फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   OFBJP: BJP is helping the Indian people, meaning of political preparation to lay electoral board in 2024

ओएफबीजेपी : भारतवंशियों को साध रही है भाजपा, 2024 में चुनावी बिसात बिछाने की सियासी तैयारी के मायने

Thu, 10 Nov 2022 06:46 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Thu, 10 Nov 2022 06:46 AM IST
विज्ञापन
सार
ओएफबीजेपी द्वारा आयोजित बड़े सम्मेलनों ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को एक नया मुकाम दिया। वे अपने प्रधानमंत्री से तुरंत जुड़ सकते थे, जो उनकी भलाई में रुचि रखते थे, भले ही वह छोटी यात्रा पर थे। 
loader
OFBJP: BJP is helping the Indian people, meaning of political preparation to lay electoral board in 2024
भारत का लोकतंत्र - फोटो : iStock

विस्तार

भाजपा और आरएसएस ने 2024 के संसदीय चुनाव की तैयारी के मद्देनजर विदेशों में बसे भारतीयों में जोश भरने के लिए अपनी विदेशी गतिविधियों को तेज कर दिया है। अब भाजपा का इरादा ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीयों को जोड़ने का है। मोदी सरकार ने इस मुहिम में आठ केंद्रीय मंत्रियों को लगाने की योजना बनाई है, जो प्रवासी भारतीयों के साथ बैठक करेंगे। भाजपा ने ऑस्ट्रेलिया में भी अपनी पैठ बना ली है। 



ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (ओएफबीजेपी) इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है, क्योंकि इस संगठन ने स्थानीय नियमों और विनियमों का पालन करते हुए विभिन्न देशों में खुद को पंजीकृत किया है। फोरम ने अपनी घोषणा में खुलासा किया है कि इसकी गतिविधियां राजनीतिक प्रकृति की हैं और उद्देश्य भाजपा को बढ़ावा देना है। भाजपा के विदेश विभाग के प्रभारी डॉ. विजय चौथाइवाले पार्टी कार्यक्रम को विदेशों में प्रचारित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 


वह प्रधानमंत्री, पार्टी के बड़े नेताओं और सरकार के बीच तालमेल बिठाते हैं और विदेशमंत्री एस. जयशंकर के नियमित संपर्क में हैं। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में उन्हें नियमित जानकारी मिलती है। वह लगातार यात्रा कर रहे हैं और 'भगवा परिवार' की विभिन्न इकाइयों और विदेशों में हिंदू संस्कृति और धर्म को बढ़ावा देने वाले विभिन्न सहयोगियों से संपर्क कर रहे हैं। उन्हें भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद से भी काफी मदद मिलती है, जिसके प्रमुख विनय सहस्रबुद्धे हैं, जो आरएसएस के कट्टर सदस्य हैं। 

इनका इरादा भारतीय संस्कृति के साथ प्रवासी भारतीयों को जोड़ना है। ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के चालीस से ज्यादा देशों में चैप्टर हैं। जब भी प्रधानमंत्री विदेश दौरे पर जाते हैं, तो फोरम द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों को संबोधित करते हैं, जिससे फोरम को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, चौथाइवाले लगातार विदेशी दूतावासों के संपर्क में भी हैं। महीने में एक बार वह पार्टी प्रमुख जगत प्रकाश नड्डा की उपस्थिति में भारत में विदेशी राजनयिकों की बैठक आयोजित करते हैं। 

ओएफबीजेपी 25 से 30 राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों में समर्थकों का एक कैडर बनाने में कामयाब रहा है, जहां भारतवंशियों की मजबूत उपस्थिति है। हिंदू स्वयंसेवक संघ कहे जाने वाले ये लोग विदेशों में भाजपा की स्वयंसेवी सेना हैं, जिनमें से कुछ की आरएसएस में गहरी पैठ है। अतीत में प्रधानमंत्रियों द्वारा भारत के सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने के लिए भारतवंशियों या प्रवासी भारतीयों का इस्तेमाल किया जाता था। 

