीब पाकिस्तान में शाही शादियां
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पाकिस्तान में यह एक शानदार और यादगार शाही शादी थी, जिसमें भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच करीब चार हजार मेहमानों की मौजूदगी थी। शर्मिला फारूकी की यह शादी न सिर्फ राष्ट्रीय मीडिया में छाई हुई थी, बल्कि इससे जुड़ी वे तमाम कहानियां थीं, जो किसी शादी को परीकथा-सी पहचान देते हैं। इस समारोह का पहले से किया जा रहा महिमामंडन, समृद्धि और फिजूलखर्ची की तस्वीरें, और एक खुशहाल जोड़े द्वारा नए जीवन की शुरुआत-यानी यह मौका जीवन को खुशहाल बनाती हर चीज की जैसे तस्दीक कर रहा था। खूबसूरत लिबास और शाही दावत की ये तस्वीरें, दुर्योग से, एक दरिद्र देश का मजाक उड़ाती ज्यादा लग रही थीं!
यह पहली शादी नहीं है, जिसके बारे में राष्ट्रीय मीडिया ने पल-पल की जानकारी दी। कुछ महीने पहले हमने इमरान और रेहम खान की शादी के दौरान भी मीडिया में छाए पागलपन को देखा था, जबकि वह शादी पेशावर की दर्दनाक घटना के कुछ ही हफ्ते बाद हुई थी। धन-दौलत के बेहिसाब प्रदर्शन ने तब उस त्रासदी को मानो झुठला देने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं, इमरान-रेहम खान की शादी ने महीनों चले सरकार-विरोधी प्रदर्शनों की यादों को जैसे धुंधला कर दिया था। वैसे भी उन प्रदर्शनों से सरकार-विरोधी पार्टियों को कुछ हासिल नहीं हुआ था। उस राजनीतिक विफलता के बावजूद इमरान खान के जीवन में नई खुशियां आईं।
मुल्क के राजनेताओं के तौर-तरीकों का हमारे रोजाना की जिंदगी पर तो खैर असर पड़ता ही है, ऐसी शाही शादियों के जरिये, ऐसा लगता है, कि वे अब हमारे निजी जीवन पर भी कब्जा जमाते जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या हम कभी इनसे अपनी नजरें फेर सकेंगे। कृपया मुझे कहने दीजिए कि पाकिस्तान के राजनेता गाहे-बगाहे मीडिया में जितनी जगह घेरते हैं, उतनी जगह दुनिया के अधिकतर मुल्कों के राजनेता नहीं घेरते। हॉलीवुड और एनएफएल (नेशनल फुटबॉल लीग) को मिला देने से जितना बड़ा आभामंडल तैयार होता है, हमारे राजनेता उसके बराबर हैं। उनकी चर्चा और प्रसिद्धि तो अपनी जगह है ही, इस तरह के मौकों पर वे अपनी ताकत का भी बेहिसाब इस्तेमाल करते हैं। पाकिस्तान जैसे एक विकासशील देश में, जहां पारदर्शिता नहीं है और न ही निगरानी की मुकम्मल व्यवस्था, वहां ताकत का सिर्फ इस्तेमाल ही नहीं होता, बल्कि कई बार बेजा इस्तेमाल भी होता है, जो ज्यादा दर्दनाक है।
मैंने शायद पहले इसका जिक्र नहीं किया कि गरीब देशों के हमारे ये राजनेता बिल गेट्स जितने अमीर हैं! पाकिस्तान के पांच सबसे अमीरों की फेहरिस्त देखें, तो उनमें एक मौजूदा प्रधानमत्री होंगे, और दूसरे पूर्व राष्ट्रपति। एक गरीब देश में रॉक स्टार से लेकर बौद्धिक तक और अमीरों से लेकर नामचीन लोगों तक पर यहां के राजनीतिक अमीरों की पकड़ देखने लायक है। इस मुल्क में ऐसे भाग्यशाली लोगों की संख्या बहुत कम है, जिन्हें निकाह के लिए 'चुना' जाता है। और उसके बाद हम आम लोग तड़क-भड़क वाली शाही शादियों के गवाह बनते हैं।
लेकिन एक बड़ा सवाल फिर भी रह जाता है। चूंकि इन लोगों ने हमारे निजी क्षणों पर कब्जा कर रखा है, पर क्या ये हमारे लिए रोल मॉडल हैं, जिनका अनुकरण किया जाए। यहां अनेक राजनेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं। शर्मिला फारूकी के पिता, उस्मान फारूकी की ही बात करें, तो उन पर भ्रष्टाचार के अलावा 195 अरब रुपये के गबन का आरोप है! आखिरकार राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) ने कई अन्य बड़े लोगों की तरह उनके परिवार को भी राहत दी थी। अभी पिछले ही दिनों हमने नीलोफर तूफान के नाम पर सिंध विधानसभा में विधायकों को मजाक करते सुना। विधानसभा के स्पीकर ने उस बहस का अंत आखिरकार यह कहकर किया कि कोई पाक चीज ही शहर को किसी तूफान से बचाएगी। किसी दूसरे लोकतांत्रिक देश में ऐसी बहस पर तूफान मच जाता। पर पाकिस्तान में ऐसी बहसें खबर भी नहीं बनतीं।
इन सबके बीच कुछ समय के लिए उन आम पाकिस्तानियों के बारे में सोचें, जो मेहनत से काम करते हैं। ताकत, प्रसिद्धि और पैसे के प्रदर्शनों का लगातार गवाह बनते मुल्क में ये आम लोग हमेशा कुछ खास जुमला बुदबुदाते हैं, जैसे-'ये लोग कभी पकड़े नहीं जाएंगे' या 'यह पाकिस्तान है।' शर्मिला फारूकी की शाही शादी के दृश्य देखकर उन्हें कैसा लगा होगा?
समस्या केवल यह नहीं है कि पाकिस्तान के राजनेता भ्रष्ट हैं। समस्या सिर्फ यह नहीं है कि वे नाकाबिल हैं, कानून तोड़ते हैं और अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करते हैं। इस तरह की चीजें तो हर देश में कमोबेश होती होंगी। पाकिस्तान में समस्या यह है कि इस तरह का तमाम गलत काम करने के बाद हमारे राजनेता हम पर हंसते हैं, हमारा मजाक उड़ाते हैं, शादी के मौके पर तड़क-भड़क वाले लिबास में अपनी अमीरी का प्रदर्शन करते हैं।
बहरहाल, राज्य विधानसभा की सदस्य और सिंध के मुख्यमंत्री की पूर्व सलाहकार शर्मिला फारूकी का जीवन आखिरकार सुखद मोड़ पर पहुंच गया है। मैं तो सिर्फ हैरान होकर यह सोच रहा हूं कि पाकिस्तान के ये बड़े लोग इतिहास के हाशिये पर आखिर कब जाएंगे।
(एक्सप्रेस ट्रिब्यून में उनके ब्लॉग से)