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महा कल्याण यज्ञ
बोधिसत्व
Updated Fri, 14 Sep 2012 01:35 PM IST
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स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
हर चौराहे हर शहर नगर में
हाट-बाट और दर-दर में
हो रहा है महायज्ञ
महान लोगों का महान यज्ञ
और गूंज रहे हैं मंत्र
स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
साहब की उन्नति हो
स्वाहा
साहब का कल्याण हो
स्वाहा
साहब की जै-जै हो
स्वाहा
साहब पुष्ट सांड़ हो
स्वाहा
साहब के मंगल के लिए
देश की नदी साहब की हो
स्वाहा
साहब की शांति के लिए
देश की नाव साहब की हो
स्वाहा
साहब की सपनीली क्रांति के लिए
साहब की खुशी के लिए
देश का समुद्र साहब का हो
स्वाहा
साहब की हंसी के लिए
हर पेड़ की छाँव साहब की हो
स्वाहा
हो रहा है महा यज्ञ
गूँज रहा है महामंत्र
लोकतंत्र-जनतंत्र-गणतंत्र-प्रजातंत्र
स्वाहा स्वाहा
महामंत्र महामंत्र महामंत्र महामंत्र
स्वाहा स्वाहा, स्वाहा स्वाहा
कितने पुरोहित कितने पंडे
कितने वधिक लगे हैं बलिकर्म में
कितने तत्वज्ञ
कितने नापित, कितने शापित
लगे हैं
यज्ञ की सफलता के लिए
कर रहे हैं
हा हा हा हा ,हा हा हा हा
स्वाहा स्वाहा, स्वाहा स्वाहा
फहरा रही है पताका
घन घना रहे हैं घंटे
कितने चोंचले कितने टंटे
दौड़ रही हैं गाड़ियाँ
हार्न बजाती, चीखती चिल्लाती
मंत्र गुंजाती स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
आकाश स्वाहा पाताल स्वाहा
जंगल स्वाहा ताल स्वाहा
पहाड़ स्वाहा
कितनों की भूख हड़ताल स्वाहा
कितने पांच साल स्वाहा
कितने झूठ सांच स्वाहा
स्वाहा स्वाहा, स्वाहा स्वाहा।
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स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
हर चौराहे हर शहर नगर में
हाट-बाट और दर-दर में
हो रहा है महायज्ञ
महान लोगों का महान यज्ञ
और गूंज रहे हैं मंत्र
स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
साहब की उन्नति हो
स्वाहा
साहब का कल्याण हो
स्वाहा
साहब की जै-जै हो
स्वाहा
साहब पुष्ट सांड़ हो
स्वाहा
साहब के मंगल के लिए
देश की नदी साहब की हो
स्वाहा
साहब की शांति के लिए
देश की नाव साहब की हो
स्वाहा
साहब की सपनीली क्रांति के लिए
साहब की खुशी के लिए
देश का समुद्र साहब का हो
स्वाहा
साहब की हंसी के लिए
हर पेड़ की छाँव साहब की हो
स्वाहा
हो रहा है महा यज्ञ
गूँज रहा है महामंत्र
लोकतंत्र-जनतंत्र-गणतंत्र-प्रजातंत्र
स्वाहा स्वाहा
महामंत्र महामंत्र महामंत्र महामंत्र
स्वाहा स्वाहा, स्वाहा स्वाहा
कितने पुरोहित कितने पंडे
कितने वधिक लगे हैं बलिकर्म में
कितने तत्वज्ञ
कितने नापित, कितने शापित
लगे हैं
यज्ञ की सफलता के लिए
कर रहे हैं
हा हा हा हा ,हा हा हा हा
स्वाहा स्वाहा, स्वाहा स्वाहा
फहरा रही है पताका
घन घना रहे हैं घंटे
कितने चोंचले कितने टंटे
दौड़ रही हैं गाड़ियाँ
हार्न बजाती, चीखती चिल्लाती
मंत्र गुंजाती स्वाहा स्वाहा
स्वाहा स्वाहा
आकाश स्वाहा पाताल स्वाहा
जंगल स्वाहा ताल स्वाहा
पहाड़ स्वाहा
कितनों की भूख हड़ताल स्वाहा
कितने पांच साल स्वाहा
कितने झूठ सांच स्वाहा
स्वाहा स्वाहा, स्वाहा स्वाहा।