उदारीकरण ने बढ़ाई असमानता

जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 07 Mar 2018 07:20 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
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जहां एक ओर विकास दर बढ़ने और आर्थिक विकास की रिपोर्ट्स लगातार प्रकाशित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर देश में आर्थिक असमानता बढ़ने की चिंताजनक खबरें भी आ रही हैं। हाल ही में विश्वविख्यात संगठन हुरुन की रिपोर्ट -2018 में कहा गया है कि भारत में अमीरों की संख्या तेजी से आगे बढ़ रही है। वर्ष 2017 में एक अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति रखने वाले भारतीय अरबपत्तियों की कुल संख्या 170 तक पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार, 819 अरबपतियों के साथ पहले स्थान पर चीन, 571 अरबपतियों के साथ दूसरे स्थान पर अमेरिका तथा तीसरे स्थान पर भारत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब वर्ष 2022 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) छह लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा, तब उम्मीद है कि भारत में अरबपतियों की संख्या मौजूदा समय की तुलना में दोगुनी हो जाएगी।
भारतीय अरबपतियों में से सबसे ज्यादा उद्यमी फार्मास्युटिकल क्षेत्र के हैं। उसके बाद टेक्नोलॉजी, मीडिया, दूरसंचार और ऑटो एवं ऑटो उपकरण क्षेत्र अरबपतियों के लिए अधिक मुफीद साबित हुए हैं। विश्वविख्यात संगठन ऑक्सफैम इंडिया की भारतीय असमानता रिपोर्ट 2018 में भी कहा गया है कि भारत में 1991 के बाद शुरू हुए उदारीकरण के बाद आर्थिक असमानता और अधिक भयावह होती जा रही है। कहा गया कि वर्ष 2017 में भारत में अरबपतियों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी की 15 फीसदी के बराबर हो गई है। जबकि पांच वर्ष पहले यह 10 फीसदी थी।

इसी तरह विभिन्न देशों में दुनिया भर में बढ़ती असमानता की चिंताओं से संबंधित शोध अध्ययन करने वाले विश्व के ख्यात शोध संगठन कोटक वेल्थ मैनेजमेंट ने पिछले दिनों प्रकाशित अपने एक शोध अध्ययन में कहा कि भारत में बढ़ती असमानता की चिंताओं के बीच वर्ष 2017 में देश के अमीरों की तादाद में उनकी सामूहिक हैसियत के मुकाबले बेहद तेजी से वृद्धि हुई है। दुनिया के ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी और लुकास चांसेल के द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी भारत में आय असमानता बढ़ने पर चिंता जताई गई है। गौरतलब है कि विश्व के देशों के आर्थिक-सामाजिक विकास का तुलनात्मक अध्ययन करने वाले संगठन वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) द्वारा तैयार समावेशी विकास सूचकांक, 2017 में भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं में 103 देशों की सूची में 62वें स्थान पर है। समावेशी विकास में भारत अपने सभी पड़ोसी देशों से पीछे है। वस्तुत: डब्ल्यूईएफ की ओर से जारी समावेशी विकास सूचकांक में इस बात का संकेत है कि भारत को अपनी जनता के रोजगार, रहन-सहन के स्तर, पर्यावरण सुधार, नई पीढ़ी के भविष्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रशिक्षण और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार के साथ उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में अभी लंबा सफर तय करना है।

देश में भ्रष्टाचार रोकने के कई कदमों के बाद भी भ्रष्टाचार की स्थिति नियंत्रण में नहीं आई है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 2017 के लिए दुनियाभर के देशों का जो करप्शन इंडेक्स जारी किया है, उसमें भारत 183 देशों की सूची में दो स्थान फिसल कर 81 वें क्रम पर है। यानी एक साल में भारत में भ्रष्टाचार बढ़ा है। ऐसे में इस समय स्पष्ट रूप से यह अनुभव किया जा रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था के विकास की डगर पर बढ़ने के साथ-साथ विकास के लाभ आम आदमी तक पहुंचाने की राह आसान किए जाने के लिए और तेजी से प्रयास होने चाहिए। 

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