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राष्ट्रीय सुरक्षा: ट्रंप की नीति कारगर... भारत को भी चौकसी बढ़ाने की जरूरत, ताकि घुसपैठिये प्रवेश ही न कर पाएं

Wed, 20 Nov 2024 05:25 AM IST
दीपक कुमार शर्मा शिवदान सिंह
शिवदान सिंह Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 20 Nov 2024 05:25 AM IST
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सार
पहले की सरकारें सतर्कता बरततीं, तो झारखंड समेत उत्तर-पूर्वी राज्यों में अवैध घुसपैठ की समस्या इतनी गंभीर नहीं होती।
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National Security policy of Donald Trump is effective India also needs to increase vigilance over intruders
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड में विधानसभा के चुनाव के दौरान राजनीतिज्ञों का घुसपैठ की समस्या पर ध्यान गया। भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि घुसपैठियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी और इनके द्वारा कब्जा की हुई संपत्ति को उनके मालिकों को लौटाया जाएगा। वर्ष 1951 की जनगणना में झारखंड क्षेत्र में आदिवासियों की कुल आबादी का 44.6 फीसदी  थी। वर्ष 2011 में यह आबादी 9.44 से लेकर 22.73 फीसदी तक ही रह गई है, जो चिंता का विषय है।



झारखंड में ज्यादातर घुसपैठ वहां के संथाल प्रमंडल, जो बंगाल की सीमा से लगा हुआ है, के रास्ते से की जाती है। वहां से ये बांग्लादेशी इस संभाग के छह जिलों में फैल जाते हैं। इन घुसपैठियों का मुख्य उद्देश्य वहां की आदिवासी लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाकर जमीनों पर कब्जा करना है, क्योंकि झारखंड में आदिवासी समुदाय के लिए कानून है कि यहां पर लड़कियों को जमीन का हक मिलता है। इसी प्रकार उत्तर पूर्व के राज्यों, जिनकी सीमाएं बांग्लादेश से लगती हैं, वहां पर घुसपैठियों की समस्या उग्र हो रही है। ये घुसपैठिये बांग्लादेश और म्यांमार से इन राज्यों में घुसते हैं। कुछ समय पहले असम में रोहिंग्या घुसपैठियों ने सरेआम प्रदर्शन कर आजादी की मांग की। इसी प्रकार 1992 से 1999 के बीच में म्यांमार से आए कुकी और नगाओं तथा कुकी व वहां के पेटियों के बीच हिंसक संघर्ष हुए। इसी तरह बांग्लादेश से आए रोहिंग्याओं ने पूरे उत्तर पूर्वी राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड, असम और मणिपुर आदि में वहां की शांति को भंग किया हुआ है। इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती पैदा हो गई है। इसी कारण अब तक मणिपुर में इनके द्वारा की जा रही हिंसा पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। रोहिंग्या घुसपैठिये बड़ी संख्या में देश भर में फैल गए हैं। पिछले लंबे समय से पश्चिम बंगाल में सत्ता बांग्लादेशी घुसपैठियों की मदद से ही प्राप्त की जा रही है। बंगाल में अक्सर बांग्लादेश की तरह हिंदुओं पर अत्याचार होते हैं, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के कारण वहां की सरकार इनके विरुद्ध सख्त कदम नहीं उठाती है।


भारत के पड़ोस में बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान हैं, जिनमें अक्सर राजनीतिक अस्थिरता चलती रहती है। जिसके कारण वहां के निवासी अपने सुरक्षित भविष्य के लिए भारत में प्रवेश करने लगते हैं। 1983 से 2009 तक श्रीलंका में गृहयुद्ध चला, जिसके कारण वहां से एक लाख तमिल शरणार्थी भारत के दक्षिणी राज्यों में घुस गए। 1971 में बांग्लादेश युद्ध से पहले पाकिस्तान की सेना के अत्याचारों के कारण बांग्लादेश से एक करोड़ शरणार्थी भारत में आए, जिनमें से ज्यादातर युद्ध के बाद बांग्लादेश जाने के बजाय देश के विभिन्न भागों में और खासकर दिल्ली में बस गए। इसी तरह वर्तमान में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के विरुद्ध पाकिस्तान की आईएसआई के इशारे पर मुस्लिम कट्टरपंथी अत्याचार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में वहां के प्रताड़ित नागरिक भारत में घुसपैठियों के रूप में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे ही हालात पाकिस्तान में भी पैदा होते हैं, जिनके कारण वहां के हिंदू अल्पसंख्यक भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। मानवता के आधार पर भारत सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आने वाले हिंदू, सिख और ईसाई शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिक संशोधन कानून पास किया था। मगर देश के कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के कारण इसको भारत के मुस्लिम नागरिकों के विरुद्ध बताकर, उनकी सहानुभूति हासिल करने के लिए इसका भी विरोध कर रहे हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के अंदर घुसपैठ पर चिंता व्यक्त की थी। उनके अनुसार, अरब देशों से आए मुस्लिम कट्टरपंथियों ने अमेरिका की शांति को भंग कर दिया है। प्रमुख शहरों न्यूयॉर्क और शिकागो में उग्र प्रदर्शनों के द्वारा जिहाद की मांग उठाई है। ये जिहादी खासकर वहां पर बसे यहूदियों के विरुद्ध हैं और इस्राइल के साथ युद्ध कर रहे हमास व हिजबुल्ला के समर्थन में अमेरिका में प्रदर्शन करते हैं। कट्टरपंथियों ने वहां के शिक्षा संस्थानों जैसे-विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया है। इसका वहां के युवकों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसे देखते हुए ट्रंप ने इन घुसपैठियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का भरोसा देते हुए कहा है कि वह पूरे देश में अभियान चलाकर उन्हें अमेरिका से बाहर निकालेंगे। लेकिन भारत में भाजपा से पहले की सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण घुसपैठ की समस्या पर ध्यान ही नहीं दिया। इसलिए भारत सरकार को भी डोनाल्ड ट्रंप की तरह घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। भारत की सीमाएं दुश्मन देशों से लगती हैं, इसलिए चौकसी बढ़ाने की जरूरत है, ताकि घुसपैठिये प्रवेश ही न कर पाएं।

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