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संयुक्त राष्ट्र: गहन चुनौतियों के बीच यूएन महासभा के नए अध्यक्ष से उम्मीदें
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Dennis Francis
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विस्तार
डेनिस फ्रांसिस को एक जून को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) का नया अध्यक्ष चुना गया है। वह यूएनजीए के 78वें सत्र का नेतृत्व और संचालन बतौर महासभा अध्यक्ष करेंगे। जैसा कि वह अपने संकल्पों- शांति, समृद्धि, प्रगति व सततता के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं, तो इससे दुनिया में यह संदेश पहुंचा है कि डेनिस फ्रांसिस अपने कार्यकाल में महासभा को बहुत ही रचनात्मक बनाने वाले हैं, जहां अमन और शांति के लिए पर्याप्त अवसर खुलेंगे। उम्मीद यह भी है कि जिन देशों के बीच संघर्ष और युद्ध जैसी स्थिति है, वहां और सुधार होगा और उन देशों की परिस्थितियां बदलेंगी। मानव अधिकारों का अतिक्रमण रुकेगा और शांति के स्थायित्व में अभिवृद्धि भी होगी।वर्ष 1953 में 8वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता भारत के सविनय अवज्ञा जैसे महत्त्वपूर्ण आंदोलन में जेल-यातना सहने वाली विदुषी स्वाधीनता सेनानी विजयलक्ष्मी पंडित ने की थी। उन्हें महासभा की पहली महिला अध्यक्ष होने का भी गौरव प्राप्त हुआ था। बेल्जियम के विदेश मंत्री पॉल-हेनरी स्पाक 16 जनवरी, 1946 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के पहले अध्यक्ष चुने गए थे। विजयलक्ष्मी पंडित ने महासभा के पहले अध्यक्ष की विरासत को आगे बढ़ाया, जिसे अब त्रिनिदाद एवं टोबैगो के राजनयिक डेनिस फ्रांसिस 78वें सत्र की अध्यक्षता करते हुए आगे बढ़ाएंगे। हालांकि तब और अब में काफी फर्क आ चुका है। 75 साल बाद दुनिया में संयुक्त राष्ट्र को लेकर अनेक मत हैं। हालात बिलकुल बदल चुके हैं। यूएन-ओएचसीएचआर के उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क अपने कई वक्तव्यों में युद्ध की स्थितियों की ओर पूरी दुनिया का ध्यान खींचते रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकारों का उच्चायोग यूक्रेन और रूस या सूडान में मानव अधिकारों के कटु सत्य पर मुखर जरूर हुआ, लेकिन स्थितियां सुधरी नहीं हैं। दुनिया के विभिन्न इलाकों में मानव अधिकार आज चिंता के विषय हैं, तो उसकी सच्चाई से हम आंखें नहीं चुरा सकते। युद्ध क्षेत्रों को छोड़ दें तो भी ईरान, अफगानिस्तान, म्यांमार और बांग्लादेश में महिला मानव अधिकारों की स्थिति ज्यादा भयावह होती जा रही हैं। ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष डेनिस के लिए यह वर्ष काफी उलझाव भरा हो सकता है, क्योंकि जब सितंबर में दुनिया भर के देश न्यूयॉर्क में एकत्रित होंगे, तो डेनिस के सामने कई सवाल होंगे और उन सवालों का जवाब देना अध्यक्ष की जिम्मेदारी होगी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने खुद कहा दिया कि डेनिस फ्रांसिस का कार्यकाल टकराव, जलवायु उथल-पुथल, और बढ़ती निर्धनता, खाद्य अभाव और असमानता, जैसे एक बहुत ही गहन चुनौतीपूर्ण दौर में शुरू हो रहा है, जबकि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति भी पहुंच से बाहर होती जा रही है। यदि कुछ हल डेनिस फ्रांसिस निकाल पाते हैं, तो यह उनकी बड़ी उपलब्धि होगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में अध्यक्ष की भूमिका विशेष महासभा सत्र के दौरान बहुत अहम होती है और डेनिस फ्रांसिस को इन पहलुओं से जूझना ही होगा। महासभा का अध्यक्ष चुने जाने के बाद डेनिस फ्रांसिस ने अपने बयान में कहा कि वह सार्थक संवाद के प्रोत्साहन और उसकी सुलभता को प्राथमिकता पर रखेंगे।
संयुक्त राष्ट्र सार्वभौम घोषणापत्र के भव्य आयोजन के लिए संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार उच्चायोग 78वें सत्र को स्मरणीय बनाने की कोशिश कर रहा है। 17 सूत्रीय सतत विकास लक्ष्य-2030 पर भी अहम चर्चा इस सत्र में होगी। अब डेनिस फ्रांसिस की अपनी कार्यशैली और नेतृत्व पर यह निर्भर करता है कि वे इन मुद्दों को किस प्रकार गति प्रदान करते हैं। यदि डेनिस फ्रांसिस दुनिया की राय को एकात्म बनाकर सही दिशा में निर्णायक मानव कल्याण के लिए गतिशीलता प्रदान करते हैं, तो निश्चय ही उनकी यह कामयाबी होगी और पूरी दुनिया उनको सदैव सम्मान से देखेगी।
-लेखक, राष्ट्रपति के विशेष कार्य अधिकारी रह चुके हैं और अभी डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर में यूजीसी-एचआरडीसी के रूप में कार्यरत हैं।