फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Know Why Lord Shiva makes Ardhanarishvara Roop Mythological Stories

धूप आने दो: शिव ने क्यों धारण किया अर्द्धनारीश्वर रूप, आप भी पढ़िए यह पाठ

Sun, 14 Jan 2024 07:26 AM IST
Ashutosh Garg आशुतोष गर्ग
Updated Sun, 14 Jan 2024 07:26 AM IST
विज्ञापन
सार

जीव का निर्माण, पुरुष और स्त्री, दोनों के बराबर अंश से होता है। पुरुष और स्त्री में कोई भेद नहीं है और प्रकृति के अस्तित्व के लिए दोनों का होना अनिवार्य है। यही बताने के लिए शिव ने अर्द्धनारीश्वर रूप धारण किया...

loader
Know Why Lord Shiva makes Ardhanarishvara Roop Mythological Stories
Ardhanarishvara - फोटो : Social Media

विस्तार

भगवान शिव के अनन्य भक्तों में भृंगी ऋषि का नाम प्रमुखता से लिया जाता था। भृंगी की प्रीति केवल महादेव शिव में थी। भृंगी की शिव में आस्था इतनी प्रगाढ़ थी कि वह माता पार्वती को भी भगवान शिव से अलग देखते थे। परंतु अपने इस दृष्टिकोण का भृंगी को भारी मूल्य चुकाना पड़ा था।


एक बार भृंगी ऋषि, अपने इष्ट भगवान शिव की परिक्रमा करने कैलाश गए। वहां पहुंचकर भृंगी ने देखा कि महादेव ध्यान में लीन थे और उनके बाईं ओर माता पार्वती विराजमान थीं। भृंगी तो शिव की परिक्रमा करने आए थे किंतु पार्वती को साथ बैठा देखकर सोच में पड़ गए कि पार्वती को छोड़कर केवल शिव की परिक्रमा कैसे की जाए!


पार्वती ने भृंगी के मन के भाव पढ़ लिए। उन्होंने मुस्कराते हुए भृंगी से कहा, ‘ऋषिवर! आप सोच क्या रहे हैं? महादेव की परिक्रमा करने आए हैं, तो कर लीजिए। मैं और महादेव भी आपको आशीर्वाद देने को उत्सुक हैं।’ परंतु भृंगी को यह स्वीकार नहीं था। वह केवल शिव के भक्त थे इसलिए पार्वती की परिक्रमा का तो प्रश्न ही नहीं उठता था! भृंगी को कुछ समझ में नहीं आया। उन्होंने पहले पार्वती से अनुरोध किया कि वे भगवान शिव से दूर हटकर बैठ जाएं ताकि शिव की परिक्रमा पूरी की जा सके। लेकिन पार्वती ने भृंगी का अनुरोध अस्वीकार कर दिया, तो भृंगी ने शिव और पार्वती के बीच में से बलपूर्वक निकलने का प्रयास किया ताकि पार्वती की परिक्रमा से बचा जा सके।

यह देखकर पार्वती को बुरा लगा। शक्ति, भला शिव से अलग कैसे हो जातीं! उन्होंने भृंगी को अनेक प्रकार से प्रकृति और पुरुष का संबंध समझाने का प्रयत्न किया परंतु भृंगी ने हठ नहीं छोड़ा। पार्वती समझ गईं कि भृंगी को अभी तक पूर्ण ज्ञान नहीं हुआ है। उन्होंने भृंगी से कहा, ‘केवल शिव, सृष्टि का स्वरूप नहीं हैं। मैं आदिशक्ति हूं। मेरे और शिव के संयोग से यह सृष्टि बनी है। इसलिए हम दोनों की परिक्रमा कीजिए।’

यह कहकर पार्वती, शिव के इतना निकट आ गईं कि शिव और पार्वती का शरीर जुड़कर एक हो गया। यह शिव और शक्ति का अद्भुत मिलन था। शिव अब केवल पुरुष नहीं थे। पार्वती के मिल जाने से शिव का आधा शरीर नारी में परिवर्तित हो चुका था। शिव अर्द्धनारीश्वर हो गए! इसके बाद भी अहंकार से भरे भृंगी को बुद्धि नहीं आई। उन्होंने कीट का रूप धारण किया और शिव एवं पार्वती के शरीर जिस जगह से जुड़े थे, वहां से उनका मांस कुतरना शुरू कर दिया। भृंगी कीट अब अर्द्धनारीश्वर को बीच में से काटकर एक-दूसरे से अलग कर देना चाहता था।

भृंगी की धृष्टता देखकर पार्वती का धैर्य समाप्त हो गया। उन्होंने भृंगी को शाप दिया : ‘भृंगी, तुम मूर्ख हो! तुम शिव और शक्ति को अलग करना चाहते हो। तुम्हें सत्य दिखाई नहीं देता कि दोनों एक हैं। ब्रह्मांड के समन्वय में तुम्हारी आस्था नहीं है। तुम पुरुष और प्रकृति के सिद्धांत को भी समझना नहीं चाहते। तुम यह भी नहीं जानते कि प्राणी को मांस-मज्जा, अपनी माता से तथा हड्डियां, अपने पिता से प्राप्त होती हैं। चूंकि तुमने स्त्री शक्ति का अपमान किया है इसलिए मैं तुम्हें शाप देती हूं कि तुम स्त्री से मिली मांस-मज्जा गंवा दोगे और तुम्हारे शरीर में केवल हड्डियां शेष रह जाएंगी!’

पार्वती के भयानक शाप का तुरंत प्रभाव हुआ। भृंगी की मांसपेशियां नष्ट हो गईं और उसका शरीर कंकाल में परिवर्तित हो गया। भृंगी ऋषि के लिए अब खड़ा रहना तक असंभव था। कंकाल नीचे गिर पड़ा। भृंगी ने शिव और पार्वती से क्षमा मांगी। भोलेनाथ को दया आ गई। उन्होंने भृंगी को खड़ा रहने के लिए एक तीसरा पैर प्रदान किया।

इसके बाद शिव ने भृंगी से कहा, ‘तुम्हारी यह दशा संसार के प्रत्येक प्राणी को सीख देगी कि जीव का निर्माण, पुरुष और स्त्री दोनों के बराबर अंश से होता है। नारी और पुरुष में भेद करने वालों की गति तुम्हारे समान होगी। पुरुष और स्त्री में कोई भेद नहीं है और प्रकृति के अस्तित्व के लिए दोनों का होना अनिवार्य है। यही बताने के लिए मैंने अर्द्धनारीश्वर रूप धारण किया था। शिव और शक्ति को पृथक रूप से देखने वाले को दोनों में से किसी का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। इस तरह अहंकारी ऋषि भृंगी, स्त्री शक्ति का अपमान करने के कारण तीन पैरों वाला कीट बनकर रह गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed