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कम आयकर वसूली वाला देश

Mon, 01 Jun 2015 07:37 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Mon, 01 Jun 2015 07:37 PM IST
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Lower income tax recovery country

हाल ही में केंद्र सरकार ने आयकर विभाग को चालू वित्त वर्ष के दौरान हर महीने कम से कम 25 लाख नए आयकरदाताओं को खोजकर आयकर दायरे में लाने के निर्देश दिए हैं। खासकर इंदौर, भोपाल, जयपुर, सूरत, नागपुर, लखनऊ, वडोदरा, पिंपरी-चिंचवड़, चंडीगढ़, गुड़गांव, राजकोट, कानपुर, विशाखापट्टनम, फरीदाबाद, नवी मुंबई, गाजियाबाद, लुधियाना और नासिक जैसे शहरों में आयकर निगरानी बढ़ाने की योजना है। आयकर प्रत्यक्ष कर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है, पर इसकी कम वसूली सरकार के लिए लगातार चिंता का कारण बनी हुई है। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह के रूप में 6,96,200 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह राजस्व पिछले वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य से करीब 14 फीसदी कम है।

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देश में आयकरदाताओं की संख्या चार करोड़ से कम है, जो कुल आबादी का चार प्रतिशत भी नहीं है। इनमें भी तुलनात्मक रूप से अधिक संख्या नौकरीपेशा लोगों की है, जिनकी आयकर कटौती वेतन स्रोत से अनिवार्य रूप से की जाती है। दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में आयकर देने वाले लोगों की दृष्टि से भारत सबसे पीछे है।
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देश में सेवा क्षेत्र और स्वयं का कारोबार करने वाला एक ऐसा बड़ा वर्ग है, जो आयकर के दायरे से दूर है। ऊंची विकास दर के साथ शहरीकरण की ऊंची वृद्धि दर के कारण देश में मध्यवर्ग की संख्या तेजी से बढ़ी है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि इस समय मध्यवर्ग के 17 करोड़ लोग पूरे देश में 46 फीसदी क्रेडिट कार्ड, 49 फीसदी कार, 52 फीसदी एसी तथा 53 फीसदी कंप्यूटर के मालिक हैं, पर इनमें से बड़ी संख्या में लोग आयकर नहीं देते। विभिन्न श्रेणी के दुकानदार अच्छी आय कमाते हुए भी आयकर देने से बचते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों के बड़े दुकानदार भी आयकर देना कर्तव्य नहीं मानते। पिछले एक दशक में ग्रामीण बाजारों में सरकारी योजनाओं के माध्यम से धन का प्रवाह बढ़ा है, जिससे व्यापारियों की आय बढ़ी है, पर वे आयकर नहीं चुकाते।
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जहां इन विभिन्न प्रकार के दुकानदारों, उद्यमियों और सेवा प्रदाताओं में से नए आयकरदाता खोजकर कर आधार बढ़ाया जा सकता है, वहीं आयकर की उच्चतम सीमा के तहत आयकर चुकाने वालों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। आंकड़े बताते हैं कि कुल आयकरदाताओं में से महज दो फीसदी ही 20 लाख रुपये वार्षिक या इससे अधिक की आय की श्रेणी में आते हैं। पर इस आयकर श्रेणी से आयकर संग्रह में 63 फीसदी हिस्सेदारी आती है। एक करोड़ से अधिक की आय पर कर चुकाने वालों का सरकारी आंकड़ा 42,800 ही है, जबकि एक रिपोर्ट के अनुसार 2013 में देश में एक करोड़ डॉलर की शुद्ध संपत्ति वाले करोड़पतियों की संख्या 2,14,000 थी, जो 2014 में बढ़कर 2,26,800 हो गई। कर आधार बढ़ाने के लिए जरूरी होगा कि आयकर विभाग और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड प्रत्यक्ष कर संग्रह की कोशिशों पर विशेष ध्यान दे। उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार जहां आयकर का दायरा बढ़ाकर कर संग्रह बढ़ाने में सफल होगी, वहीं व्यक्तिगत आयकरदाताओं को अधिक कर छूट भी उपलब्ध कराएगी।

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