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कर्ज भी नहीं मिल रहा पाकिस्तान को, सरकार ने चार वित्त मंत्री बदले, लेकिन अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी

Mon, 05 Jul 2021 06:28 AM IST
kuldeep talwar कुलदीप तलवार
Updated Mon, 05 Jul 2021 06:28 AM IST
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सार
  • इमरान सरकार में करीब तीन साल में चार वित्त मंत्री हुए, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बद से बदतर हो गई।
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Pakistan Economic Conditions are worst even not getting loans
इमरान खान - फोटो : Twitter@ imran khan

विस्तार

अगले महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर इमरान खान के तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। उन्होंने 18 अगस्त, 2018 को प्रधानमंत्री का पद संभाला था। लेकिन कल रविवार से ही 11 राजनीतिक दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिव मूवमेंट (पीडीएम) का सरकार के खिलाफ आंदोलन फिर से शुरू हो चुका है। अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री इमरान खान अवाम से बराबर देश के हालात सुधारने के वादे करते रहे, लेकिन कोई खास अमल नहीं हुआ। उन्होंने खराब आर्थिक हालत में सुधार लाने के दावे भी किए और कहा कि हमारी सरकार ने चालू खाते का घाटा खत्म किया।



जबकि हकीकत यह है कि सरकार ने इस दौरान चार वित्त मंत्री बदल दिए, लेकिन खराब अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी। चौथे वित्त मंत्री शौकत तरीन ने सरकार को साफ कह दिया है कि देश की आर्थिक हालत सुधर नहीं रही, पूंजी निवेश नहीं हो रहा, महंगाई बढ़ रही है। सुधार लाने के लिए सख्त फैसले लेने पड़ेंगे। लेकिन अब तक कोई सख्त फैसला सामने नहीं आया। आर्थिक हालत इस कदर चरमरा गई है कि सरकार को कर्मचारियों को कर्ज लेकर वेतन देना पड़ रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में व्यापारिक घाटा बढ़ गया है, क्योंकि निर्यात में कमी और आयात में वृद्धि हुई है। इसीलिए सरकार का चारों तरफ विरोध बढ़ रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी पाकिस्तान को कहीं से कोई कर्ज नहीं मिल रहा। पाकिस्तान तीन अरब डॉलर के कर्ज की वापसी के लिए चीन से 10-12 साल का समय बढ़ाने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।


अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग न देने पर उसे दी जाने वाली सुरक्षा सहायता भी रोक दी है, जिससे सरकार को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान में महंगाई आसमान छू रही है। मई में देश में महंगाई की दर 10.9 प्रतिशत के शिखर पर थी। इसके लिए सरकार की खराब नीतियां ही जिम्मेदार हैं। जब चीनी के भाव 100 रुपये किलो हो गए, तो पाक मंत्रिमंडल ने भारत से चीनी व कपास मंगवाने का फैसला लिया। लेकिन इसके अगले दिन ही इसे सेना व कट्टरपंथियों के दबाव में रद्द करना पड़ा। अब चीनी दूसरे देशों से समुद्र के रास्ते मंगवाई जा रही है, जिससे उस पर भारी खर्चा करना पड़ रहा है। ऐसे ही कपड़ा उद्योग को भी जबर्दस्त नुकसान पहुंचा है। सूत के धागे की कमी के कारण हजारों कपड़ा फैक्टरियां बंद हो गई हैं, जिससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री इमरान खान कह रहे हैं कि महंगाई की हालत जल्दी सुधर जाएगी। लेकिन आज वहां के गरीब लोगों के लिए जरूरी घरेलू चीजें जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

इमरान खान ने सत्ता संभालने से पहले जनता से वादा किया था कि भ्रष्टाचार खत्म कर देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनकी सरकार में भी भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। जैसे ग्वादर बंदरगाह में समुद्र के खारे पानी से शुद्ध पेयजल बनाने की योजना में सवा सौ करोड़ पाकिस्तानी रुपये का घोटाला, जिससे इमरान खान की महत्वाकांक्षी ग्वादर योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। भारत से भी रिश्ते इन दिनों सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं। अमेरिका व कई यूरोपीय देशों के अलावा सऊदी अरब से भी उसके रिश्ते खराब हो चुके हैं। पाक में मानवाधिकारों के हनन पर अमेरिका ने अपनी ताजा रिपोर्ट में गहरी चिंता जताई है। इस रिपोर्ट में कई हत्याओं और अपहरणों के साथ सिंधी हिंदुओं, पख्तूनियों और बलोचियों का गायब होना भी शामिल है। वहां अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थानों पर तोड़फोड़ होती रहती है।

बहुसंख्यक समुदाय के लोग उनकी लड़कियों का धर्म परिवर्तन करके उनसे जबर्दस्ती निकाह कर लेते हैं। कोरोना महामारी को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पाने के चलते जनता में
रोष है और इमरान सरकार वैक्सीन के लिए चीन पर निर्भर है। कुल मिलाकर पाकिस्तान में इन दिनों कुशासन, महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी चरम सीमा पर है। जनता सत्ता में तब्दीली चाहती है। इमरान खान के इस्तीफे के लिए फिर से पीडीएम ने देश भर में आंदोलन शुरू कर दिया है। अब देखना है कि अगले चंद दिनों में वहां के हालात क्या करवट लेते हैं!

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