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सिर्फ प्रवचन सुनने से कुछ नहीं होता

Wed, 31 Jul 2013 09:08 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Wed, 31 Jul 2013 09:08 PM IST
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Just listening the sermon is not enough

एक व्यक्ति भगवान बुद्ध के सत्संग के लिए अक्सर आया करता था। वह बहुत उत्सुकता से उनके उपदेश सुना करता। बुद्ध उपदेश में प्रायः कहते, लोभ, दोष और मोह पाप के मूल हैं। हिंसा करना और असत्य बोलना अधर्म है। यदि सच्ची शांति चाहते हो, तो इन दुर्गुणों को त्याग दो। क्रोध करनेवाला कभी शांति नहीं पा सकता।

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वह व्यक्ति भगवान बुद्ध के उपदेश तो सुनता, लेकिन दुर्गुणों को त्याग नहीं पा रहा था। हर क्षण उसका मन अशांत रहता था। एक दिन वह भगवान बुद्ध के पास पहुंचा और कहा, भगवन, मैं काफी दिनों से आपका उपदेश सुनता आ रहा हूं, लेकिन उसका प्रभाव नहीं पड़ा। मन बड़ा अशांत रहता है।
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बुद्ध ने मुस्कराकर कहा, तुम कहां के रहनेवाले हो? उसने कहा, श्रावस्ती का। बुद्ध ने अगला सवाल किया, यहां से श्रावस्ती कितनी दूर है? व्यक्ति ने दूरी बता दी, तो बुद्ध ने उससे फिर पूछा, तुम अपना रास्ता जानते हो? उसने कहा, खूब अच्छी तरह। तब भगवान बुद्ध ने पूछा, रास्ता जानने के बाद उस पर चले बिना क्या तुम श्रावस्ती पहुंच सकते हो? उसने उत्तर दिया, वहां पहुंचने के लिए चलना तो पड़ेगा।
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बुद्ध ने तब फिर कहा, वत्स, सिर्फ प्रवचन सुनने या कल्याण का मार्ग जानने से कुछ नहीं होता, तुम्हें उस पर चलना पड़ेगा। उन्हें अपने आचरण में ढालो, फिर देखना कि किस तरह तुम्हारा मन शांति का अनुभव करता है।
ऐसा करने पर उसका स्वतः कल्याण हो गया।

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