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसका इस्तेमाल भारत को एक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में पेश करने के लिए किया था, जो भू-राजनीति में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था। इंदिरा गांधी ने पुपुल जयकर की मदद से इसका इस्तेमाल कर विदेशों में भारतीय त्योहारों के जरिये भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रचार किया। सैम पित्रोदा के सहयोग से राजीव गांधी ने विदेशों में आईटी और प्रौद्योगिकी गंतव्य के रूप में भारत की छवि को सुधारने के लिए इसका इस्तेमाल किया। 

लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीयों का इस्तेमाल एक अलग प्रभाव में किया है। उन्होंने न केवल विदेशों में भारत को एक बढ़ती हुई ताकत के रूप में पेश किया और भारतीय समुदायों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना पैदा की, बल्कि घरेलू मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए भी राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए। मोदी और उनकी पार्टी ने प्रवासी भारतीयों का इस्तेमाल चुनावी उपकरण के तौर पर किया है। 

मसलन, वर्ष 2019 के चुनावों के दौरान कई प्रवासी अपने परिजनों और दोस्तों को यह समझाने के लिए भारत आए थे कि मोदी के सत्ता में आने के बाद से विदेशियों की नजर में भारत को कितना गौरव प्राप्त है। इसके अलावा भाजपा की विदेशी इकाइयों ने विभिन्न धन संग्रह पहलों का आयोजन भी सुनिश्चित किया। इसने न केवल पार्टी का खजाना भरा, बल्कि प्रवासी भारतीयों में भागीदारी की भावना पैदा की, जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं था। 

इसके अलावा मोदी की विदेश यात्रा और विभिन्न हिंदू समूहों के साथ उनकी बातचीत ने भी धर्म को बढ़ावा दिया और 'हिंदू हृदय सम्राट' के रूप में उनका उदय सुनिश्चित किया। इस पहल को जारी रखते हुए मोदी फरवरी, 2023 में मेलबर्न और कैनबरा का दौरा करेंगे और क्वाड बैठक में भाग लेंगे। आधिकारिक बैठक के अलावा वह प्रवासी भारतीयों की एक बड़ी सभा को संबोधित करने वाले हैं। अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान इन पंक्तियों के लेखक ने देखा है कि इसकी तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है और प्रवासी भारतीय उत्साहित हैं। 

जब चुनावी पंडित आंकड़े एकत्र करते हैं, तो वे ऐसी पहलों से होने वाले फायदे को भूल जाते हैं। भाजपा को लगता है कि इन पहलों से 2024 के चुनाव में भी पार्टी को फायदा होगा। पूर्व के कांग्रेसी शासन के दौरान राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने सीमित मंचों पर प्रवासी वर्गों के साथ बातचीत की। केवल चुनिंदा लोगों को ही बैठकों में बुलाया गया था, जिनका प्रचार नहीं हुआ। लेकिन मोदी ने इसे खोला और बड़े सम्मेलन हॉलों और खेल स्टेडियमों में आयोजन होने लगा। 

ओएफबीजेपी द्वारा आयोजित इन बड़े सम्मेलनों ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को एक नया मुकाम दिया। वे अपने प्रधानमंत्री से तुरंत जुड़ सकते थे, जो उनकी भलाई में रुचि रखते थे, भले ही वह छोटी यात्रा पर थे। इसने मोदी को हिंदुओं के वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में भी मदद की। ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानी सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले छह महीनों में आठ भारतीय केंद्रीय मंत्रियों ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया है। 

एक लाख से अधिक हरियाणवी, गुजराती, तमिल, तेलुगू और बांग्ला भाषी भारतवंशी ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। भाजपा को लगता है कि प्रवासी भारतीयों की मदद से उसे दो-तीन प्रतिशत अतिरिक्त वोट जुटाने में मदद मिलेगी। चुनाव जीतने के एकमात्र उद्देश्य के साथ मोदी-शाह की रणनीति में पार्टी मशीनरी लगातार काम कर रही है। इसलिए पार्टी 2024 में भी निर्णायक जीत की उम्मीद कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed