फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   National stock on new high

नई ऊंचाइयों पर निफ्टी

Mon, 07 Aug 2017 02:51 PM IST
मधुरेन्द्र सिन्हा
मधुरेन्द्र सिन्हा Updated Mon, 07 Aug 2017 02:51 PM IST
विज्ञापन
National stock on new high
मधुरेन्द्र सिन्हा

शेयर बाजार में तेजी का यह आलम है कि कल तक जो आंकड़े अंसभव से लग रहे थे, अब पहुंच में हैं। इस बार तो सबसे ज्यादा चौंकाया निफ्टी ने, जो दस हजार के पार चला गया। निवेशकों को इससे काफी मुनाफा भी हुआ। निफ्टी दरअसल नेशनल स्टॉक के शेयर सूचकांक को कहते हैं और यह 50 शीर्ष कंपनियों के शेयरों के भाव पर आधारित होता है। निफ्टी का प्रबंधन इंडिया इंडेक्स सर्विसेज ऐंड प्रॉडक्ट्स लिमिटेड के हाथों में है। यह भी मुंबई शेयर बाजार के सूचकांक, जिसे सेंसेक्स कहते हैं, की तरह एक संख्या ही है। इसमें अर्थव्यवस्था के 12 सेक्टरों से चुनी हुई कंपनियों के शेयर हैं। इस कारण से इसके उतार-चढाव में एक संतुलन-सा रहता है और यह एकतरफा रुख नहीं दिखाता है। इसलिए 1995 में शुरू हुआ यह सूचकांक आज काफी आगे बढ़ गया है और इसकी वित्तीय बाजार में साख है। उस समय उस सूचकांक का आधार 1,000 था और उसका पूंजी आधार 2.06 खरब रुपये था। बाजार पूंजीकरण निफ्टी के लिए एक बड़ी शर्त है। इससे ही कंपनियों का भार तय होता है। जिस कंपनी का ज्यादा पूंजीकरण होगा, उसे इंडेक्स में उस हिसाब से भार मिलेगा।

विज्ञापन


इस बार निफ्टी के दस हजार के जादुई आंकड़े के पार जाने को काफी महत्व दिया जा रहा है और माना जा रहा है कि यह भारत के घरेलू निवेशकों के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने शेयरों में दिलचस्पी दिखाई और अपनी गाढ़ी कमाई का धन लगाया। बाजार में तेजी की अवधारणा रहने से यह संभव हुआ। पिछले डेढ़ वर्ष से निफ्टी में तेजी दिख रही थी और जुलाई के अंत तक इसने एक कीर्तिमान बनाया। निफ्टी में तेजी का एक कारण यह भी रहा कि निवेशकों ने म्युचुअल फंडों में बड़े पैमाने पर पैसा लगाया, जो स्टॉक मार्केट में आया। पिछले दो वर्षों में घरेलू निवेशकों ने लगभग दो लाख करोड़ रुपये की रकम म्युचुअल फंडों में निवेश किया, जिससे बाजार में तेजी बनी रही। अमेरिका और यूरोप के विकसित बाजारों में निवेशक अपना धन म्युचुअल फंडों के जरिये निवेश करते हैं। भारत में पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि इनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं थी। जब से इन्होंने अपने निवेशकों को अच्छा रिटर्न देना शुरू किया, तब से इनमें लोगों की रुचि जगी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि बाजार की विदेशी निवेशकों यानी एफआईआई पर निर्भरता काफी कम हो गई। पहले जब कभी विदेशी निवेशक स्टॉक मार्केट से बड़े पैमाने पर अपना धन निकालते थे, तो वह हिल जाता था। यानी सूचकांक गिर जाता था और कई कंपनियों के शेयर औंधे मुंह जा गिरते थे। लेकिन भारतीय घरेलू निवेशकों के मैदान में आ जाने से परिस्थितियां बदल गई हैं। इससे शेयर बाजार में स्थिरता आ गई है और यह किसी तरह के बाहरी दबाव से मुक्त है।
विज्ञापन


शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का आईना होता है और इस समय यह भारत की एक तस्वीर भी पेश कर रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय तेजी से बढ़ रही है और देश में राजनीतिक स्थिरता भी है। इस कारण से यहां अंतरराष्ट्रीय निवेशक दिलचस्पी दिखा रहे हैं। निफ्टी को विदेशों में भी मान्यता मिली हुई है और कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं ने इस पर आधारित कई प्रॉडक्ट या धन कमाने वाली स्कीम भी बनाई हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे सरकार आर्थिक सुधार करेगी और बड़े कदम उठाएगी, शेयर बाजार में तेजी आती जाएगी। इसका कारण यह है कि इससे निवेशकों का अर्थव्यवस्था पर विश्वास बढ़ता है और वे धन लगाते हैं। और अगर उन्हें अच्छा रिटर्न मिला, तो फिर उनका उत्साह बढ़ता जाता है। यह एक चक्र की तरह है और सामान्य परिस्थितियों में काफी सक्रिय रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब सवाल यह है कि क्या निफ्टी इसी तरह आगे बढ़ती जाएगी? इसका जवाब हां और न, दोनों में है। हां इसलिए कि अर्थव्यवस्था के बढ़ने से कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बढ़ता जाता है। यह निफ्टी को मजबूती देता है। हमने देखा है कि रिलायंस जैसी कंपनी, जिसका सालाना कारोबार लगातार लगभग 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, का सीधा असर निफ्टी पर भी पड़ रहा है। 2004 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का सालाना कारोबार 74,418 करोड़ रुपये था, जो पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 2,73,750 करोड़ रुपये हो गया था। इसका सीधा असर निफ्टी के भार पर भी पड़ता है। कंपनी के बाजार पूंजीकरण के आधार पर निफ्टी की 50 कंपनियों को वजन या हिस्सा मिला हुआ है। सभी कंपनियों को एक बराबर अहमियत नहीं मिलती है। ज्यादा कारोबार वाली कंपनी के कामकाज का असर निफ्टी पर सीधा पड़ता है। अगर उस कंपनी को बड़ा झटका लगा, तो वह सूचकांक पर असर डाले बिना नहीं रहेगी। कई बार किसी एक बहुत बड़ी कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट निफ्टी को नीचे गिरा सकती है, क्योंकि सूचकांक में उसका भार ज्यादा है। लेकिन अभी के हालात में ऐसा कुछ दिखता नजर नहीं आ रहा है। कंपनियों के पिछले वित्त वर्ष के वित्तीय परिणाम उत्साहजनक रहे हैं और अगले साल के लिए उनके लक्ष्य पूरे होते दिख रहे हैं।


एक और बड़ी बात यह है कि इंटरनेट और संचार के ताकतवर माध्यमों ने मौजूदा दौर में दुनिया को छोटे-से गांव में तब्दील कर दिया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि अगर कहीं भी कोई बड़ी घटना हो, तो उसका असर हम पर पड़ना स्वाभाविक है। यह बात शेयर बाजार पर भी लागू होती है। अगर कल अमेरिकी शेयर बाजार डाउ जोन्स में भारी गिरावट हो जाए, तो इसका सीधा असर निफ्टी पर भी पड़ेगा। ऐसे में हो सकता है कि अमेरिकी निवेशक मुनाफा कमाने के इरादे से यहां अपने शेयरों में बिकवाली करें। या फिर वे भारत में निवेश करना बंद ही कर दें। यह तो मानना ही पड़ेगा कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके अपने जोखिम भी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed