निक्सन, क्लिंटन और ट्रंप
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बीस वर्ष पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने स्वतंत्र वकील केनेथ स्टार और एक ग्रैंड ज्यूरी के सामने व्हाइट हाउस इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ अपने यौन संबंधों के बारे में गवाही दी थी। उस रात क्लिंटन ने राष्ट्र को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कबूल कियाः “मिस लेविंस्की के साथ मेरा रिश्ता था, जो सही नहीं था। वास्तव में, यह गलत था। मुझसे बड़ी चूक हुई और यह मेरी व्यक्तिगत विफलता है, जिसके लिए पूरी तरह से सिर्फ मैं जिम्मेदार हूं। लेकिन मैंने आज ग्रैंड जूरी से कहा और अब मैं आपसे कहता हूं कि मैंने कभी भी किसी को झूठ बोलने, सबूत छिपाने या नष्ट करने या किसी अन्य गैरकानूनी कार्रवाई करने के लिए नहीं कहा था। मैं जानता हूं कि इस मामले के बारे में मेरी सार्वजनिक टिप्पणियों और मेरी चुप्पी ने गलत छाप छोड़ी है। मैंने लोगों को गुमराह किया, यहां तक कि अपनी पत्नी को भी। इसका मुझे गहरा अफसोस है।”
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भले ही दुख के साथ यह सब कहा गया हो और झूठ बोलने का विकल्प खत्म होने पर कहा गया हो, और यहां तक कि यदि कुछ बाल भी बांका हुआ हो तब भी यह स्पष्ट स्वीकारोक्ति थी।
लेकिन इसके कुछ महीने पहले ही क्लिंटन ने जोर देकर कहा था, “मेरा उस महिला, मोनिका लेविंस्की के साथ यौन संबंध नहीं था। मैंने कभी किसी को झूठ बोलने के लिए नहीं कहा, एक बार भी नहीं। कभी नहीं। ये आरोप झूठे हैं और मुझे फिर से अमेरिकी लोगों के लिए काम करना है। ”
क्लिंटन की स्वीकारोक्ति के बाद (1998 में) डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिस मैथ्यू को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने क्लिंटन के बारे में कहा था, “मुझे लगता है कि उनका छोटा-सा भाषण बाद में आपदा बन गया। यह सही लहजा नहीं था और मुझे यकीन नहीं है कि उन्हें ऐसा करना चाहिए था। मुझे यह भी यकीन नहीं है कि उन्हें पांचवां संशोधन लेना चाहिए था और कहना चाहिए था कि, देखो, मैं इस शख्स से नहीं मिलना चाहता। वह मेरे पीछे पड़ा है। वह एक रिपब्लिकन है। वह यह है, वह वह है, इत्यादि। और आप जानते हैं, उन्होंने पांचवां संशोधन लिया। एक राष्ट्रपति के लिए पांचवां संशोधन लेना एक भयानक बात है।” (अमेरिकी संविधान में पांचवां संशोधन अधिकारों के विधेयक का हिस्सा है, जो अन्य बातों के साथ, आपराधिक मामलों में खुद के खिलाफ गवाह बनने के लिए बाध्य किए जाने से बचाता है।)
ट्रंप ने इस तरह की समस्याओं से निपटने के बारे में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर दिया-कुछ भी स्वीकार न करो, कोई भी बात कबूल न करो, हर चीज से इन्कार करो और पीछा करने वाले व्यक्ति पर हमला करो। मेरी समझ से यह स्पष्ट है कि ट्रंप टीम के सदस्यों की तरफ से चुनावों को प्रभावित करने के लिए रूसियों के साथ कम से कम एक बार प्रयास जरूर किया गया था। उससे संबंधित सबूत अब सार्वजनिक रिकॉर्ड में हैं। और इतना बिल्कुल स्पष्ट है कि ट्रंप ने जांच में बाधा डालकर न्याय को बाधित करने की कोशिश की है और ऐसा वह लगातार कर रहे हैं। क्या विशेष वकील रॉबर्ट मूलर उन कार्रवाइयों को आपराधिकता की कानूनी सीमा में लाने के लिए राजी होंगे, यह एक अलग कहानी है।
मुझे लगता है कि ट्रंप इन वास्तविक संभावनाओं को लेकर व्यथित हो रहे हैं कि उनके प्रचार अभियान के ज्यादातर सदस्य और संभवतः उनका परिवार जवाबदेही स्वीकार कर सकता है और ऐसे में उन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह वह राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के कृत्यों को ही प्रतिबिंबित करते दिख रहे हैं, जिन्होंने महाभियोग लगाए जाने से पहले इस्तीफा दे दिया था।
क्लिंटन द्वारा राष्ट्र के सामने अपनी गलती को स्वीकार किए जाने से लगभग पच्चीस वर्ष पहले निक्सन ने इन्कार के साथ राष्ट्र को संबोधित किया था। निक्सन ने कहा था, “मैंने 22 मई को कहा था कि मुझे वाटरगेट ऑपरेशन की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। सभी सूबतों में इसके खिलाफ मामूली साक्ष्य भी नहीं हैं। एक भी गवाह ने यह साबित नहीं किया है कि मुझे वाटरगेट (डेमोक्रेटिक पार्टी का मुख्यालय) में चोरी की योजना का कोई ज्ञान था। यह भी सच है, जैसा कि मैंने 22 मई को कहा था कि मैंने बाद में वाटरगेट में सेंधमारी से जुड़े अवैध कृत्यों को ढकने के किसी भी प्रयास में कोई हिस्सा नहीं लिया था और मुझे इसकी जानकारी नहीं थी।”
जाहिर है, अब हम सभी जानते हैं कि वह झूठ था। लेकिन निक्सन का बयान उस क्रूरता के सामने हल्का लगता है, जिसके साथ ट्रंप चुनावी अनियमितता की जांच, उस पर हो रही प्रेस रिपोर्टिंग और उससे संबंधित सूचना देने वालों पर हमला कर रहे हैं। यहां तक कि निक्सन के झूठे बयान में भी अमेरिकी संस्थानों और इतिहास के प्रति कम से कम एक उदार सम्मान दिखता है, भले ही वह सम्मान वास्तव में या पूर्ण रूप से नहीं हो। लेकिन ट्रंप में ऐसा कुछ भी नहीं है। मेरा मानना है कि एक इंटरव्यू के लिए बैठकर जांच में व्यक्तिगत रूप से सहयोग करने की उनकी कोई योजना नहीं है। हो सकता है कि एक बार उन्होंने मान लिया हो कि वह इस तरह के अनुभव से झांसा दे सकते हैं, लेकिन अब उनके विरोध और जांच के निष्कर्ष के भय ने उनके साहस के परखच्चे उड़ा दिए हैं।
और मुझे नहीं लगता कि ट्रंप क्लिंटन की तरह अपनी गलती स्वीकार करने वाले हैं या निक्सन की तरह इस्तीफा देने वाले हैं, चाहे मूलर जांच से कोई भी निष्कर्ष निकालें, चाहे मुकदमा चलाएं या जांच रिपोर्ट में कुछ भी कहें।
ट्रंप लगभग हर चीज के बारे में झूठ बोलते हैं, लेकिन एक बात वह सच कहते हैं : वह एक योद्धा हैं। लेकिन वह इसलिए योद्धा नहीं है कि वह डरावने या बहादुर हैं। वीरता का इस व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है। ट्रंप अपने अहंकार के लिए लड़ते हैं। ट्रंप का सबसे बड़ा डर और सबसे बड़ी असुरक्षा इस बात को लेकर है कि वह शर्मिंदा हो रहे हैं और उनका झूठ सामने आ रहा है। ट्रंप इस बात से डरे हुए हैं कि कोई उनका मुखौटा उतार देगा, जिसे वह सात दशकों से तैयार करते रहे हैं, या इसका खुलासा किया जा रहा है कि वह मुखौटा इस्पात का नहीं, कागज का है।