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यह आसन नहीं आसान
सुनीता शानू
Updated Mon, 22 Jun 2015 08:47 PM IST
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आप आसन हो या मोदी आसन, हमारा मुख्य उद्देश्य होता है, किसी भी तरह से राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करना। हालांकि इस बार सेल्फियासन नहीं हो पाया, वरना एक सेल्फी हमारा योगदान साबित करने के लिए काफी होता...खैर...।
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विश्व योग दिवस पर फोटो चस्पां कर फेसबुकासन तो उन्होंने कर ही दिया है। वह करते भी क्यों नहीं, जब झाड़ू अभियान में शामिल हुए थे, तो पड़ोस वाले शुक्ला जी से उनका कूड़े पर झगड़ा हो गया था कि मेरा कूड़ा आपने क्यों उठा लिया। अब कूड़ा तो कूड़ा ही था! कूड़े में हाथ डाल-डालकर भिंडी, तोरई अलग-थलग की गई, तब हाथ में झाड़ू और बेलचा लिए दोनों नेता अपनी-अपनी टीम का अनुकरण करते हुए फोटो खिंचवा पाए थे। आज फिर वही झंझट खड़ा हुआ।
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महीने भर से यही तैयारी चल रही थी कि किसी प्रकार छप्पन इंच की तोंद को पार कर हाथ-पैर के अंगूठे को छू पाएं, तो समझो सफल हो गए। वरना तो कुर्सी से नीचे तक उतरने में तकलीफ होती है। यह आसान काम भी तो नहीं था कि छप्पन इंच की तोंद के साथ योगासन कर लिया जाए। शायद राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी इसलिए योग दिवस को तोंद दिवस का नाम दे दिया है।
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खैर नेताजी जुट गए। वह रोज सवेरे गार्डन और शाम को जिम में जाकर साइकिल चलाते थे, ताकि तोंद कम हो पाए। मगर यह मुई तोंद तो एक इंच घटने का भी नाम नहीं ले रही थी। जब इसकी जांच की गई, तो पता चला कि नेता जी को देखकर गार्डन के बाहर ही पपीते, संतरे, खरबूजे वाले ने रेहड़ी लगा ली थी। पास ही पप्पू चाय वाला भी समोसे, कचौड़ी का खोमचा लगाकर खड़ा हो गया था। नेताजी ठहरे नेताजी। न चाहते हुए भी दिल किया कि खा लिया जाए और गार्डन का एक चक्कर अधिक लगाकर सब कुछ हजम कर लिया जाएगा। हालांकि फिर भी विश्व योग दिवस के दिन अनुलोम-विलोमासन की फोटो चस्पां कर वह चाटुकारासन में जरूर सफल हो गए।