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खेल : हेडिंग्ले की हार, जहां हुआ क्रिकेट की संभावनाओं और अनिश्चितता का साक्षात दर्शन
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भारतीय टीम
- फोटो :
ANI
विस्तार
सभी जानते हैं कि क्रिकेट का खेल बाईस गज की नैसर्गिक पिच पर ही खेला जाता है। इसलिए क्रिकेट का खेल भी वही खेला जा सकता है, जिसका मौका या जैसे हालात बाईस गज की पिच उस पर खेलने वाले खिलाड़ियों को देती है। क्रिकेटर के व्यक्तिगत आंकड़े हर पिच पर उसके कोई काम नहीं आते। टेस्ट मैच में ही क्रिकेटर की प्रतिभा, योग्यता व क्षमता की असल परीक्षा होती है। पांच दिन चलने वाले टेस्ट मैच में ही खिलाड़ी को हर दिन नई परिस्थिति में प्रतिभा की दक्षता दिखाते हुए सफलता की चुनौती रहती है। लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर खेले गए ऐतिहासिक पहले टेस्ट मैच में भारत की हार हुई। और इंग्लैंड के अलावा हेडिंग्ले पिच पर टेस्ट क्रिकेट की जीत भी हुई।
आज मनोरंजन के नाम पर रियलिटी शो में रिलेटिविटी या सापेक्ष सत्य को दिखाए जाने का दावा किया जाता है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट तो सापेक्ष का भी सत्य उजागर कर देता है। हेडिंग्ले टेस्ट मैच में जो क्रिकेट भारत व इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने खेली, उसने खेल के ऐतिहासिक विकास को भी सत्यता में दर्शाया। हेडिंग्ले में क्रिकेट में होने वाली महान संभावनाएं व शानदार अनिश्चितताओं के साक्षात दर्शन हुए। दोनों ही टीम ने मनोबल की दृढ़ता, प्रतिभा की कर्मठता और क्षमता की लगन खूब दिखाई।
हेडिंग्ले की पिच वो अहिंसक युद्ध भूमि रही, जिस पर छिपकर मिसाइल या हवाई हमले नहीं किए जा सकते थे, बल्कि उस पिच को समझने की, उस पर अपनी प्रतिभा व क्षमता से खेलने की कोशिश होनी चाहिए थी। यह तो सभी ने देखा कि भारतीय टीम ने जो, और जितने कैच छोड़े वे हार के सबसे बड़े कारण रहे। कहा भी जाता है, ‘कैचेस विन मैचेस।’ लेकिन होनी-अनहोनी के अलावा भारतीय टीम की मानसिकता भी उनके निर्णय से साफ दिखी। इंग्लैंड में माना जाता है कि उनकी गर्मी पर बीती ठंड का असर रहता है। अगर ठंड हल्की रहती है, तो गर्मी तेज होती है। हल्की ठंड का लेना-देना पर्याप्त वर्षा न होने से भी है। यानी जिस ठंड में पर्याप्त वर्षा न हो, या देर से हो तो वह तेज, सूखी गर्मी का कारण बनता है। इंग्लैंड में जो सूखा चल रहा है, वह हेडिंग्ले में भी दिखा। सूखे मैदान पर सूखी ही हेडिंग्ले की पिच थी।
तो सवाल उठता है कि भारतीय टीम के विचार-मंडल ने बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव को हेडिंग्ले की सूखी पिच पर क्यों नहीं खिलाया? इंग्लैंड के पास तो कुलदीप जैसे स्पिनर को खिलाने की गुंजाइश ही नहीं थी। और इस सवाल का मकसद ‘मैच का मुजरिम’ निकालने भर से नहीं है। लेकिन हेडिंग्ले पर खेलने के लिए सुदृढ़ रणनीति बनाने में भारतीय टीम का विचार-मंडल विफल रहा। जिसके कारण टेस्ट क्रिकेट में जीत के लिए जो सबसे जरूरी, बीस विपक्षी बल्लेबाजों को आउट करना रहता है, उससे भारतीय टीम चूक गई।
अच्छे खेल के बावजूद पांच-छह कैच छोड़ना व गेंदबाजी में कम पड़ना या कुछ अलग न सोच पाना अपने को महंगा पड़ा। जीत के मुहाने से अपन हार छीन लाए। यह टेस्ट क्रिकेट का नया विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का युग है। टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व का जो संकट कुछ साल पहले दिख रहा था आज वह नए उत्साह के उत्सव में दिख रहा है। हेडिंग्ले पिच पर पांच दिन में 1,673 रन बने और 35 विकेट गिरे। भारत की ओर से पांच शतक लगाने के अलावा, बुमराह ने एक पारी में पांच विकेट भी लिए। आशा है अगले चार टेस्ट की पिचों पर हेडिंग्ले की हार हावी न रहे। खेल प्रेमियों को इससे ज्यादा क्या मनोरंजन चाहिए?