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लय, मुद्रा, भाव की त्रिवेणी में कृष्णमयी मन
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azadi ka amrit mahotsav
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amritmahotsav.nic.in
विस्तार
कृष्ण की लीलाएं हमेशा से कलाकारों को लुभाती रही हैं। उस पर यदि बिरजू महाराज की परंपरा के नर्तक-नृत्यांगनाएं हों, तब तो मंच के साथ-साथ मन का भी कृष्णमयी हो जाना स्वाभाविक है। आजादी के अमृत महोत्सव पर दिल्ली के श्रीराम सेंटर सभागार में सांस्कृतिक संस्था ‘राग विराग’ के कलाकारों ने जब कथक नृत्य नाटिका ‘कृष्णमयी रंग दे केसरिया’ प्रस्तुत की तो कृष्ण से लिप्त और अध्यात्म से सराबोर केसरिया रंग के प्रतीक- साहस, बलिदान और ऊर्जा की एक नदी बह चली। दर्शक दीर्घा में बैठे नृत्य प्रेमियों के मन में बस यही लहरें उठने लगीं कि प्रेम हो तो कृष्णमयी, राग हो तो कृष्णमयी और उन्माद हो तो भी कृष्णमयी।
कलाकारों ने अपने नृत्य में लय, मुद्रा और भाव की त्रिवेणी बहाकर समूचे सभागार का मन मोह लिया। कथक नृत्यांगना पुनीता शर्मा की नृत्य कोरियोग्राफी और पूरब व पश्चिम की धुनों को मिलाकर तैयार किया गया कासिफ खान का संगीत लोगों के सिर चढ़ कर बोला।
नृत्य नाटिका की शुरुआत राग भटियार से हुई, जो धीरे-धीरे बागेश्वरी और दरबारी के सुरों में परिवर्तित हो गई और अंत राग जोग से हुआ। इसमें सुमेधा, सुकृति, गौरिका अरोड़ा, मेहरीन, प्रियंका, कुहु, धारा, पलक, गौरिका धमीजा, कोमल, अहाना पाण्डेय, रसिका, अनीता, अनामिका, परीक्षा, आरुषि और हर्षित ने कदम से कदम और ताल से ताल मिलाई। संगत के लिए सारंगी, की-बोर्ड, तबला, पखावज, सितार, गायन और बेस गिटार पर संगीत निर्देशक कासिफ खान, अमजद चौधरी, फतेह अली, अमजद खान और सिराज ने साथ दिया। नन्हे कलाकारों के नृत्य से शुरू हुए कार्यक्रम को अर्पिता चक्रवर्ती और पुनीता शर्मा ने कथक के चरम तक पहुंचाया। उत्सव का रंगमय समापन अमेरिका से आई राग विराग की कलाकार प्रियल गुप्ता और पाती गुप्ता, सांदी, रितिका के होली नृत्य से हुआ।