फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Kashi Tamil Sangamam How BJP Politics to unite South with North India in welfare of country and society

तमिल संगमम: क्या देश और समाज का भला कर पाएगी दक्षिण को जोड़ने की सियासी कवायद

Thu, 21 Dec 2023 06:34 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Thu, 21 Dec 2023 06:34 AM IST
विज्ञापन
सार
तमिल संगमम का लक्ष्य साझा विरासत की समझ का निर्माण करते हुए उत्तर व दक्षिण के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करते हुए ज्ञान और  संस्कृति की परंपराओं को एक साथ लाना और संबंधों का जश्न मनाना है।
loader
Kashi Tamil Sangamam How BJP Politics to unite South with North India in welfare of country and society
काशी तमिल संगमम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिल संगमम दरअसल तमिल को हिंदी और तमिलवासियों को उत्तर भारतीयों से जोड़ने वाला एक प्रगतिशील कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम उत्तर और दक्षिण भारत के बीच ऐतिहासिक एवं सभ्यता संबंधी कई पहलुओं से जुड़ा है। इसका प्रमुख उद्देश्य उत्तर व दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को नजदीक लाना, देश की साझा विरासत की समझ विकसित करना और इन क्षेत्रों के लोगों के बीच संबंध को और मजबूत करना है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा संस्कृति, कपड़ा, रेलवे, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना और प्रसारण आदि मंत्रालयों तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित किए जा रहे इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन आईआईटी, मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है।



उल्लेखनीय है कि काशी और तमिलनाडु प्राचीन भारत में शिक्षा और संस्कृति के दो महत्वपूर्ण केंद्र थे। ऐसे में, इस कार्यक्रम का लक्ष्य साझा विरासत की समझ का निर्माण तथा इन दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करते हुए ज्ञान और संस्कृति की इन दो परंपराओं को एक साथ लाना है। दो संस्कृतियों के बीच प्राचीन बौद्धिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और कारीगरी संबंधों के बारे में फिर से जानकारी प्राप्त करना और इन्हें सशक्त बनाना भी इस उत्सव का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु और वाराणसी के विभिन्न सांस्कृतिक समूह काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हैं।


काशी तमिल संगमम कार्यक्रम हमारी ज्वलंत संस्कृति और भारतीयों के बीच गहरे तक जुड़े संबंधों का जश्न मनाता है। यह 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को आगे बढ़ाता है, जिसकी पहचान आध्यात्मिक विश्वासों में भी निहित है। काशी तमिल संगमम के दूसरे संस्करण में साहित्य, प्राचीन ग्रंथ, दर्शन, अध्यात्म, संगीत, नृत्य, नाटक, योग और आयुर्वेद पर व्याख्यान भी होंगे। इसके अतिरिक्त, ‘नवाचार, व्यापार, ज्ञान विनिमय, शिक्षा तकनीक और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी’ पर संगोष्ठी कराने की योजना बनाई गई है। लेकिन इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ भी हैं।

भाजपा दरअसल, तमिलनाडु के द्रविड़ तर्क में राष्ट्रवाद को पिरोना चाहती है। अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मोदी वाराणसी में एक वार्षिक उत्सव के रूप में काशी तमिल संगमम को मनाने की बात बार-बार दोहराते रहे हैं। संगमम का उद्घाटन करते वक्त खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस संगमम की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देगी। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है कि महादेव के एक घर से दूसरे घर में जाना। तमिलनाडु से काशी आने का मतलब है, मदुरै मीनाक्षी के यहां से काशी विशालाक्षी के यहां आना। इसीलिए तमिलनाडु और काशीवासियों के बीच हृदय में जो प्रेम है, जो संबंध है, वह अलग और अद्वितीय है।

पंद्रह दिनों के इस आयोजन में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होने हैं। महाकाव्यों का वाचन, सेमिनार और उत्तर प्रदेश के मंदिरों की झलक भी देखने को मिलेगी। काशी तमिल संगमम भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करता है। दोनों भौगोलिक क्षेत्रों के बीच काव्यात्मक संबंध केदार घाट पर संत-कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा में भी परिलक्षित होते हैं।

