फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   need of simplicity in life

जीवन में सादगी की जरूरत

Mon, 24 Sep 2012 04:07 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Mon, 24 Sep 2012 04:07 PM IST
विज्ञापन
need of simplicity in life

महान सिख गुरु अर्जुनदेव जी की पत्नी गंगादेवी का मन निःसंतान होने के कारण अशांत रहता था। गुरुजी ने एक दिन कहा, तुम ब्रह्मज्ञानी संत बाबा बुड्ढा के दर्शन को जाओ। तुम्हें निश्चय ही शांति मिलेगी। माता गंगादेवी ने तरह-तरह के पकवान तैयार किए। वह लाव-लश्कर के साथ रथ में बैठकर बाबा बुड्ढा की तपस्थली जा पहुंची। बाबा बुड्ढा ने ताम-झाम और लाव-लश्कर देखा, तो समाधि में लीन हो गए। माता गंगादेवी को बिना आशीर्वाद के ही लौटना पड़ा।

विज्ञापन


गुरु अर्जुनदेव को पता चला, तो उन्होंने गंगादेवी से कहा, बुड्ढा बाबा ब्रह्मज्ञानी महापुरुष हैं। उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है, तो सादगी में जाना होना। अगली सुबह मां गंगा ने रोटियां बनाईं। एक बरतन में लस्सी भरी। वह रोटियां व लस्सी सिर पर रखकर नंगे पांव आश्रम में पहुंची। बाबा बुड्ढा आगवानी के लिए स्वयं बाहर आए और बोले, माता जी, मुझे आज बड़ी भूख लगी थी। गुरुजी ने मेरी आवाज सुन ली। लाओ, मुझे रोटियां खिलाओ।
विज्ञापन


लस्सी के साथ रोटियां खाने के बाद बाबा बुड्ढा ने आशीर्वाद देते हुए कहा, माता जी, आपके यहां ऐसा महाप्रतापी पुत्र होगा, जो न्याय और धर्म की रक्षा के लिए दुश्मनों से संघर्ष करेगा। अधर्मी और अन्यायी उसके नाम से कापेंगे। गंगादेवी बाबा बुड्ढा का आशीर्वाद प्राप्त कर गद्गद हो उठीं। आगे चलकर उन्होंने पुत्र को जन्म दिया, जो सिखों के छठे गुरु हरगोविंद के नाम से विख्यात हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed