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ट्रंप की वीजा नीति का विरोध

Thu, 13 Sep 2018 06:42 PM IST
अवधेश कुमार
अवधेश कुमार Updated Thu, 13 Sep 2018 06:42 PM IST
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Opposes Trump's visa policy
अवधेश कुमार

अमेरिका की प्रमुख कंपनियों ने डोनाल्ड ट्रंप की एच-1 बी वीजा सहित अन्य नीतियों का विरोध किया है। बिजनेस राउंड टेबल के सदस्यों ने अमेरिका की गृह मंत्री को पत्र लिखा है कि अमेरिकी आव्रजन नीति के असंगत होने की वजह से कानून का अनुपालन करने वाले कर्मचारियों में बेचैनी है। इस पत्र पर एपल के सीईओ टिम कुक, पेप्सिको की चेयरमैन एवं सीईओ इंद्रा नूयी, मास्टरकार्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ अजय बंगा, सिस्को सिस्टम्स के चेयरमैन एवं सीईओ चुक रॉबिंस जैसे लोगों के हस्ताक्षर हैं। बिजनेस राउंड टेबल अमेरिका की प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारियों का संघ है। इसने कहा है कि अनिश्चितता की वजह से आर्थिक विकास प्रभावित होगा और अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता खत्म हो जाएगी।


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ट्रंप ने संपूर्ण आव्रजन नीति में बदलाव की घोषणा की थी, हालांकि ट्रंप प्रशासन की ओर से विगत जून में कहा गया था कि एच-1 बी तथा एच-4 वीजा में तत्काल बदलाव नहीं किया जा रहा। किंतु ऐसा होता, तो इन कंपनियों को सामने नहीं आना पड़ता। ये कह रही हैं कि अमेरिका में ग्रीन कार्ड की इतनी कमी है कि कई बार कर्मचारी दशकों तक आव्रजन प्रक्रिया में ही फंसे रहते हैं। इन्होंने एच-1बी वीजा के तहत जीवन साथी को अमेरिका में रहने देने संबंधी नियमों में तत्काल बदलाव की मांग की है।

हालांकि एच-1बी और एच-4 बी वीजा पर अमेरिकी प्रशासन के रुख का पहले से विरोध हो रहा है। विगत जनवरी में वहां के कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया, जिनमें से ज्यादातर भारतीय मूल के थे। उनका कहना था कि अगर ग्रीन कार्ड धारकों को एच-1बी वीजा विस्तार न दिए जाने का प्रस्ताव अमल में आता है, तो पांच लाख से ज्यादा भारतीयों को वापस लौटना पड़ सकता है।

एच-1बी वीजा एक गैर आव्रजन वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष पदों पर विदेशी कर्मचारी रखने की अनुमति देता है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेषज्ञता श्रेणी में किसी विदेशी कामगार को वीजा देती हैं, जिसके लिए अभ्यर्थी का ग्रेजुएट होना जरूरी है। अमेरिका में मुख्य रूप से आईटी कंपनियां भारत और चीन से हजारों की संख्या में कर्मचारी रखने के लिए हर साल एच-1बी वीजा पर निर्भर रहती हैं। इसके साथ एच-4 बी वीजा भी जुड़ा है, जो ऐसे पेशेवरों को अपना परिवार वहां रखने की अनुमति देता है।

अभी की व्यवस्था में आवेदक का ग्रीन कार्ड लंबित रहने के दौरान तीन साल की अवधि के लिए उसके एच-1बी वीजा को दो बार विस्तार देने की इजाजत है। पर नए प्रस्ताव के तहत वीजा की मियाद खत्म होने और ग्रीन कार्ड जारी होने के बीच की अवधि में पेशेवरों को अमेरिका में रुकने की अनुमति नहीं होगी।
 
इसका असर ऐसे हजारों विदेशी कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनका ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित है। भारत को परेशानी एच-4 वीजा को लेकर भी है। ट्रंप ने ओबामा के समय शुरू की गई एच-4 वीजा नीति खत्म करने का एलान किया है। अमेरिका में 70 हजार से ज्यादा एच-4 वीजा धारक हैं।

ट्रंप प्रशासन की 'बाय अमेरिकी, हायर अमेरिकी' नीति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में आव्रजन नियम सख्त करने की बात कही थी। दरअसल आर्थिक संकट और बेरोजगारी से अमेरिका में विदेशियों के खिलाफ माहौल बना। किंतु खुली अर्थव्यवस्था में ऐसे संरक्षणवाद के नकारात्मक प्रभाव ज्यादा होते हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि अमेरिकी कपंनियों के सामने आने के बाद ट्रंप प्रशासन अपनी आव्रजन नीति पर पुनर्विचार करेगा।

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