मंथन: क्या कहते हैं अमेरिकी चुनाव नतीजे? बहुसंख्य आबादी ने बताई अपनी पहली प्राथमिकता
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विस्तार
दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक में हुए चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप एक कद्दावर नेता के तौर पर चुने गए। उन्होंने निष्पक्ष और स्पष्ट जीत हासिल की। संयुक्त राज्य अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार ट्रंप बहुमत से चुनाव जीते। उन्हें 295 सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को 226 सीटों पर विजय मिली। इस तरह देखा जाए तो वे एक लोकप्रिय नेता के तौर पर उभरे हैं।
| राज्य | लोकप्रिय वोट | |
| ट्रंप | हैरिस | |
| एरिजोना* | 1,303,793 | 1,167,898 |
| जॉर्जिया | 2,654,306 | 2,538,986 |
| मिशिगन | 2,799,713 | 2,715,684 |
| नेवादा* | 688,179 | 647,247 |
| उत्तरी कैरोलिना | 2,876,141 | 2,685,451 |
| पेंसिलवेनिया | 3,473,325 | 3,339,559 |
| विस्कॉन्सिन | 1,697,237 | 1,668,757 |
इस साल सीनेट के लिए हुए चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी का ही वर्चस्व रहा है, जिससे हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव यानी कि प्रतिनिधि सभा में उनकी जीत की संभावना काफी बढ़ गई थी। डोनाल्ड ट्रंप की यह जीत हर मानक पर रिपब्लिकन पार्टी के लिए शानदार जीत है।
चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षण बिल्कुल गलत साबित हुए। यह कहा जा रहा था कि ट्रंप और कमला हैरिस के बीच नजदीकी मुकाबला है, लेकिन यह कहीं दिखा नहीं। तथाकथित सात ‘स्विंग’ राज्य के वोट ने नतीजे को ट्रंप के पक्ष में झुका दिया। बेहद कड़े मुकाबले वाले इस चुनाव में उम्मीदवारों के बीच अंतर काफी महत्वपूर्ण रहे।
मागा का मतलब क्या है
अधिकांश स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और निष्पक्ष मीडिया का यह मानना था कि ट्रंप का चुनावी प्रचार और उनके भाषण महिला विरोधी, नस्लवादी, अपमानजनक और विभाजनकारी थे। लेकिन बहुसंख्यक अमेरिकी लोगों को इससे कोई मतलब नहीं था। उनकी चिंता आप्रवासन, मुद्रास्फीति और अपराध को लेकर थी। अगर मुद्रास्फीति को छोड़ दिया जाए तो अन्य दोनों ऐसे मुद्दे नहीं थे, जिन्हें ‘ब्रेड एंड बटर’ कहा जाए।
आप्रवासन को उन आप्रवासियों के लिए अच्छा माना जा रहा है, जो नए आप्रवासियों को पसंद नहीं करते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि ये गोरे अमेरिकी ईसाई नागरिकों को प्रभावित करते हैं। खासकर लातीनी मतदाताओं ने भी यह महसूस किया कि नए आप्रवासी पुराने आप्रवासियों के लिए खतरा थे। महंगाई तो हर देश के नागरिकों को परेशान करती है।
हालांकि अमेरिका में मुद्रास्फीति 2.4 प्रतिशत तक सीमित थी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व घटती मुद्रास्फीति का संकेत देते हुए नीतिगत ब्याज दर को कम करने के लिए तैयार है। लेकिन चुनाव के दौरान मुद्रास्फीति रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक शक्तिशाली हथियार की तरह थी।
दुनिया के अधिकांश देशों की तरह अमेरिका में भी बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और नशीली दवाएं अपराध का कारण रही हैं। बढ़ता अपराध सत्ता में बैठी किसी भी सरकार को असुरक्षित कर सकता है। मुझे आश्चर्य इस बात पर हुआ कि ट्रंप ने जिस तरह से इन मुद्दों का अपने अंदाज और असभ्य भाषा का उपयोग करते हुए भरपूर लाभ उठाया, उस पर मतदाताओं ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई।
संयम और शालीनता गायब
दूसरी तरफ कमला हैरिस ने अपने चुनावी अभियान में जिन प्रमुख मुद्दों को उठाया, उन पर अधिकांश मतदाताओं की सहमति नहीं मिली। यह बेहद दुखद है कि जिन मूल्यों के प्रति ट्रंप के मन में बहुत कम सम्मान है, जैसे गर्भपात और महिलाओं के अधिकार, संविधान की पवित्रता, निष्पक्षता, नस्लीय समानता और करुणा आदि, इन मुद्दों को उठाने वाली कमला हैरिस लड़ाई हार गईं।
अमेरिका के इस चुनाव में जो अन्य मुद्दे ‘हार’ गए, उनमें लगभग 44,000 फलस्तीनियों की नृशंस हत्या भी है, जिनमें हजारों महिलाएं, बच्चे और संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी शामिल हैं। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए आक्रमण ने शायद ही इस चुनाव में कोई हलचल पैदा की हो। ज्यादातर अमेरिकियों ने चीन द्वारा ताइवान को धमकाने, उत्तर कोरिया द्वारा अमेरिका की धरती पर गिर सकने वाली लंबी दूरी की अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल छोड़ने, कई देशों में गृह युद्ध और तथाकथित लोकतांत्रिक देशों में स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने जैसे विषयों पर कोई आपत्ति नहीं जताई। न ही अधिकांश मतदाताओं ने इस पर कोई ध्यान दिया कि वे एक ऐसे दोषी व्यक्ति को चुन रहे हैं, जो सजा का इंतजार कर रहा है।
अर्थव्यवस्था के मामले में मुक्त और खुले व्यापार, कम टैरिफ, एकाधिकार विरोधी जैसी नीतियों ने अमेरिका को दुनिया का सबसे अमीर देश बना दिया। अधिकांश मतदाताओं ने इन नीतियों की भी कोई परवाह नहीं की। आर्थिक जगत की बड़ी कंपनियां बिग फार्मा, बिग ऑयल और बिग टेक आज ट्रंप की जय-जयकार कर रही हैं।
लिंग और रंग
अंतत: अमेरिकी मतदाताओं ने अपने पूर्वाग्रहों के आधार पर ही मतदान किया। पुरुष मतदाताओं ने ट्रंप को पसंद किया। 18-29 साल आयु वर्ग के मतदाताओं ने ट्रंप को प्राथमिकता दी। यहां तक कि श्रमिक वर्ग, गैर-स्नातक और लातीनी मतदाताओं ने भी ट्रंप को प्राथमिकता दी। सच तो यह है कि उन्होंने कमला हैरिस के खिलाफ मुख्य रूप से उनके लिंग और रंग के कारण मतदान किया।
अभी फिलहाल यह अटकलों का विषय है कि क्या अमेरिकी चुनाव के नतीजे अन्य देशों के चुनावों को प्रभावित करेंगे।