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पुरुष समाज की महिला नेता: पार्क ग्यूएन हाई

Fri, 21 Dec 2012 10:30 PM IST
हेमेन्द्र मिश्र
हेमेन्द्र मिश्र Updated Fri, 21 Dec 2012 10:30 PM IST
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male society woman leader park gyuen hai
विकसित देशों में सर्वाधिक लैंगिक असमानता वाले दक्षिण कोरिया में एक महिला का राष्ट्रपति चुना जाना सुखद है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति पार्क ग्यूएन हाई के लिए वाकई यह सफर आसान नहीं था। सिर्फ पुरुष वर्चस्व के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी, क्योंकि वह दक्षिण कोरिया के दिवंगत तानाशाह पार्क चुंग की बेटी हैं, जिनकी नीतियों ने आज भी देश को बांट रखा है।
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शीतयुद्ध के दौर में जब देश में सामाजिक उथल-पुथल जारी थी, पार्क चुंग सैन्य तख्तापलट कर 1961 में राष्ट्रपति बने थे। अपने कठोर शासन के बावजूद चुंग ने देश को आर्थिक मजबूती दी। कहा यह भी जाता है कि दक्षिण कोरिया आज जिस मुकाम पर है, उसका आर्थिक आधार चुंग ने ही तैयार किया है। पूरे 18 वर्षों तक उन्होंने लौह आवरण में राज किया था, जिसकी गहरी छाप हाई पर भी पड़ी।

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1974 में मां की हत्या के बाद 22 बरस की हाई को पढ़ाई बीच में छोड़कर फ्रांस से वापस आना पड़ा और जबर्दस्ती देश की 'प्रथम महिला' की औपचारिक भूमिका निभानी पड़ी थी। लेकिन ठीक पांच वर्ष बाद 1979 में जब पिता की भी हत्या कर दी गई, तो वापस विदेश जाने के बजाय उन्होंने राजनीति की राह चुनी, जो चुनौतियों से भरी होने के बावजूद काफी दिलचस्प है।
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मसलन, ग्रैंड नेशनल पार्टी (जीएनपी) के बतौर अध्यक्ष 2004 से 2006 के बीच का उनका कार्यकाल देखें। वर्ष 2004 के आम चुनाव में पार्टी को शिकस्त मिली थी, पर हाई के प्रयासों का ही नतीजा था कि उसके बाद हुए सभी उपचुनावों में जीएनपी को जीत मिली। मतदाताओं पर उनका इस कदर प्रभाव था कि तब उन्हें 'क्वीन ऑफ इलेक्शन' भी कहा जाने लगा था।

जिस राजनीतिक वंशावली को हाई की सफलता का 'राज' कहा जाता है, वह उनके लिए चुनौती से कम भी नहीं है। पिता के कृत्यों के लिए माफी मांगने के बाद भी विरोधी लगातार 'तानाशाह पिता की बेटी' कहकर उन पर हमले करते रहते हैं। शब्दों के साथ-साथ यह विरोध कभी-कभी हिंसक भी हो जाता है, जैसे 2006 में धारदार चाकू से उनके चेहरे पर हमले किए गए।


बावजूद इसके सबसे तेजी से बूढ़ी होती आबादी वाले देशों में शामिल दक्षिण कोरिया के लिए हाई अगर आशा की किरण हैं, तो सिर्फ इसलिए कि वहां की विकास दर गिरकर दो फीसदी के करीब आ गई है और उत्तर कोरिया के साथ तनाव खत्म करने के साथ ही यह मुल्क दक्षिण चीन सागर में भी स्थायित्व चाहता है।

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