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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संतुलन की जरूरत

Sun, 24 May 2020 09:34 AM IST
Kuldeep Ratnoo कुलदीप रतनू
Updated Sun, 24 May 2020 09:34 AM IST
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Kuldeep singh ratnu editorial, Need to balance rural and urban areas
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

गरीबी, बेरोजगारी व अन्य कई संकटों से निरंतर जूझ रहे भारत के सामने कोरोना वायरस के प्रसार व उसे रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। नागरिकों के स्वास्थ्य व जीवन की रक्षा करने की चुनौती के साथ ही करोड़ों लोगों की आजीविका का संकट भी उत्पन्न हो गया है। प्रदेश स्तर पर देखा जाए, तो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्या वाले राज्यों के सामने ज्यादा बड़ा संकट है।


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लगभग 22-23 करोड़ की जनसंख्या जिसमें अधिकांश गरीब व साधनहीन हों, को सीमित संसाधनों व छोटे से भौगोलिक क्षेत्र में संभालना बहुत बड़ी चुनौती है। विश्व के केवल चार देशों (चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया) में ही 25 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या है, और अकेले उत्तर प्रदेश की जनसंख्या विश्व के कम आबादी वाले लगभग सौ देशों व द्वीपों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है।

उत्तर प्रदेश से क्षेत्रफल में लगभग 35 गुना बड़े व प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर ब्राजील जैसे देश के लिए भी अपनी 20-21 करोड़ की जनसंख्या के लिए समुचित व्यवस्था करना कठिन होता है, तो उत्तर प्रदेश की कठिनाई आसानी से समझी जा सकती है।

2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर अनेक टिप्पणीकारों, राजनेताओं व उद्योगपतियों ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि एक भगवाधारी नाथ संन्यासी कैसे उत्तर प्रदेश को संभाल पाएगा। किंतु किसानों की कर्ज माफी के क्रियान्वयन से लेकर नागरिकता कानून के विरोध में हुए हिंसक दंगों पर नियंत्रण तक, और अपराधों पर शिकंजा कसने से लेकर कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने व लॉकडाउन से प्रभावित करोड़ों गरीबों, मजदूरों व अन्य नागरिकों की सहायता करने तक योगी सरकार ने आलोचनाओं को गलत साबित करने की कोशिश की है।

लेकिन अब उसके सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। यह समस्या लॉकडाउन से उत्पन्न आर्थिक संकट व भीषण बेरोजगारी के रूप में पूरे भारत के सामने है, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिए यह कुछ ज्यादा ही व्यापक है। प्रदेश के करोड़ों नागरिक अन्य राज्यों में मजदूरी, नौकरी, काम-धंधा करने के लिए वर्षों से पलायन करते आए हैं। लॉकडाउन के असर से ऐसे लाखों मजदूर व स्वरोजगार में लगे हुए लोग प्रदेश में अपने घर लौटने के लिए मजबूर हुए हैं। इनके अलावा लाखों विद्यार्थी व बेरोजगार युवा जो बड़े शहरों में अच्छी शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गए हुए थे, वे भी अब घर लौट रहे हैं।

इस व्यापक घर-वापसी के कारण न केवल प्रदेश के नागरिकों की आय व जीवन स्तर में कमी आएगी, बल्कि गांव-कस्बों में अचानक आबादी का बोझ बढ़ने से सार्वजनिक सुविधाओं की प्रति व्यक्ति उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा। बेरोजगारी, गरीबी व असंतोष के कारण सामाजिक स्थिरता व शांति पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

देश-विदेश के अर्थशास्त्री, सलाहकार कंपनियां व उनसे बहुत प्रभावित रहने वाले नौकरशाह चाहेंगे कि उत्तर प्रदेश को कुछ बड़े सपने दिखाकर ऐसे मॉडल की तरफ उन्मुख किया जाए जिससे पूंजी का महत्त्व ज्यादा बढ़ सके। लेकिन आज पूरी दुनिया पूंजीवाद की सीमाएं भी देख रही है और उसके कारण समाज व पर्यावरण पर पड़े दुष्प्रभावों को भी देख व समझ रही है।

उत्तर प्रदेश को अपने सर्वांगीण विकास के लिए एक नया आर्थिक मार्ग बनाना होगा, जिसमें प्रतिव्यक्ति आय से अधिक महत्त्व सभी नागरिकों की संतुष्टि व प्रसन्नता को दिया जाए। इसके लिए सबसे जरूरी है कृषि व इससे जुडी अन्य आर्थिक गतिविधियों, पशुपालन, स्वरोजगार, कुटीर व लघु उद्योगों तथा सेवा क्षेत्र को भरपूर सहयोग व संरक्षण देना। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए हस्तशिल्प विकास बड़ा क्षेत्र है।

कृषि उत्पाद प्रसंस्करण व हस्तशिल्प से जुड़े कुटीर व लघु उद्योगों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित करने पर विशेष प्रोत्साहन देने से ग्रामीणों का पलायन रुकेगा और उन्हें घर के आसपास ही रोजगार मिल सकेगा। लेकिन तुरंत आवश्यकता के रूप में मनरेगा के अंतर्गत स्थायी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देकर गांवों का आधारभूत ढांचा मजबूत किया जाना चाहिए।

पलायन को रोकने के लिए योगी सरकार को शहरी क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही कस्बों को शहरी सुविधाओं से लैस करना पड़ेगा। प्रदेश से अन्य राज्यों में पलायन रोकने व नागरिकों के लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आवागमन व रोजगार सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश को 'आत्मनिर्भर शहर' योजना बनाकर 50 से अधिक नए शहर विकसित करने होंगे।

प्रत्येक जिले में विकास व रोजगार उपलब्धता के लक्ष्य तय करने व उन्हें निश्चित समय सीमा में प्राप्त करने के लिए स्थानीय अधिकारी, जन प्रतिनिधि, कृषि, उद्योग व अन्य सम्बंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि मिलकर टीम के रूप में कार्य करें और अपने जिले व ब्लाक में रोजगार निर्माण व समग्र विकास के काम में जुट जाएं, तो उत्तर प्रदेश इस संकट के दुष्प्रभावों से मुक्त होकर पूरे भारत के लिए एक आदर्श राज्य बन सकता है।

- लेखक, नई दिल्ली स्थित भारत नीति प्रतिष्ठान के निदेशक हैं

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