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कोरोना से महिलाओं के सबक

Thu, 28 May 2020 07:41 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Thu, 28 May 2020 07:41 AM IST
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lessons for Women from corona
लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करती एक महिला। - फोटो : PTI

नोटबंदी के बाद ऐसी खबरें और सर्वेक्षण आए थे कि शहरों से लोग गांवों की तरफ चले गए थे। गांवों में महिलाओं को जो थोड़ा-बहुत रोजगार मिलता था, वह भी खत्म हो गया था, क्योंकि माना यह जाता है कि एक पुरुष औरत के मुकाबले अधिक मेहनत का काम कर सकता है। अब लॉकडाउन के कारण बड़े शहरों से गांवों और छोटे शहरों की तरफ भारी संख्या में लोग वापस गए हैं।


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पहले से ही गांवों-कस्बों में रोजगार नहीं है। अगर होता, तो ये महानगरों की तरफ आते ही क्यों? जो है, वह अब इन पुरुषों को मिल जाएगा। औरतों को खेती-किसानी के कामों से भी बेदखल कर दिया जाएगा। वैसे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात पर चिंता प्रकट की जा रही है कि कोरोना संकट के कारण दुनिया भर में बड़ी संख्या में महिलाओं को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ेंगी। अक्सर जब भी कोई आपदा आती है, तो महिलाओं के रोजगार पहले जाते हैं। जो औरतें नौकरी करती हैं, उन्हें तो मुश्किलों का सामना करना ही पड़ता है, जो घरों में रहती हैं, उनकी मुश्किलों का भी कोई अंत नहीं होता।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में भारत में औरतों की श्रमबल भागीदारी दर 26.97 प्रतिशत थी। जबकि 2005 में यह 36.78 प्रतिशत थी। तब से लेकर अब तक लगातार यह कम हो रही है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले रोजगार अधिक कम हो रहे हैं। सोचें कि कोरोना की आपदा के कारण जिस तरह शहरों से गांवों की ओर लोग दौड़ रहे हैं, ऐसे में महिलाओं की स्थिति क्या होगी!

अपने देश में आज भी बहुसंख्य महिलाएं घरों में रहती हैं। वे तरह-तरह के घरेलू काम खुद निपटाती हैं, जिससे कि हाथ में जितना पैसा है, उससे काम चलाया जा सके। अगर हो सके, तो कुछ बच भी जाए। महिलाओं द्वारा की गई छोटी बचत बहुत काम की होती है। यह न केवल घर, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में बहुत काम आती है। जैसा कि हमने मंदी के दिनों में देखा था।

घर में रहने वाली महिलाओं की भी इच्छा होती है कि वे कुछ पैसे कमा सकें। इसीलिए घर के काम-काज के बाद जो समय बचता है, उसमें वे तरह-तरह के काम करके कुछ पैसे कमाती हैं। ये काम अक्सर लघु उद्योगों से जुड़े रहते हैं। इन्हें करने में महिलाओं की घरेलू कारीगरी और परंपरा से प्राप्त ज्ञान बहुत काम आता है। अचार, पापड़, बड़ियां बनाने से लेकर कढ़ाई, बुनाई, सिलाई आदि के काम तो हैं ही, इन दिनों बहुत-सी महिलाएं ऑनलाइन काम भी करती हैं।

लंबे लॉकडाउन ने छोटे और लघु उद्योगों को उजाड़ दिया है। इसलिए इन महिलाओं के काम भी खत्म हो गए हैं। इसके अलावा इन महिलाओं के घर के लोगों के रोजगार और नौकरी पर भी भारी संकट मंडरा रहा है। छोटे काम-धंधों में लगे इनके परिवार के सदस्यों को भी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर आने वाले दिन कैसे कटेंगे।

हालांकि लॉकडाउन के दिनों में जब सब लोग घरों में थे, तो घर में रहने वाली महिलाएं घर के सदस्यों की मांगें पूरी करते-करते ही दिन बिता देती थीं। मामूली से आराम का समय भी उन्हें नहीं मिलता था। दूसरे कामों की तो क्या कहें।
हालांकि घर की महिलाएं यह भी कह रही हैं कि लॉकडाउन ने उन्हें फालतू खर्च करने से भी रोका है।

अपनी दादी-नानी की ये बातें बार-बार याद आ रही हैं कि जब तक किसी भी चीज का इस्तेमाल है, उसे फेंका न जाए। रिसाइक्लिंग की जाए। वरना अभी तक तो बहुत-सी महिलाओं को ऑनलाइन खरीदारी का चस्का ऐसा था कि किसी चीज की जरूरत है, नहीं है, उसे खरीद लिया जाए। लेकिन अब जिन घरेलू महिलाओं के पास पैसे हैं, और जिनके पास पैसे नहीं हैं, उन दोनों की बचत को लेकर सबक एक जैसे हैं।

सामने रहने वाली पड़ोसिन ने एक दिन कहा कि अब तक तो वह घर का काम कामवालियों के भरोसे ही छोड़ देती थीं। लेकिन पिछले दो महीने ने उन्हें सिखाया है कि कैसे घर का काम करने से पैसे तो बचते ही हैं, तरह-तरह की एक्सरसाइज हो जाने से स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। पिछले दिनों घर में रहने वाली अनेक महिलाओं से बात हुई। उन सबका कहना था कि अब बचत ही एकमात्र बचाव का साधन है। हाथ में पैसे होंगे, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत से पार पा लेंगे। पैसे न रहे, तो अपने भी साथ छोड़ देंगे।

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