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आर्थिक संकट में पाकिस्तान

कुलदीप तलवार Updated Mon, 03 Sep 2018 05:53 PM IST
कुलदीप तलवार
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इमरान खान को पाकिस्तान की बागडोर उस समय मिली है, जब वह अनेक संकटों से घिरा है। इसमें आर्थिक संकट सबसे गंभीर है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के उपाध्यक्ष एवं नए वित्त व राजस्व मंत्री असद उमर का मानना है कि देश को संगीन आर्थिक संकट से निकलने के लिए राष्ट्रीय खजाने को अगले कुछ सप्ताह में 12 अरब डॉलर की सख्त जरूरत है। पाकिस्तान का चालू खाता घाटा बढ़कर करीब 18 अरब डॉलर हो गया है, जो इतिहास का सबसे बड़ा घाटा है। विदेशी निवेश पूंजी भंडार घटकर नौ अरब डॉलर पर आ गया है। इससे दो महीने से ज्यादा का आयात बिल भी नहीं चुकाया जा सकता। यह चिंता का विषय इसलिए है कि पाकिस्तान को जितने पेट्रोलियम पदार्थों की जरूरत है, उसका चौथा हिस्सा आयात किया जाता है।
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द न्यूज के स्तंभकार फरख सलीम का कहना है कि जल्दी वह समय आएगा, जब पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नजर आएंगी। पाकिस्तान का व्यापार घाटा भी 25 अरब डॉलर हो गया है। पिछले एक साल में पाक का आयात काफी बढ़ा है, जबकि निर्यात बहुत कम हुआ है। इस वित्त वर्ष में उसके आयात में करीब छह अरब डॉलर की वृद्धि हुई है, जबकि निर्यात केवल दो अरब डॉलर का हुआ। पाक का सार्वजनिक कर्ज भी पिछले एक साल में 13 अरब डॉलर बढ़ा है, जिसमें बाहरी कर्ज करीब आठ अरब डॉलर है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 1.3 प्रतिशत घटा है। उसकी जीडीपी के बारे में अलग-अलग तरह की बातें हो रही है। आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के मुताबिक, पाकिस्तान की जीडीपी की दर 3.6 फीसदी है, जबकि पाक सत्ता प्रतिष्ठान उसे 5.4 प्रतिशत बता रहा है।

इमरान खान को जिताने में युवाओं ने बड़ी भूमिका अदा की है। नई सरकार को देश के 64 प्रतिशत युवाओं का समर्थन चाहिए, तो उसे हर साल 13 लाख रोजगार का इंतजाम करना होगा, जिसके लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी। वहां उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर जुलाई, 2018 में चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में आई तेजी रुपये के गिरने और महंगााई बढ़ने का प्रमुख कारण है।

इधर पेंटागन ने पाकिस्तान को 30 करोड़ डॉलर की मदद रोकने का एलान किया है। इससे पहले पिछले जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोकने की बात कही थी। नई सरकार के लिए यह बड़ा झटका है। वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्था (एफएटीएफ) ने आतंकवाद का वित्तपोषण बंद न करने के कारण विगत जून में पाकिस्तान को ग्रे सूची में शामिल किया था। इस सूची में किसी देश को शामिल करने पर उसकी अर्थव्यवस्था को तो नुकसान पहुंचता ही है, उसकी वैश्विक साख पर भी असर पड़ता है। इमरान के सामने ‘फौज के आदमी’ की छवि तोड़ने की भी चुनौती है। फौज के सहयोग से सत्ता में आने के कारण वह रक्षा बजट में कटौती नहीं करा पाएंगे। उनके शपथ ग्रहण के तुरंत बाद चीन के शीर्ष बैंकों ने कहा था कि वे पाकिस्तान को और अधिक कर्ज देने की स्थिति में नहीं हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और वन बेल्ट-वन रोड के लिए चीन ने पहले ही पाक को अरबों डॉलर का कर्ज दिया है। अब पाकिस्तान के सामने आईएमएफ की शरण में जाए बिना दूसरा रास्ता नहीं है।
 
लेकिन अमेरिका पहले ही पाक को 12 अरब डॉलर का कर्ज न देने के लिए आईएमएफ को आगाह कर चुका है। अमेरिका के मुताबिक, पाकिस्तान को कर्ज देने का फायदा चीन को मिलेगा। जाहिर है, इमरान खान के सामने मुल्क को आर्थिक परेशानियों से बाहर निकालने की चुनौती बड़ी है।

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