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हिंदुओं के हक में बनेगा कानून

Thu, 25 Aug 2016 06:14 PM IST
मरिआना बाबर
मरिआना बाबर Updated Thu, 25 Aug 2016 06:14 PM IST
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Law will made in favour of Hindu
मरिआना बाबर

मोहम्मद अली जिन्ना अगर इस महीने पाकिस्तान में होते, तो अवश्य खुश होते। उनके खुश होने के यों तो बहुत से कारण हैं, लेकिन तीन कारण ऐसे हैं, जो उनके दिल से जुड़े मुद्दों-खेल, अल्पसंख्यक और स्वच्छ राजनीति से जुड़े हैं।

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पहला कारण तो यह है कि दशकों तक पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी का मौका देने से इन्कार किए जाने के बाद बीते सोमवार को पाकिस्तान टेस्ट क्रिकेट टीम ने तब इतिहास रचा, जब वेस्टइंडीज और भारत के बीच वर्षा के कारण चौथा और अंतिम टेस्ट मैच ड्रा रहने के कारण उसने आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया। सुरक्षा कारणों से कोई भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान में आकर नहीं खेलती, जो पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद दुखद है, क्योंकि वे क्रिकेट को मजहब मानते हैं।
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दूसरी बात, ऐसा लगता है कि सिंध की सबसे बड़ी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट अब अपने विदेशी शीर्ष नेतृत्व से छुटकारा पा लेगी, जो लंदन में बैठकर पार्टी को रिमोट कंट्रोल की तरह चलाते हैं। अब पार्टी की कमान एक पाकिस्तानी के हाथ में आ जाने का मौका है, जो स्थानीय कानून के प्रति जवाबदेह होगा। ब्रिटिश नागरिक अल्ताफ हुसैन ने हत्या, लूट के साथ-साथ इस हफ्ते अपने कार्यकर्ताओं को मीडिया पर भी हमले करने का आदेश दिया। लंदन में सुरक्षित रहने वाले उस व्यक्ति का पाकिस्तान की सरकार कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। क्या ब्रिटेन किसी पाकिस्तानी को ब्रिटेन में तबाही पैदा करने का आदेश दे सकता है? कभी नहीं।
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जिन्ना के खुश होने का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण यह खबर है कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं के तलाक, विवाह और अन्य धार्मिक समस्याओं का निपटारा अब हिंदू विवाह विधेयक, 2016 के द्वारा किया जाएगा, जो कानून बन जाने के बाद हिंदू महिलाओं के लिए लाभप्रद होगा। सत्तर वर्षों से हिंदू विवाह अधिनियम को शीर्ष प्राथमिकता नहीं दिए जाने के कारण लगातार धर्मांतरण होता रहा। अल्पसंख्यकों के साथ पेश आ रही इन मुश्किलों पर मीडिया ने ध्यान केंद्रित करना शुरू किया। स्वतंत्रता मिलने के बाद जिन्ना ने अपने तमाम भाषणों में पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर काफी जोर डाला और मुल्क की युवा पीढ़ी ने जोर-शोर से इसकी मांग उठाई। नेशनल एसेंबली की विधि एवं न्याय पर स्थायी समिति ने हाल ही में हिंदू विवाह विधेयक, 2016 पेश किया, जो पिछले वर्ष मार्च से लंबित था। नया कानून हिंदू महिलाओं को विवाह, तलाक और उत्तराधिकार का अधिकार देगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसमें विधवाओं को पुनर्विवाह की अनुमति मिलेगी। कई लोगों का कहना है कि हिंदू धर्म में तलाक का विकल्प नहीं है, लेकिन जो हिंदू तलाक का समर्थन करते हैं, उनका कहना है कि ज्यादातर हिंदू इस विधेयक का समर्थन करते हैं। विधेयक के  मुताबिक एक हिंदू विधवा को अपनी इच्छा और सहमति से पति की मौत के बाद फिर से विवाह करने का अधिकार है, बशर्ते कि उसके पति की मौत को छह महीने हो गए हों। यह हिंदू समुदाय की इस वर्जना को खत्म करने में मददगार होगा कि विधवाएं पुनर्विवाह नहीं कर सकतीं। अल्पसंख्यक नेताओं से संपर्क रखने वाले पाकिस्तानी सांसद, सोशल मीडिया और निर्वाचित अल्पसंख्यक सांसद आज इन समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस महीने राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।

नया विधेयक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें हिंदू लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है। यह एक स्वस्थ परंपरा है, क्योंकि मुस्लिम कानून लड़कियों को किशोरावस्था में शादी की अनुमति देता है, हालांकि वे मानसिक तौर पर विवाह के बोझ को झेलने और परिवार बनाने में सक्षम नहीं होतीं।

सरकार ने जिलों और हिंदू बहुल क्षेत्रों में विवाह पंजीयक नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। विधेयक की सह प्रस्तावक और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल की ईसाई सदस्य आसिया नासिर का कहना है कि यह बिल्कुल अनुचित था कि मुल्क में हिंदू विवाह के पंजीयन के लिए कोई तंत्र नहीं था। नासिर उन राजनेताओं में हैं, जिन्होंने सत्तारूढ़ पीएमएल (एन) के डॉ रमेश कुमार का इस विधेयक को लाने में साथ दिया। हालांकि रमेश कुमार को अब भी कुछ आपत्ति है। मीडिया को उन्होंने बताया कि उन्होंने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कुछ कड़े प्रावधान का प्रस्ताव रखा था, जिसकी उपेक्षा कर दी गई। चूंकि इस कानून को पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर-पख्तुनख्वा की प्रांतीय एसेंबलियों में भी स्वीकार किया जाएगा, इसलिए पूरे पाकिस्तान के हिंदुओं को इसका लाभ होगा। हिंदू बहुल प्रांत सिंध में पहले ही ऐसा एक कानून लागू है, जिसके तहत हिंदू विवाह का पंजीयन होता है, लेकिन अब राष्ट्रीय कानून बन जाने से हिंदू महिलाओं को अन्य लाभ भी मिलेंगे।

महिलाओं और बच्चों को वित्तीय सुरक्षा देने के साथ-साथ अन्य प्रावधान भी इसमें शामिल हैं, जिसके तहत अगर कोई पत्नी विवाह खत्म किए जाने के लिए दायर याचिका में प्रतिवादी है, तो वह इस आधार पर उसका विरोध कर सकती है कि तलाक से उसे आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, जब तक कि ऐसी मुश्किलों को खत्म करने के लिए की गई व्यवस्था से कोर्ट संतुष्ट न हो जाए। ऐसे मामलों में कोर्ट तब तक विवाह खत्म करने की मंजूरी नहीं दे सकता, जब तक कि वह दोनों पक्षों की आर्थिक क्षमता के आधार पर बच्चों की परवरिश के लिए किए गए पर्याप्त प्रावधान से संतुष्ट न हो जाए।


हिंदुओं के लिए एक और अच्छी खबर है, जिसको लेकर मुझे विशेष खुशी है कि इस्लामाबाद के निकट सैदपुर गांव में एक छोटा-सा अप्रयुक्त मंदिर शीघ्र ही हिंदुओं को पूजा के लिए सौंप दिया जाएगा। अमर उजाला के पाठकों को याद होगा कि एक वर्ष पूर्व मैंने अपने इसी स्तंभ में बताया था कि सैदपुर में सौ साल पुराना मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा अगल-बगल में बने हैं, जो बताते हैं सदियों पहले यहां कितना सद्भावपूर्ण माहौल था।

लेखिका पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार हैं

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