तमिलनाडु के प्रतिनिधि वाराणसी की जीवंत सांस्कृतिक सहानुभूति का अनुभव कर रहे हैं और मनमोहक प्रस्तुतियां गंगा के किनारे स्थित पवित्र शहर की साझा संस्कृतियों की कालातीत कहानी बता रही हैं। इससे पहले थिरुक्कुरल को 16 अनुवादित संस्करणों (10 भारतीय भाषाओं, पांच विदेशी भाषाओं) और ब्रेल लिपि में जारी करने से जनमानस में भाजपा की सकारात्मक छवि बन रही है। इसके अलावा, उनकी खास पहल पर मणिमेखलाई सहित 46 तमिल व्याकरण ग्रंथों, संगम साहित्य और शास्त्रीय तमिल ग्रंथों के अनूदित संस्करण जारी करने से तमिल भाषियों में उनका सम्मान बढ़ा है।

जाहिर है कि एक खास उद्देश्य से शुरू किए गए इस संगमम को भाजपा पूरी गंभीरता से ले रही है। इससे काशी और तमिलवासियों के सांस्कृतिक एकीकरण का विचार द्रविड़ आंदोलन के मानस में गहराई से उतारने में कामयाबी मिली है। लोकसभा चुनाव से पहले दक्षिण को साधने के उद्देश्य के साथ भाजपा ने काशी से कन्याकुमारी के बीच ट्रेन चलाई है। इसी ट्रेन से तमिलनाडु से आमंत्रित लोगों को बनारस लाया जा रहा है। मेहमानों की देखभाल का जिम्मा केंद्र सरकार के कई विभागों को दिया गया है।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी इन्हें विशेष अतिथि का दर्जा दिया है। साथ ही सरकारी खर्च पर सभी को प्रयागराज और अयोध्या घुमाने की व्यवस्था भी की गई है। इन सभी प्रयासों की वजह सिर्फ यही है कि उत्तर और दक्षिण को जोड़ा जाए। इसके अलावा, तथ्य यह भी है कि मोदी, योगी और अमित शाह की त्रिमूर्ति ने सधे कदमों के साथ दक्षिण  भारत के संदर्भ में एक नई नीति पर चलने का फैसला किया। ठीक वैसे ही जैसे भाजपा ने वर्ष 2019 में अपने दूसरे कार्यकाल के बाद जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का फैसला लिया था।

भाजपा कुछ वैसा ही दक्षिण भारत में अपने वोटों में इजाफा करने के लिए करना चाह रही है। वर्ष 2024 में अपने तीसरे कार्यकाल की चाह रखने वाली भाजपा ने इस संगमम के जरिये उत्तर व दक्षिण के बीच एक सांस्कृतिक सेतु स्थापित किया है। भाजपा समझ गई है कि द्रविड़ अवधारणा तेजी से अपना प्रभाव खो रहे हैं। ऐसे में यही समय है, जब राष्ट्रवाद की अवधारणा को वहां जगह दी जाए।

काशी तमिल संगमम का एक राजनीतिक कारण तेलंगाना में कांग्रेस की जीत भी है। जाहिर है कि अब भाजपा के लिए दक्षिण की ओर देखो नीति को आगे बढ़ाने का समय आ गया है। कुछ नेताओं ने ट्वीट किया कि कांग्रेस दक्षिण के लिए और भाजपा उत्तर के लिए है। दिलचस्प बात यह है कि मोदी इसी विचार पर प्रहार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने काशी तमिल संगमम के उद्घाटन समारोह में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग अपने भाषण में भी किया, जिसकी बदौलत तमिल छात्रों को रिअल टाइम में तमिल में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को सुनने का रोमांचक अवसर मिला। इस तकनीक की बदौलत प्रधानमंत्री मोदी के सभी बाधाओं को ध्वस्त करते हुए बगैर मानवीय हस्तक्षेप के लक्ष्यों को पाने के विजन की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed