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परमाणु बम पर बैठा पड़ोसी
भारत डोगरा
Updated Mon, 14 Jan 2013 10:00 PM IST
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हाल के समय में विश्व राजनीति में ईरान का परमाणु कार्यक्रम सबसे गर्म मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने यह प्रचार किया है कि यह विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यहां तक कि हाल के महीनों में इस्राइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर एक तरफा हवाई हमले करने की आशंका एक समय बढ़ गई थी, पर अमेरिका से हरी झंडी न मिलने और इस्राइली नेतृत्व में ही इस मुद्दे पर आपसी मतभेद उत्पन्न हो जाने के कारण यह आशंका फिलहाल टल गई लगती है।
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दूसरी ओर कई सैन्य और रणनीति विश्लेषक यह मानते हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से भी अधिक खतरनाक पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम है, क्योंकि वहां के परमाणु शस्त्रों के आतंकवादियों के हाथ में आने का बड़ा खतरा बना हुआ है।
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पाकिस्तान के पास इस समय 110 परमाणु बम होने का अनुमान है और वहां नए परमाणु शस्त्र बनाने का कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन नए हथियारों में छोटे परमाणु शस्त्र अधिक हैं, जिनके आतंकवादियों के कब्जे में आने की आशंका अपेक्षाकृत अधिक बताई जाती है।
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प्रायः रणनीतिक विशेषज्ञों में यह स्वीकार किया जा रहा है कि हाल के समय में परमाणु हथियारों की संख्या में वृद्धि करने, छोटे परमाणु हथियार अधिक बनाने, जल्दी दागे जा सकने वाले मिसाइल बनाने जैसे लक्ष्यों में पाकिस्तान आगे बढ़ा है। खुशाब में दो प्लूटोनियम उत्पादन रिएक्टर स्थापित किए गए हैं तथा दो अन्य शीघ्र स्थापित होंगे। ये चीन की सहायता से बनाए गए हैं तथा सेफगार्ड अधीन नहीं हैं।
हाल के वर्षों में पाकिस्तान में आतंकवादी ऐसे कुछ सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुके हैं, जिनके परमाणु हथियारों के भंडारण से जुड़े होने की आशंका है। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2007 में कामरा स्थित पाकिस्तानी वायु सेना केंद्र पर ऐसा हमला हुआ। इसके अगले वर्ष अगस्त में वाह छावनी में आत्मघाती हमलावरों ने जबरदस्त हमला किया, जिसमें 63 व्यक्ति मारे गए।
कामरा पर 2009 में फिर आतंकवादी हमला हुआ। हालांकि पाकिस्तान की सरकार ने दावा किया है कि उसके परमाणु बमों का भंडारण सुरक्षित है, पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता इस कारण बनी हुई है कि पाकिस्तान की सेना तथा खुफिया एजेंसियों में भी कट्टरवादी तत्वों से सहानुभूति रखने वाले तत्व सक्रिय हैं। उनसे सहयोग मिलने पर परमाणु हथियार के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ जाती है।
अमेरिका को एक समय उम्मीद थी कि इन परमाणु हथियारों के सुरक्षित भंडारण के लिए पाकिस्तान को मोटी आर्थिक सहायता देकर वह इनके बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त कर लेगा, ऐसी जानकारी मिल जाने पर आपात स्थिति में समुचित कार्रवाई करने में अमेरिकी सेना को मदद मिल सकती थी। पर अब यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसी जानकारी पाकिस्तान किसी को देने को तैयार नहीं है।
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के आतंकवादी हाथों में पहुंचने की आशंका बनी हुई है और इस कारण बहुत बड़ा संकट और बहुत तीखा विवाद किसी भी समय उत्पन्न हो सकता है। इस खतरे और इससे जुड़ी विभिन्न आशंकाओं के प्रति बहुत सजग रहना जरूरी है। यह कहने की तो आवश्यकता नहीं है कि पड़ोसी देश होने के नाते तथा आतंकवादियों के निशाने पर होने के कारण ऐसी किसी स्थिति में सबसे अधिक खतरा भारत में ही उपस्थित होगा।
यदि आतंकवादी संगठन परमाणु बम पर नियंत्रण न कर पाने पर भी केवल कुछ हद तक यह भ्रम पैदा कर सकें कि वे परमाणु हथियार पर नियंत्रण कर चुके हैं, तो केवल इस आधार पर उनकी ‘ब्लैकमेल’ कर पाने की शक्ति भी बहुत विनाशक सिद्ध हो सकती है।
इस आधार पर वे अपनी कई बेहद अनुचित मांगों को मनवाने का प्रयास कर सकते हैं और इससे आगे चलकर गंभीर तनावों व टकरावों का एक नया सिलसिला आरंभ हो सकता है। पर इन सब विवादों का सबसे संतोषजनक समाधान तो यही है कि पूरी ईमानदारी से विश्व परमाणु हथियारों की पूरी समाप्ति की ओर बढ़े। मौजूदा व्यवस्था में किसी नए देश में ही नहीं, आतंकवादी संगठनों के पास भी परमाणु हथियार पहुंचने का खतरा बना हुआ है, जो बहुत विनाशकारी सिद्ध हो सकता है।