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पहले नेताओं की बेरोजगारी दूर करो

Thu, 15 Nov 2012 01:12 AM IST
सहीराम
सहीराम Updated Thu, 15 Nov 2012 01:12 AM IST
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kill leaders unemployment

देखो जी, अगर सरकार चाहे, तो बेरोजगारी दूर करने का कोई न कोई तरीका निकाल ही सकती है। वह खाली पड़े सरकारी पद चाहे न भरे, पर खाली पड़े मंत्री पद देर-सबेर जरूर भर लेती है। जो मंत्री नहीं रहे, वे यह भ्रम पाल सकते हैं कि हम पार्टी संगठन के लिए काम करेंगे। इस जमाने में जब सरकार के पास ही घोटाला करने के अलावा कोई काम नहीं बचा है, तो पार्टी संगठन के लिए क्या काम बचा होगा। फिर भी संगठन के लिए काम करने का भ्रम पालना ऐसा है, जैसे आदमी स्वरोजगार का भ्रम पालता है।

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पर बेरोजगारी के इस गहन मौसम में जब ओबामा तक इस समस्या से पीड़ित हैं, तब ममता दीदी ने बेरोजगारी दूर करने का एक नया मंत्र दिया है। उनकी पार्टी के जो लोग हाल-फिलहाल तक केंद्र में मंत्री पदों पर विराजमान थे और रेलवे वगैरह में लोगों को तरह-तरह के रोजगार भी दे रहे थे, वे तब अचानक ही बेरोजगार हो गए, जब दीदी ने सरकार से बाहर निकलने का निर्णय ले लिया।
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बताते हैं कि उनकी पार्टी में कई ऐसे नेता भी थे, जो बेरोजगार होने के डर से सरकार से निकलना नहीं चाहते थे। पर जो मान जाए, उसका नाम ममता नहीं हो सकता। वह निकल गईं और उनके वे सब नेता बेरोजगार हो गए, जो अभी तक मंत्री थे। पर वह तो ठहरीं नवोन्मेषकारी। उन्होंने उनका दर्द समझा और उनकी बेरोजगारी दूर करने का रास्ता निकाल लिया। उन्होंने उन सभी बेरोजगारों को राज्य में सलाहकार के पद पर नियुक्त कर दिया। उन्हें मंत्री का दरजा दिया और वे तमाम सुविधाएं भी मुहैया करा दीं, जो वे केंद्र में मंत्री रहते हुए पा रहे थे। रिंद के रिंद रहे और हाथ से जन्नत भी न गई।
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दीदी बेरोजगारी दूर करने के ऐसे तरीके पहले भी निकालती रही हैं। जब वह रेल मंत्री बनी थीं, तो उन्होंने सिविल सोसाइटी के उन तमाम लोगों और उन कलाकारों को रेल मंत्रालय में इसी तरह सलाहकार टाइप के पदों पर रख लिया था, जिन्होंने वाम मोरचा के खिलाफ उनके आंदोलन को सक्रिय समर्थन दिया था।


अपनी पसंद के लोगों को दीदी कहीं न कहीं रोजगार से लगा ही देती हैं। उनके हाथों बस एक ही आदमी बेरोजगार हुआ। वह थे दिनेश त्रिवेदी। उनका मंत्री पद ही नहीं छीना, बल्कि बाद में ऐसा कोई रोजगार भी उन्हें नहीं दिया गया। सो तमाम सरकारों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। देश की बेरोजगारी तो जब दूर होगी, तब होगी, फिलहाल कम से कम नेताओं की बेरोजगारी तो दूर हो।

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