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बीजेपी में मार्गदर्शक वही, जिससे नहीं लेना हो मार्गदर्शन

Fri, 04 Dec 2015 06:42 PM IST
आशुतोष चतुर्वेदी/अमर उजाला, नई दिल्ली
आशुतोष चतुर्वेदी/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 04 Dec 2015 06:42 PM IST
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margdarshak mandal of bjp

मीडिया में बेवजह ऐसी खबरें छपती रहती हैं कि भारतीय जनता पार्टी में मार्गदर्शक मंडल का खौफ है। उन्होंने हाल में नरेंद्र मोदी-अमित शाह पर हल्ला बोला था लेकिन मामला फुसफुसा ही रह गया। बताते हैं कि उसके बाद से पार्टी मार्गदर्शक मंडल का विस्तार करने पर विचार कर रही है। आपको जानकर आश्यर्य होगा कि इसको लेकर पार्टी नेताओं में खौफ है।

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भाजपा में यह माना जाता है कि मार्गदर्शक मंडल में वही लोग रखे जाते हैं जिनसे पार्टी को मार्गदर्शन नहीं लेना है। मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी और डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी प्रमुख हैं। ये सभी नेता 75 पार के हैं। कुछ महीने पहले कलराज मिश्रा भी 75 के हो गए लेकिन बताते हैं कि उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया ही नहीं क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनसे मंत्रालय न छिन जाए और उन्हें भी मार्गदर्शक मंडल में शामिल न कर दिया जाए।
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भाजपा में दिवाली मिलन का जोर

आप शायद भूल गए हों कि दिवाली कब की चली गई और हो सकता है, अब आपको होली का इंतजार हो। लेकिन भाजपा में अभी दिवाली मिलन का जोर चल रहा है। डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने सोमवार को दिल्ली में दिवाली मिलन का कार्यक्रम आयोजित किया।
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हालांकि उन्होंने इस दौरान कोई राजनीतिक बात नहीं की। इसके बाद अब बारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की है। उन्होंने भी 28 नवंबर को मीडिया के साथ दिवाली मिलन का कार्यक्रम रखा है। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर समय से दिवाली मिलन आयोजित कर चुके हैं। देखते जाइए कि भाजपा में अब और कौन दिवाली मिलन को आगे बढ़ाता है।

राहुल गांधी का यूटर्न

कांग्रेस में चलन है कि जीत का सेहरा राहुल गांधी को और हार का ठीकरा पार्टी की स्थानीय इकाई पर। बिहार में महागठबंधन की जीत पर भी कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि राहुल ने ही महागठबंधन को अस्तित्व में लाने में अहम भूमिका निभाई थी, अन्यथा महागठबंधन सत्ता में नहीं आता। लेकिन महागठबंधन की जीत के बाद राहुल गांधी के विचार बदले बदले नजर आ रहे हैं। 2013 के जयपुर चिंतन शिविर तक उनका स्पष्ट विचार था कि कांग्रेस को पार्टी को किसी से गठबंधन नहीं करना चाहिए और सभी चुनाव अकेले ही लड़ने चाहिए, लेकिन अब राहुल गांधी मान रहे हैं कि कांग्रेस को गठबंधन करना चाहिए।


पार्टी नेतृत्व भले ही कुछ भी संकेत दे, यूपी के कांग्रेसी पूरी ताकत लगा रहे हैं कि किसी तरह 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती से कांग्रेस का गठबंधन हो जाए, अन्यथा और किसी की नैया पार लगे न लगे, कांग्रेस की डूबनी तय है।

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