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मार्च एंड की लूट है
अशोक सण्ड
Updated Wed, 26 Mar 2014 07:24 PM IST
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हिंदी महीनों-चैत, वैशाख, सावन, भादो की भांति अंग्रेजी महीनों के भी भौतिक और रासायनिक गुण होते हैं। मिसाल के लिए चालू महीने मार्च को ही लें। मार्च महीने का जो महत्व सरकार में है, वह और किसी क्षेत्र में नहीं। एक तारीख से शुरू होकर पूरे 31 दिन ठसक के साथ चलता है। यदि आखिरी दिन संडे भी पड़ जाए, तो खुली रहती है सरकारी तिजोरी (ट्रेजरी)।
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अंग्रेजों के बनाए विधान के मुताबिक, मार्च के साथ ही सरकार का वितीय वर्ष समाप्त हो जाता है। साल भर के आधे-अधूरे लटके बिल मार्च एंड होने से पहले पास जरूर हो जाते हैं। सरकारी वित्त और उसके बाबुओं के चरित्र (पंजिका)का लेखा-जोखा इसी मार्च में होता है। लॉ ऐंड ऑर्डर की अनुपम छटा। ला अर्थात माल 'ला', ताकि सरकारी दौलत को लैप्स होने से बचाने के लिए 'आर्डर' दिया जा सके।
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बापू ने भी मार्च को महत्व देते हुए दांडी मार्च किया था। मार्च के महीने में ही वसंत आता है। होली जलती है। फाग गाया जाता है। हास्य-व्यंग्य का पतझड़। रिलेटेड कवियों पर धन-वर्षा। परीक्षाओं का महीना-मार्च। सरकारी वित्तीय-वर्ष का समापन। बैंक में एनुअल क्लोजिंग। आय-पर 'कर' देकर एही मासे हाय-हाय करते हैं वेतन-भोगी।
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इस माह में सरकारी-अर्धसरकारी दफ्तरों के हाउस कीपिंग स्टाफ में अतिरिक्त जोश रहता है। आलम उठ जाग मुसाफिर भोर भई वाला। जो सोवत है, वो खोवत है का भय। आराम हराम, छुट्टियां रद्द, आंख मलते आफिस पहुंचो, जम्हाई आने लगे, तो घर आकर सो जाओ। अहर्निश वित्त घुमड़ता है चित्त में। वित्त का प्रहरी लेखाधिकारी। मार्च लेखाधिकारियों का महीना होता है। एक वचन में ले-'खा', (जो-'खा') अधिकारी। व्यर्थ न जाने पाए 'अर्थ'। मार्चांत में बचा सरकारी धन उसकी निगाह से बच नहीं सकता। 'हस्तक्षेप' दरकिनार कोई उंगली नहीं उठा सकता। अलबत्ता जो 'चौहान' चूक जाते हैं, अप्रैल माह का पहला सूर्योदय उन्हें मूर्खत्व की रोशनी से ही नहलाता है।