फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Monetary Policy RBI focus to control retail inflation with growth

मौद्रिक नीति: विकास और मुद्रास्फीति में संतुलन का लक्ष्य, पहले खुदरा महंगाई पर काबू चाहता है आरबीआई

Wed, 09 Aug 2023 07:04 AM IST
Satish Singh सतीश सिंह
Updated Wed, 09 Aug 2023 07:04 AM IST
विज्ञापन
सार
रिजर्व बैंक चाहता है कि पहले खुदरा महंगाई पर नियंत्रण किया जाए, क्योंकि इससे लंबे समय में अर्थव्यवस्था में सुधार और मजबूती आती है।
loader
Monetary Policy RBI focus to control retail inflation with growth
rbi - फोटो : istock

विस्तार

विकास की रफ्तार को कायम रखने के लिए जरूरी है कि रेपो दर में और बढ़ोतरी नहीं की जाए, लेकिन विगत जून में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) या खुदरा महंगाई दर 4.81 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जबकि मई महीने में यह 4.31 प्रतिशत रही थी। हालांकि, जून महीने में भी खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक की सीमा छह प्रतिशत से नीचे है, लेकिन इस वर्ष देश के कई राज्यों में तेज बारिश से खरीफ की फसल और सब्जियों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है और आगामी महीनों में स्थिति और भी बदतर हो सकती है। अल नीनो का खतरा अब भी बना हुआ है। ऐसे में आगामी महीनों में खुदरा महंगाई के और भी बढ़ने के आसार बने हुए हैं। टमाटर समेत लगभग सभी हरी सब्जियों की कीमत अभी आसमान छू रही है। उल्लेखनीय है कि सीपीआई बास्केट में लगभग आधी हिस्सेदारी खाद्य पदार्थों की होती है।



रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करना मई, 2022 में शुरू किया था। हालांकि, इस साल अप्रैल और जून महीने में लगातार दो द्विमासिक मौद्रिक समीक्षाओं में रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा गया था, जिसके कारण बैंकों ने भी कर्ज दर में कोई बदलाव नहीं किया। रिजर्व बैंक की पहले की रणनीति के आधार पर यह अनुमान जताया जा रहा है कि आर्थिक वृद्धि दर में तेजी लाने के लिए रिजर्व बैंक मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को यथावत रखेगा, ताकि कर्ज लेने की लागत स्थिर बनी रहे और विकास दर की तेजी भी बरकरार रहे। लेकिन यह बताना समीचीन होगा कि अप्रैल और जून महीने की द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा के समय देश में खुदरा महंगाई की स्थिति बेकाबू नहीं थी और इसी वजह से रेपो दर को यथावत रखा गया था।


रिजर्व बैंक रेपो दर में वृद्धि करके महंगाई से लड़ने की कोशिश करता है। जब रेपो दर अधिक होता है, तो बैंकों को रिजर्व बैंक से महंगी दर पर कर्ज मिलता है, जिसके कारण बैंक भी ग्राहकों को महंगी दर पर कर्ज देते हैं। ऐसा करने से अर्थव्यवस्था में मुद्रा की तरलता कम हो जाती है और लोगों की जेब में पैसे नहीं होने की वजह से वस्तुओं की मांग में कमी आती है।  

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार, कोरोना महामारी, भू-राजनीतिक संकट, महंगाई, वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी के बावजूद बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफसी) भारत में मजबूत बने हुए हैं। बैंकिंग क्षेत्र के वित्तीय प्रदर्शन में लगातार सुधार आ रहा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2023 के दौरान 12 सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़कर 34,774 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश के औद्योगिक उत्पादन में जून के महीने में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अभी रिजर्व बैंक का लक्ष्य विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना है, ताकि आम आदमी को परेशानी नहीं हो और विकास की रफ्तार भी बढ़े। इसलिए, खुदरा महंगाई में कमी लाना बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं करने से आगामी महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है। गौरतलब है कि महंगाई की वजह से जीडीपी वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बीते वर्षों से खुदरा महंगाई दर लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई थी, हालांकि, विगत कुछ महीनों में खुदरा महंगाई में आंशिक गिरावट आई, मगर अब फिर से खुदरा महंगाई उफान पर है। लिहाजा, कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी महीनों में विकास दर नरम रहने से अर्थव्यवस्था में भी सुस्ती आ सकती है।  

बेशक, रेपो दर को यथावत रखने से कर्जदारों को राहत मिलेगी, और विकास की रफ्तार तेज होगी, लेकिन रिजर्व बैंक चाहता है कि पहले खुदरा महंगाई पर नियंत्रण किया जाए, क्योंकि इससे लंबे समय में अर्थव्यवस्था में सुधार और मजबूती आती है। लिहाजा, अनुमान है कि रिजर्व बैंक 10 अगस्त को रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे कर्ज महंगा होने से विविध उत्पादों की मांग में कमी से खुदरा महंगाई में भी कमी आएगी। इससे लोगों की क्रय क्षमता घटने से आधारभूत संरचना को मजबूत करने में निजी व्यय में कमी आएगी, जो पहले से ही कम है। इसके अलावा विकास की गति कम होने से कर संग्रह में भी कमी आ सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed