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निवेशकों का भरोसा जीतने की जरूरत

Wed, 13 Nov 2019 06:00 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Wed, 13 Nov 2019 06:00 AM IST
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Need to win invester confidence
निवेश - फोटो : पेक्सेल्स

हाल ही में आठ नवंबर को वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर सर्विस ने भारत की क्रेडिट रेटिंग 'स्थिर' से घटाकर 'ऋणात्मक' (निगेटिव) कर दी है। रेटिंग घटाने के पीछे मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती जारी रहने, ग्रामीण परिवारों पर वित्तीय दबाव, रोजगार सृजन कम होने और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में नकदी संकट का हवाला दिया है। हालांकि मूडीज ने भारत की दीर्घावधि की सॉवरिन रेटिंग बीएए2 को बरकार रखा है। दो साल पहले नवंबर 2017 में मूडीज ने वर्ष 2004 से चली आ रही भारत की रेटिंग को बीएए3 से बढ़ाकर बीएए2 कर दिया था। मूडीज के निर्णय से पता चलता है कि देश में आर्थिक विकास के निचले स्तर पर बने रहने का जोखिम बढ़ रहा है।


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मूडीज का कदम अनुमान के मुताबिक है। देश में आर्थिक सुस्ती तेजी से बढ़ी है और सरकार को इसे दूर करने में कुछ सफलता ही मिली है। सुस्त आर्थिक वृद्धि और कॉरपोरेट कर में की गई कटौती से राजस्व वृद्धि कमजोर रहने का अनुमान है। इसके चलते कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों का संकट जल्द नहीं सुलझेगा। वैश्विक व्यापार विवाद के बीच सरकारी खर्च में कमी और उपभोक्ता मांग प्रभावित होने से देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में गिरकर पांच प्रतिशत पर आ गई है।

कॉरपोरेट टैक्स सहित अन्य करों में लगातार छूट दिए जाने तथा कर संग्रह में कमी के कारण राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा तेजी से बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है। खासतौर से राजकोषीय घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.7 फीसदी तक जा सकता है। नवीनतम राजस्व आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर 2019 में बजट अनुमान के 92.6 फीसदी पर पहुंच गया है, जबकि इस अवधि के दौरान राजस्व घाटा बजट अनुमान के 100 फीसदी पर पहुंच गया है। स्पष्ट है कि राजकोषीय और राजस्व घाटे की हालत खराब है।
हालांकि मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग आउटलुक को निगेटिव किया है, लेकिन वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था के बुनियादी घटक मजबूत होने का दावा किया है।

वित्त मंत्रालय का कहना है कि भले मूडीज ने आउटलुक घटाया हो, लेकिन अर्थव्यवस्था सबसे रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में शामिल है। आईएमएफ का मूल्यांकन और कई अन्य संस्थाओं का आउटलुक भी भारत के लिए सकारात्मक है। सरकार ने पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कई वैश्विक रिपोर्टों में भी भारत की स्थिति सुधरी है। वर्ल्ड बैंक द्वारा प्रकाशित ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2020 में भारत 190 देशों की सूची में 63वें स्थान पर पहुंच पाया है। प्रमुख कारोबार सूचकांकों के तहत कारोबार एवं निवेश में सुधार का परिदृश्य भी दिखाई दे रहा है।आईएमडी विश्व रैकिंग 2019 के अनुसार, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तेज वृद्धि, कंपनी कानून में सुधार और शिक्षा पर खर्च बढ़ने के कारण भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। इस रैकिंग में भारत 43वें स्थान पर आ गया है।

इसके बावजूद क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज की रेटिंग से भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और संस्थागत विदेशी निवेश (एफआईआई) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में जरूरी है कि उन बातों पर और अधिक ध्यान दिया जाए जिनसे देश की क्रेडिट रेटिंग निगेटिव हुई है। हमें आर्थिक सुधार की डगर पर अभी कई मील चलना है।

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