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लॉर्ड पिज्जा टाइकून

Fri, 02 Aug 2013 09:23 PM IST
अभिषेक सक्सेना
अभिषेक सक्सेना Updated Fri, 02 Aug 2013 09:23 PM IST
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Lord pizza tycoon

डोमिनोज के पिज्जा के चाहने वाले तो दुनिया भर में असंख्य होंगे, लेकिन शायद कम ही लोगों को इसका पता होगा कि 1980 के दशक के आखिरी दौर में इस अमेरिकी पिज्जा कंपनी को इंग्लैंड में लाने का काम भारतीय मूल के ही एक व्यक्ति ने किया था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने हाल ही में उन्हें लॉर्ड की उपाधि से सम्मानित करने का ऐलान किया है। पिज्जा टाइकून के नाम से मशहूर भारतीय मूल के इस अरबपति व्यवसायी को अब हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने और मत देने का अधिकार भी होगा। अपने लोकोपकारी कार्यों के लिए पूरी दुनिया में सम्मान पाने वाले इस उद्यमी को दुनिया रूमी वर्जी के नाम से जानती है।

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रूमी वर्जी बेशक आज शोहरत की ऊंचाई पर हैं, लेकिन उनके लिए वक्त हमेशा ऐसा ही नहीं था। सफलता के शीर्ष पर पहुंचने से पहले उन्हें और उनके परिवार को भी एक लंबे संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ा। दरअसल, यूगांडा में ईदी अमीन के निरंकुश शासन के दौरान वर्जी परिवार की अधिकांश संपत्ति जब्त कर ली गई थी। जब यूगांडा में हालात बद से बदतर होने लगे और एशियाई लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा, तब उन्होंने ब्रिटेन की ओर रुख किया।
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यूगांडा में जन्मे रूमी एक अप्रवासी की तरह जब पूर्वी अफ्रीका से इंग्लैंड पहुंचे, तो अच्छी शिक्षा, मजबूत पारिवारिक संस्कार और कामयाब होने का जुनून उनके पास था। विषम स्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वर्षों की कड़ी मेहनत की बदौलत रूमी वर्जी आज उस मुकाम पर पहुंचे हैं, जहां से वह समाज की बेहतरी के लिए कुछ सार्थक कर सकते हैं। वह मानते भी हैं कि कामयाबी अकेले नहीं आती। यह जिम्मेदारी, संवेदना और सहृदयता जैसे गुण भी अपने साथ लाती है।
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लोकोपकारी कार्यों की पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने रूमी फाउंडेशन नामक एक ऐसी संस्था की भी स्थापना की है, जो भारत, पूर्वी अफ्रीका और इंग्लैंड में सामाजिक कार्यों को बखूबी अंजाम दे रही है। रूमी वर्जी की कामयाबी का फलसफा उनके उदात्त विचारों में छिपा हुआ है। वह हमेशा अपनी कामयाबी और ज्ञान को अपने लोकोपकारी कार्यों के साथ साझा करते हैं। यही वजह है कि कुछ वर्ष पहले उन्हें उनके परोपकारी कार्यों के लिए प्रतिष्ठित कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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