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नीति: रामराज्य के मायने ही हैं 'सबका साथ और सबका विकास', यही है मोदी सरकार की राह

Thu, 01 Feb 2024 07:48 AM IST
गुलाम अहमद सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती
सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 01 Feb 2024 07:48 AM IST
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सार
रामराज्य के मूल में ही 'सबका साथ और सबका विकास' की नीति है, जिसे मोदी सरकार ने हर्फ-ब-हर्फ अपनाया भी है।
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Lord  Ram Ramrajya values is Sabka Saath Sabka Vikas the policy adopted by Modi Govt in spirit
पीएम मोदी-सीएम योगी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

खुशहाल मुल्क को लेकर आपके जेहन में सबसे पहले क्या आता है? शायद यही कि जिस मुल्क में सब खुश हों, जहां हर जगह सुकून हो, सबका कारोबार सही हो, आपसी सद्भाव हो और सबके लिए आगे बढ़ने का बराबर मौका हो। हिंदुस्तान में जब भी शासन व्यवस्था की बात आती है, तो ‘रामराज्य' की बात आती है। हर शासन व्यवस्था को रामराज्य की कसौटी पर ही कसा जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम सबके हैं। वे शबरी के भी थे, केवट के भी, निषाद के भी, कोल-भील के भी, जंगल में रहने वाले आदिवासियों के भी, वानरों के भी। क्योंकि राम सत्य हैं, राम समदर्शी हैं, राम न्याय हैं, राम सद्भाव हैं, राम एकता हैं, राम सबके लिए हैं, इसलिए राम हमारे भी हैं।



राम को किसी एक मजहब के दायरे में समेट कर देखना छोटी सोच है, क्योंकि राम हमें अपने कर्तव्य का बोध कराते हैं। राम इस मुल्क के रोम-रोम में बसे हुए हैं। पूरे हिंदोस्तान को एक साथ लेते हुए और हर मजहब जात के बाशिंदों को आमंत्रित करते हुए वजीर-ए-आजम मोदी ने राम की प्राण प्रतिष्ठा कर इस मुल्क में मजहबी सद्भाव और पैगाम-ए-मोहब्बत की नई मिसाल की है। पूरा हिंदुस्तान इस ऐतिहासिक लम्हे का गवाह बना है।


इस मंदिर का इख्तियार किया जाना कितना जरूरी था, यह प्रधानमंत्री मोदी की तपस्या बखूबी बयां कर रही है। महंतों से सलाह कर मुकर्रर किया गया था कि मुख्य यजमान बने नरेंद्र मोदी को तीन दिन का व्रत करना है, परंतु उन्होंने 11 दिन का व्रत रखा। ऐसे तपस्वी का हमारे देश का वजीर-ए-आजम होना पूरे हिंदुस्तान की खुशकिस्मती है। तारीख गवाह रहेगी कि प्रधानमंत्री मोदी के तख्तकाल में आजाद हिंदुस्तान का सबसे बड़ा मजहबी मुद्दा अमन और सद्भाव के साथ सुलझा और सबने इसका जश्न मनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनने के बाद से ही हमेशा रामराज्य के उसूलों के साथ काम किया है। रामराज्य का मतलब ही है सफ में खड़े आखिरी इंसान तक तख्त की नीतियों का फायदा पहुंचना और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे कदम-कदम पर साबित किया है। इसी का नतीजा है कि हिंदुस्तान में पिछले नौ वर्षों में 24.82 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं।

मोदी जब देश के वजीर-ए-आजम बने, तो मुस्लिम समाज में तमाम आशंकाएं थीं, लेकिन नरेंद्र मोदी ने डेवलपमेंट पर अपना फोकस रखा। घर बना, तो सबके लिए बना; शौचालय बने, तो सबके लिए बने; गैस कनेक्शन पहुंचा, तो सबके घर पहुंचा; बिजली पहुंची तो हर घर पहुंची; जन-धन खाते खुले, तो सबके खुले; किसान सम्मान निधि मिली, तो सब किसानों को मिली। इसमें कहीं भी मजहब के नाम पर किसी समुदाय को अनदेखा नहीं किया गया। विकास में कहीं भी हिंदू-मुसलमान नहीं किया गया। यही तो होता है रामराज्य।

मोदी सरकार की दूसरी मियाद में पांच करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को स्कॉलरशिप दी गई। मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा गया। हजारों अल्पसंख्यक ड्रॉप-आउट बच्चों को ब्रिज कोर्स कराकर सर्टिफिकेट दिया गया, ताकि उन्हें नौकरी में आसानी हो। 100 से अधिक हुनर हाट आयोजित किए गए। अब तक लगभग 10 लाख से ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को रोजगारपरक कौशल विकास योजनाओं के तहत ट्रेनिंग दी गई। मोदी सरकार ने हज यात्रा पर लगने वाले जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया।

भारत दुनिया का ऐसा पहला देश है, जहां हज की सभी प्रक्रियाएं डिजिटल हो चुकी हैं। देश के 22 हवाई अड्डों से अब हज यात्रा हो रही है। वक्फ संपत्तियों का सौ प्रतिशत डिजिटाइजेशन हुआ। जो लोग आरोप लगाते हैं कि मोदी केवल हिंदू और हिंदू धर्म को ही आगे बढ़ाते हैं, उन्हें देखना चाहिए कि उन्होंने कई मस्जिदों का भी दौरा किया है। उन्होंने अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज को चादर भी पेश की। उन्होंने तीन तलाक जैसी कुरीति को हटाकर मुस्लिम बहनों को सम्मान से जीने का मौका दिया। रामराज्य के मूल में ही 'सबका साथ और सबका विकास' की नीति है, जिसे मोदी सरकार ने हर्फ-ब-हर्फ अपनाया भी है। पिछले लगभग 10 वर्षों में मोदी सरकार ने रामराज की परिकल्पना को गांधी के दर्शन के अनुसार जमीन पर मुमकिन करके दिखाया है।
(-लेखक ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन कौंसिल के चेयरमैन हैं।)

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