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पाकिस्तान में उभरता नया जनांदोलन

Fri, 31 Jan 2020 11:49 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Fri, 31 Jan 2020 11:49 AM IST
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New mass movement emerging in Pakistan
पीटीएम का आंदोलन - फोटो : a

इन दिनों पाकिस्तान में सोशल मडिया पर एक बूढ़ी पाकिस्तानी महिला के बारे में एक छोटा-सा वीडियो वायरल हो रहा है, जो गर्व से अपने बेटे नावफिल सलीमी की प्रशंसा कर रही है, जिसे इस्लामाबाद प्रेस क्लब में विरोध करते हुए झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और कई अन्य लोगों के साथ जेल में डाल दिया गया। नावफिल सलीमी और अन्य लोग पश्तून तहफ्फूज मूवमेंट (पीटीएम) के संस्थापक और मानवाधिकार कार्यकर्ता मंजूर पश्तीन की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। मंजूर पश्तीन को पहले दिए गए भाषण के लिए राजद्रोह और विश्वासघात के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि पश्तीन को पख्तुनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान की जेल में स्थानांतरित किया गया है, जहां शेख मुजीबुर रहमान को पाकिस्तान सरकार ने हिरासत में रखा  था।


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नावफिल सलीमी की मां आम मां नहीं हैं। बहुत लोग उन्हें सैन्य तानाशाह जियाउल हक के समय से जानते होंगे। पाकिस्तान की यह मां उस तथाकथित नागरिक सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए फिर से सड़क पर हैं, जो जिया उल हक की तरह नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है। बहुतेरे लोग मानते हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था हमेशा से कमजोर थी, लेकिन प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के शासन में धीरे-धीरे सभी नागरिक स्वतंत्रताएं खत्म हो रही हैं। फिलहाल लंदन में निर्वासन में रह रहीं आयशा सिद्दिका जैसी विश्लेषक कहती हैं कि पाकिस्तान में राजनीतिक पार्टी प्रणाली की कमजोरी इस अंतिम स्तर पर पहुंच गई है कि उदार तत्वों सहित नागरिक समाज अब यह स्वीकारने के लिए मजबूर है कि सैन्य-वर्चस्व वाली सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था से लड़ने की ताकत मौजूदा राजनीतिक दलों के पास नहीं है। पाकिस्तान में जातीय अधिकारों और छात्र संघों के हालिया आंदोलनों ने न्याय और व्यापक प्रतिनिधित्व के लिए देश के संविधान का आह्वान किया है।

स्वतंत्र अभिव्यक्ति खतरे में है और प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को चुप कराने के साथ सरकार अब वेब टीवी को विनियमित करने की कोशिश कर रही है, जिनका इस्तेमाल पत्रकारों और अन्य लोगों द्वारा संदेश देने के लिए किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्वतंत्रता नहीं मिलती। पीटीएम के मंजूर पश्तीन हमेशा अपने अनुयायियों सहित शांतिपूर्ण रहे हैं, क्योंकि वे अपने और अन्य पाकिस्तानियों के लिए सांविधानिक अधिकारों की मांग करते हैं। धीरे-धीरे उन्होंने पूरे पाकिस्तान और यहां तक विदेशों में भी अपने समर्थकों को इकट्ठा किया है। पश्तीन की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के साथ-साथ अन्य देशों की राजधानियों में भी हुआ और उन्हें रिहा करने की मांग की गई।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने जब मंजूर पश्तीन के समर्थन में आवाज उठाई, तब पाकिस्तान सरकार ने न केवल नाराजगी जताई, बल्कि उन्हें पाकिस्तान के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप न करने के लिए भी कहा। विदेश मंत्रालय ने अशरफ गनी से कहा कि ऐसे बयान अच्छे पड़ोसी संबंधों को बढ़ावा देने में मददगार नहीं हैं। उसने अफगानिस्तान व इस इलाके में शांति व स्थिरता के साझा उद्देश्यों के लिए अफगान सरकार से अपील की। अशरफ गनी ने ट्वीट किया था कि 'मैं मंजूर पश्तीन और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी से परेशान हूं। मैं इस संबंध में एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा जताई गई चिंताओं से पूरी तरह सहमत हूं और उनकी तत्काल रिहाई की उम्मीद करता हूं।' गनी ने कहा कि जब हमारा क्षेत्र हिंसक चरमपंथ और आतंकवाद से पीड़ित है, तब इस क्षेत्र की सरकारों को न्याय के लिए शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलनों का समर्थन एवं प्रोत्साहन करना चाहिए और इन आंदोलनों के खिलाफ बल व हिंसा का प्रयोग करने से बचना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि, 'इसके विपरीत मतभेदों को ऐसे आंदोलनों के साथ बातचीत के जरिये हल करना चाहिए।'

अपनी गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले मंजूर पश्तीन ने न्यायेतर हत्याओं, पहले केंद्र द्वारा प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों में बिछी बारूदी सुरंगों (लैंड माइन्स) और जबरन गुमशुदगी की जांच के लिए ट्रूथ कमीशन गठित करने की मांग की। उन्होंने आगे कहा, 'हम चाहते हैं कि पाकिस्तानी संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। हम मानवाधिकार उल्लंघन और उत्पीड़न के खिलाफ हैं। हमारा आंदोलन पश्तून अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के लिए है, जो आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के कारण प्रभावित हुए हैं।'

अमर अली जान एक युवा इतिहासकार हैं और हकूक-ए- खल्क आंदोलन के सदस्य हैं। उनका कहना है कि दुनिया आज लोकप्रिय गणतंत्रवाद के एक आकर्षक पुनर्जन्म को देख रही है। इस घटना की मुख्य विशेषता संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा में नागरिकों की सामूहिक भागीदारी है। पाकिस्तान में आज जो हो रहा है, उसे देखते हुए उन्होंने कहा कि हैरानी की बात नहीं है कि आज संविधान का बचाव करने वाले को देशद्रोही बताया जा रहा है। यह एक विचित्र आरोप है, जो देश के सर्वोपरि वैधानिक दस्तावेज को विध्वंसक साहित्य में बदल रहा है। दुनिया भर के विभिन्न विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों को देखते हुए वह कहते हैं कि यदि समकालीन यथास्थिति में सुधार नहीं होता है और यदि बढ़ते विरोध आंदोलन भविष्य के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण विकसित करते हैं, तो हम आधुनिक इतिहास में एक नए क्रांतिकारी युग के शिखर पर हो सकते हैं।

पाकिस्तान में अनेक लोग मानते हैं कि पीटीएम का एक राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकरण कराने का समय आ गया है। उसे अगला चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो जाना चाहिए और संसद में सही और वास्तविक बदलाव लाना चाहिए। कब तक वे सिर्फ एक आंदोलन के रूप में रह सकते हैं? लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि क्या पाकिस्तानी सेना उसे राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत होने की अनुमति देगी। और यदि हां, तो क्या उन्हें निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों में भाग लेने की अनुमति मिलेगी? इसका जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा है।

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