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बिजली विभाग में मास्टर जी

Tue, 19 Aug 2014 06:45 PM IST
अरविंद तिवारी
अरविंद तिवारी Updated Tue, 19 Aug 2014 06:45 PM IST
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Master jee in electricity department

बचपन में मुझे पढ़ाने वाले मास्टर जी को मरे हुए एक अर्सा हो गया, मगर मुझे लगता है कि वह अभी तक जिंदा हैं। वह न तो स्वयं घपला करते थे और न बाकी मास्टरों को करने देते थे। वह राज्यों के बिजली विभाग की तरह समाजवादी थे। बिजली विभाग, बिजली गुल करने के मामले में पूरी तरह समाजवादी नजरिया अपनाता है। विद्युत नियामक बोर्ड के हाथ में कुछ नहीं है। करंट की अपनी मर्जी है, आया-आया, न आया-न आया!

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मास्टर जी जो विषय पढ़ाते थे, वह उन्हें नहीं आता था। सवाल पूछने पर बिजली विभाग की तरह आचरण करते थे। बिजली विभाग को फोन करो कि हमारी कॉलोनी की बिजली गुल क्यों है, तो जवाब मिलता है, हम फॉल्ट ढूंढ रहे हैं। हमारे स्वर्गीय मास्टर जी भी कभी एक प्रयास में सवाल हल नहीं कर पाए। ‘भूल करो, फिर सीखो’ के सिद्धांत पर चलने वाला बिजली विभाग, मास्टर जी से प्रेरणा ले रहा है। उपभोक्ता कहता है, यह क्या हो रहा है, तो बिजली वाले जवाब देते हैं, हम पता लगा रहे हैं कि ‘यह क्या हो रहा है।’ सिविल लाइंस की बिजली आ रही है, जबकि बाकी मोहल्ले अंधेरे में घिरे हैं। ज्यादा शिकायतों से तंग आकर बिजली विभाग सिविल लाइंस की बिजली भी काट देता है! इस तरह पूरा शहर समाजवादी अंधेरे की चपेट में आ जाता है। हमारे मास्टर जी भी यही करते थे। उनसे कहो कि राजू के नंबर हमसे ज्यादा क्यों आए, तो वह हमारे नंबर बढ़ाने के स्थान पर राजू के नंबर काट लिया करते थे।
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हमें लगता है कि हमारे मास्टर जी का भूत उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्यों के बिजली विभाग में मंडरा रहा है। यह भूत थर्मल इकाइयों का कोयला चोरी कर रहा है। जो लोग भूत-प्रेत को नहीं मानते, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश के बिजली इंजीनियर संभवतः मास्टर जी के शिष्य रहे हैं, इसलिए वह मास्टर जी की तरह आचरण करते हैं। इस धारणा को सुनकर मेरी तो रूह कांप जाती है। यदि यह धारणा सही है, तो फिर उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग को कोई फरिश्ता ही दुरुस्त कर सकता है।
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