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अब लुक वेस्ट पर जोर

Sun, 12 Feb 2017 07:33 PM IST
महेंद्र वेद
महेंद्र वेद Updated Sun, 12 Feb 2017 07:33 PM IST
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Now  focus on look west
महेंद्र वेद

पिछले महीने भारत के 68वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दुबई स्थित दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा दो दिनों तक तिरंगे के रंग में जगमगाता रहा। इस मौके पर अबूधाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान मुख्य अतिथि थे, जो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ-साथ पूरे खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत के बढ़ते संबंधों का संकेत करता है। अल नाहयान 2006 में सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला अब्दुलअजीज अल सौद के बाद गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने वाले दूसरे अरब नेता थे। उस यात्रा के बाद सऊदी अरब भारत के लिए तेल और गैस का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। इन दस वर्षों में काफी कुछ हुआ, जिसे रेखांकित किए जाने की जरूरत है।

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पहला, भारत तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश बना हुआ है। दूसरा, यह एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। तीसरा, इसकी एक बड़ी और अच्छी तरह से प्रशिक्षित जनशक्ति अपनी पसंद के किसी देश में स्थानीय लोगों के साथ बिना किसी संघर्ष के काम करती है। चौथा, यह औद्योगिक जानकारी और प्रौद्योगिकी का एक बड़ा केंद्र है। पांचवां, एक समाज के रूप में ग्रहणशील और दूसरों के मुकाबले सहिष्णु होने का इसका प्रणाणित रिकॉर्ड है। छठा, यह विदेशी निवेशकों को आमंत्रित करता है और यहां के निवेशक भी दूसरे देशों में निवेश करते हैं।
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जहां तक खाड़ी देशों के साथ रिश्तों की बात है, तो सिनेमा की तरह इसके अतीत और भविष्य को देखा जा सकता है। सातवीं शताब्दी से ही भारतीयों का खाड़ी क्षेत्र के साथ व्यापारिक रिश्ता रहा है, खासकर तेल व्यापार में उछाल के बाद पारस्परिक लाभ के कारण दोनों के रिश्ते बढ़े हैं।
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लुक ईस्ट के बाद भारत ने अब लुक वेस्ट की नीति के तहत खाड़ी क्षेत्र की तरफ ध्यान देना शुरू किया है। हर किसी की तरह भारत भी अपने पुराने संबंधों को भू-राजनीतिक मजबूरियों से जोड़ने लगा है, और बदलते वैश्विक परिदृश्य में पश्चिम (इसे ब्रेग्जिट और डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के संदर्भ में पढ़ें) खाड़ी से दूर जाना चाहता है।

हाल के कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी क्षेत्र में उसके मध्ययुगीन कबीलाई, जातीय व सांप्रदायिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद काफी कुछ दांव पर लगाया है। अल नाहयान मंत्रियों, अधिकारियों और व्यवसायियों के एक बड़े शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। यह इस बात का संकेत है कि खाड़ी क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझीदार है। भारतीय प्रवासी वहां अपनी सेवाएं देते हैं और बेहतर स्थिति में निवेशक बन जाते हैं।

भारत की नजर 60 अरब डॉलर के वित्तीय निवेश और बुनियादी संरचना तथा अन्य विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा पर है। जैसे अमीरात और एतिहाद के विमान भारत में और भारत से बाहर उड़ान भरते हैं, उसी तरह छोटे से कतर को भी उड्डयन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया है। दरअसल भारत और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

ज्यादातर खाड़ी देशों में नागरिकता असंभव है और वहां तात्कालिक वीजा पर काम करने की जरूरत होती है। संयुक्त अरब अमीरात में 28 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जो सालाना 14 अरब डॉलर भारत भेजते हैं। संयुक्त अरब अमीरात में होने वाला 40 फीसदी नया निवेश भारतीयों या भारतीय प्रवासियों द्वारा किया जाता है। पर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, नौकरी में कटौती और कर मुक्त प्रवास के अंत की आशंकाओं के साथ समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी खाड़ी आकर्षक गंतव्य है।

प्रोटोकॉल तोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अल नाहयान को गले लगाया। बढ़ती निकटता का संकेत देने के अलावा  मोदी ने उन अरबों से सुधार की मांग की, जो बिना सोचे-समझे आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। मोदी ने अगस्त, 2015 के अपने संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर हुई बातचीत पर दृढ़ता की मांग की, जब दोनों देशों ने दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद प्रायोजित करने, उसे समर्थन देने और उचित ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने या राज्य-नीति के रूप में आतंकवाद का इस्तेमाल करने की आलोचना की थी। एक तरफ सभ्यताओं के संघर्ष और दूसरी तरफ अल कायदा और इस्लामिक स्टेट की हिंसक दुश्मनी के बीच भारत उम्मीद करता है कि दाऊद इब्राहिम जैसे कानून तोड़ने वाले और खतरनाक भगोड़ों को खाड़ी में पनाह न मिले, जो भारत में कई आपराधिक मामलों में वांछित है और जिसके बारे में कहा जाता है कि कराची और दुबई के बीच आवाजाही करता है।

खाड़ी के नजरिये से देखें, तो भारत एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और जो सस्ते और व्यापक ज्ञान का स्रोत है। इसी तरह भारत को संयुक्त अरब अमीरात की आर्थिक प्रगति और बुनियादी संरचनाओं व मानव संसाधन के क्षेत्र में भविष्योन्मुखी योजना से सीखना होगा। संयुक्त अरब अमीरात जाकर काम करने वाले भारतीयों की बड़ी संख्या से इसमें काफी मदद मिल सकती है। यूएई नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल कर तेल और गैस से परे अपने आर्थिक क्षेत्र में विविधता ला सकता है और इसके लिए उसे इंजीनियरिंग एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय अनुभव से मदद मिल सकती है।

मोदी के 2015 के संयुक्त अरब अमीरात के दौरे में अमीरात ने बुनियादी संरचनाओं के क्षेत्र में 75 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। इनमें से ज्यादातर हाथ नहीं आने वाला। युवराज की यात्रा के बाद आपसी विचारों और परिणामों को सुनिश्चित करना विवेकपूर्ण होगा। खाड़ी में चीन भारत से कहीं आगे है। अब यह भारत पर है कि वह सुन्नी अरब को अपने से जोड़े, जैसा उसने ईरानी शिया के साथ किया था।


भारत को खाड़ी क्षेत्र में एक रणनीतिक साझीदार की जरूरत है और यूएई अपनी सौम्य राजशाही, आधुनिक सोच, नवोन्मेषी अर्थव्यवस्था की चाहत और पर्याप्त भारतीय मूल के लोगों के कारण इस सांचे में सटीक बैठता है।

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