फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Not just you thieves are also online Sharing life on social media common stay alert against criminals

केवल आप ही नहीं, चोर भी ऑनलाइन हैं: सोशल मीडिया पर जिंदगी साझा करना सामान्य, अपराधियों से सतर्क रहें

Thu, 01 Oct 2026 10:01 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Thu, 01 Oct 2026 10:01 AM IST
विज्ञापन
सार
सोशल मीडिया पर जिंदगी साझा करना आज सामान्य है, पर यही आदत कब घर, परिवार और संपत्ति की जानकारी अपराधियों तक पहुंचा दे, पता नहीं चलता।
loader
Not just you thieves are also online Sharing life on social media common stay alert against criminals
ऑनलाइन रहने के चलन के बीच सतर्कता जरूरी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के नागरकोइल शहर की घटना है। यहां की एक महिला इन्फ्लुएंसर तरह-तरह के वीडियो और रील्स बनाती थी। उसकी फॉलोइंग भी बहुत थी। इसी से प्रेरित होकर, उसने एक दिन अपने एक से एक कीमती गहने सोशल मीडिया पर दिखाए। अपने बेटे पर रुपयों की बारिश भी की। ऐसा करके वह बहुत खुश भी हुई। अब सोशल मीडिया पोस्ट तो सभी लोग देखते हैं। चोरों ने भी इसे देखा। बस एक रात, वे घर के पीछे के दरवाजे को काटकर अंदर आ पहुंचे। फिर, ढूंढते हुए उस अलमारी तक पहुंचे, जहां गहने और पैसे रखे थे। वहां से एक करोड़ रुपये के आभूषण और पचास हजार रुपये नकद चुरा ले गए। अब महिला पछता रही है। काश! पहले यह सब सोचा होता।



कई बार लोग कहीं घूमने जाने की बातें भी पोस्ट करते हैं और पीछे से चोरों की बन आती है। भारत में ही नहीं, विदेश में भी ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। शिवपुरी, मध्य प्रदेश में भी एक बार एक महिला ने अपने आभूषण और पैसों का वीडियो साझा किया था। वहां भी चोर आ धमके थे। परिवार के सदस्यों को एक कमरे में बंद करके, आठ-दस लाख रुपये के जेवर लूट ले गए। देहरादून में एक घरेलू सहायिका को पता था कि गहने कहां रखे हैं। उसने घर से दस लाख रुपये के सोने और हीरे के आभूषण चुरा लिए। उसकी शिकायत भी की गई, मगर तब कोई सुराग नहीं मिला था। सालभर बाद, उसी सहायिका ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उसने चुराए गए वही आभूषण पहन रखे थे। जिस घर से चोरी हुई थी, उनके एक रिश्तेदार ने इसे देखा और पीड़ित परिवार को खबर की। पुलिस हरकत में आई और उस महिला को पकड़ लिया गया। यानी कि सोशल मीडिया चोरी कराने और चोर पकड़वाने में भी कभी-कभी मदद कर सकता है।


दरअसल, इन दिनों सोशल मीडिया पर अपना रुतबा और जीवनशैली दिखाने के लिए लोग तरह-तरह के वीडियो साझा करते हैं। कहां गए, क्या खाया, किससे मिले, किससे लड़ाई हुई, किस घर में रहते हैं, घर की कीमत कितनी है और उसमें क्या-क्या सामान है-इन सबकी जानकारी भी सोशल मीडिया पर दी जाती है। यहां तक कि घर का पता, मोहल्ला, मुख्य और पीछे का दरवाजा, बेडरूम व बगीचे की जानकारी भी साझा कर दी जाती है। इसी तरह कौन-सी कार खरीदी, कितने बच्चे हैं, उनका जन्मदिन कब है, वे कहां पढ़ते हैं, क्या कर रहे हैं, नौकरी कहां लगी या शादी कब होने वाली है-यह सब भी सार्वजनिक किया जाता है। शादी किससे हो रही है, ससुराल की आर्थिक स्थिति कैसी है, शादी में क्या दिया जा रहा है, समारोह कहां होगा, कौन-सा बैंड या पार्लर बुक किया गया है और मेहंदी कहां लगवाई गई है, इसकी जानकारी भी सोशल मीडिया पर डाल दी जाती है। यानी जितनी भी बातें, घटनाएं हो सकती हैं, उन्हें एक तरह से ढोल पीटकर, सबको बता दिया जाता है।

आखिर इससे मिलता क्या है? निजता और निजी जगह की बातें खूब की जाती हैं, और अपनी जिंदगी से जुड़ी छोटी-बड़ी गोपनीय बातें पलभर में सार्वजनिक करने से भी लोग नहीं हिचकते। हो सकता है, इससे क्षणिक खुशी मिलती हो, लेकिन यही बातें कभी किसी बच्चे के अपहरण या डकैती जैसे गंभीर अपराधों का कारण भी बनती हैं। समझा यह जाता है कि यदि बड़े-बड़े उद्योगपति ऐसा कर सकते हैं, बॉलीवुड स्टार अपनी अमीरी का प्रदर्शन कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? हम क्या किसी से कम हैं? और यही कम न होने की भावना, कई बार भारी नुकसान करवा देती है। यह समझने वाली बात है कि अमीरों के संसाधन और उनके आसपास के सुरक्षा तंत्र के घेरे को अक्सर चोर-डकैत तोड़ नहीं सकते। इसलिए, वे उन्हें शिकार नहीं बना पाते। फिर, ऐसे लोगों के यहां पुलिस भी समय से पहुंच जाती है, आप तो इंतजार ही करते रहते हैं। अगर पुलिस आ भी जाए, तो कितनी बार अपराधी पकड़े जाते हैं? यही नहीं, मीडिया भी अमीरों के यहां हुई ऐसी किसी घटना पर खूब ध्यान देता है, लेकिन, आम नागरिकों के मामले में ऐसा शायद ही कभी संभव होता है। इसलिए, दिखावे से दूर रहना ही बेहतर है।

पुराने जमाने में एक कहावत कही जाती थी माल न रखावे आपुनो, चोर ए गारी देय।  यानी कि अपने सामान की खुद रक्षा की नहीं, और जब चुराने वाले चुरा ले गए, तो चोर को गाली दे रहे हैं।

 सोशल मीडिया का नशा यदि अपने लिए ही गड्ढा खोद रहा है, तो सोचा जाना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है? इसे ही ‘अटेंशन इकनॉमी’, यानी लोगों का ध्यान खींचकर उससे फायदा कमाने की व्यवस्था कहा जाता है। हजारों लाइक्स और ढेरों व्यूज किसी आफत में हमें बचाने नहीं आते।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed