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अक्षय ऊर्जा ही बचाएगी

Mon, 22 May 2017 06:45 PM IST
सीमा जावेद
सीमा जावेद Updated Mon, 22 May 2017 06:45 PM IST
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only Renewable energy will save us
सीमा जावेद

भारतीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बॉन, जर्मनी में जलवायु परिवर्तन को लेकर युनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्‍वेंशन ऑन क्‍लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) की हाल ही में हुई वार्ता के दौरान वियना एनर्जी फोरम में पेरिस में भारत द्वारा जताई गई प्रतिबद्धताओं को दोहराया कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में क्या होता है, भारत अपनी जिम्मेदारी पूरा करेगा। दरअसल जिस तरह मौसम का बदला-बदला रूप हमें देखने को मिल रहा है, वह इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से भारत एक है।

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जलवायु परिवर्तन की इस संक्रमण बेला में भारत अपने ऊर्जा उत्पादन के मामले में दोराहे पर खड़ा है। जहां एक ओर वर्तमान में भारत में 370 कोयला आधारित बिजली संयंत्र बनाने की योजना देश की पेरिस जलवायु प्रतिज्ञा को गंभीर रूप से कमजोर कर रही है। वहीं दूसरी तरफ तृतीय नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान (एनईपी3) के मसविदे के अनुसार, वर्ष 2027 तक भारत की स्‍थापित विद्युत उत्‍पादन क्षमता का आधे से ज्‍यादा हिस्‍सा (56.5 प्रतिशत) गैर जैव-ईंधन वाले अक्षय ऊर्जा विकल्‍पों, परमाणु तथा पनबिजली आधारित हो जाएगा, जो भारत की पेरिस जलवायु प्रतिज्ञा से ज्यादा है।
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भारत के पास मौका है कि वह भविष्य के लिए ऐसी ऊर्जा के लिए आधारभूत संरचना तैयार करे, जो टिकाऊ और बेहतर हो व ग्रामीण आबादी की जरूरतों को पूरा कर सके। वर्तमान में मौजूद केंद्रीय बिजली संयंत्र और कोयले पर आधारित ऊर्जा योजनाएं पृथ्वी के लिए विध्वंसकारी भी हैं और गरीबों की जरूरतों को पूरा करने वाले भी नहीं। भारत ने अपने उत्सर्जन को 33 से 35 प्रतिशत जीडीपी के हिसाब से कम करने और 2030 तक गैर जीवाश्म आधारित बिजली उत्पादन क्षमता के अपने हिस्से को चालीस फीसदी तक बढ़ाने का वचन दिया है।
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भारत अगर वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट (एक गीगावॉट 1,000 मेगावॉट के बराबर है) उत्‍पादन के अपने अक्षय ऊर्जा लक्ष्‍य को हासिल कर लेता है, जैसा कि उसने वर्ष 2015 के पेरिस समझौते के तहत संकल्‍प लिया था, तो उसे उसके बाद मौजूदा समय में निर्माणाधीन 50 गीगावॉट की परियोजनाओं को छोड़कर वर्ष 2027 तक कोयला आधारित नई ऊर्जा क्षमता की जरूरत नहीं होगी। हालांकि भारत में 1,76,833 मेगा वाट की नई कोयला उत्पादन क्षमता की योजना है।


दिसंबर 2016 में भारत में केवल 50 गीगावॉट से कुछ ज्‍यादा ही अक्षय ऊर्जा क्षमता थी। उसमें भी वायु आधारित बिजली का हिस्‍सा 57.4 प्रतिशत तथा सौर ऊर्जा का हिस्‍सा 18 प्रतिशत था। इससे भारत की कुल स्‍थापित 314 गीगावॉट क्षमता में अक्षय ऊर्जा की हिस्‍सेदारी 15 प्रतिशत थी, वहीं कोयला आधारित बिजली की हिस्‍सेदारी 60 प्रतिशत थी। बाकी हिस्‍सा बड़ी पनबिजली परियोजनाओं, परमाणु, गैस तथा डीजल आधारित बिजली का है। अक्षय ऊर्जा उत्‍पादन को वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट तक बढ़ाने के वर्ष 2015 के राष्‍ट्रीय लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए भारत में बहुत तेजी से सौर ऊर्जा का विकास होता नजर आ रहा है। भारत का ऊर्जा परिदृश्य इतनी तेजी से बदल रहा है कि शोधकर्ताओं को इसके साथ चलने में कठिनाई महसूस हो रही है।

-लेखिका पर्यावरणविद एवं स्वतंत्र पत्रकार हैं

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