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रियो का पैगाम: जी-20 देशों का सालाना शिखर सम्मेलन संपन्न; अनिश्चितताओं की छाया में समाधान खोजने की प्रतिबद्धता

Wed, 20 Nov 2024 06:37 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 20 Nov 2024 06:37 AM IST
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सार
रियो में जी-20 देशों के सालाना शिखर सम्मेलन पर उन अनिश्चितताओं की छाया बेशक दिखी, जिनसे दुनिया जूझ रही है। लेकिन इसमें महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा समाधान ढूंढने की प्रतिबद्धता झलकने के साथ ही भारत का कमजोर व विकासशील देशों की आवाज बनकर उभरना उत्साहित करने वाला है।
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Message of G-20 summit Rio Commitment to find solutions in the shadow of uncertainties
जी20 शिखर सम्मेलन ब्राजील - फोटो : एएनआई

विस्तार

ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में संपन्न जी-20 देशों के सालाना शिखर सम्मेलन पर सभी की निगाहें थीं, क्योंकि विश्व के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा इस बार ऐसे वक्त में हुआ, जब दुनिया कई गंभीर संकटों और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, जिनकी छाया सम्मेलन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। हालांकि यह भी एक हकीकत है कि इन संकटों के बीच भारत ने उल्लेखनीय तरीके से काम किया, जिसकी वजह से उसकी आर्थिक विकास दर अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से कहीं आगे है। चूंकि इन संकटों का असर निर्धनतम वर्ग की बुनियादी जरूरतों पर पड़ता है, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने भूख व गरीबी पर वैश्विक गठबंधन संबंधी ब्राजील के राष्ट्रपति की पहल का उचित ही समर्थन किया है।



युद्धों की छाया में हुए इस सम्मेलन में, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नहीं आए, प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि वैश्विक संघर्षों के नतीजों का सर्वाधिक बुरा असर वैश्विक दक्षिण यानी कमजोर व विकासशील देशों पर ही पड़ता है। लिहाजा ऐसी कोरी चर्चाओं का कोई मतलब नहीं है, जिनमें इन देशों की स्थितियों पर विशेष ध्यान न दिया गया हो। उत्साहित करने वाली बात अलबत्ता यह भी रही कि रियो सम्मेलन कमोबेश उन्हीं विचारों को क्रियान्वित करने की दिशा में बढ़ता दिखा, जिनकी नींव पिछले वर्ष नई दिल्ली के ऐतिहासिक जी-20 सम्मेलन में रखी गई थी।


ऐसे वक्त में, जब तकरीबन पूरी दुनिया मौसम में आ रहे असामान्य बदलावों से त्रस्त है और खास तौर पर ऐसी समस्याओं पर ही ध्यान देने के लिए आयोजित होने वाले कॉप सरीखे सम्मेलन बाकू में बगैर किसी ठोस नतीजे के समाप्ति की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, तब पिछले वर्ष नई दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन का विषय ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का रियो विमर्श में शामिल होना उम्मीद जगाता है। नहीं भूलना चाहिए कि जी-20 समूह के सदस्य देश वैश्विक आर्थिक उत्पादन के करीब 85 फीसदी के लिए जिम्मेदार हैं।

ऐसे में अमीर देशों तक सिमटे जी-7 समूह के बरक्स जी-20 का महत्व इसके व्यापक प्रतिनिधित्व में है, जिसका पिछले वर्ष भारत की पहल पर अफ्रीकी समूह के जी-20 में शामिल होने से और भी अधिक विस्तार हुआ है। 2008 की मंदी के वक्त भी जी-20 ने अपनी उपयोगिता साबित की थी और आज जबकि कमोबेश वैसे ही हालात हैं, तो उससे अपेक्षा बढ़ना स्वाभाविक है। रियो शिखर सम्मेलन की उपलब्धि इस तथ्य में है कि इसमें वैश्विक असहमतियों के बावजूद महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा समाधान ढूंढने की प्रतिबद्धता झलकी। साथ ही, भारत का कमजोर व विकासशील देशों की आवाज बनकर उभरना वैश्विक परिदृश्य में उसके बढ़ते कद को ही दर्शाता है।

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