यह भारत में ही हो सकता है!
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भारत के राष्ट्रीय और प्रादेशिक पर्यटन विभाग के महत्वाकांक्षी विज्ञापन भारत के प्राचीन मंदिरों, महलों और ऐतिहासिक खंडहरों जैसी पुरातात्विक धरोहरों को पर्यटन का आकर्षण बना रहे हैं। वहीं असाध्य रोगों के लिए प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार केंद्र 'हेल्थ/मेडिकल टूरिज्म' बढ़ा रहे हैं। भारत में आज एक से बढ़कर एक आधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल हैं, जो ऑपरेशन और उसके बाद की जरूरी देखभाल के लिए पंचतारा होटल के जैसे सुख-साधन उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। अमेरिका की तरह यदि भारत भी आज विश्व के शिखर देशों में शुमार होता तो 'बर्थ टूरिज्म' का केंद्र बन जाता, जहां प्रसव द्वारा देश की नागरिकता का जन्मसिद्ध अधिकार अपनी भावी संतान को दिलवाने के लिए लालायित गर्भवती स्त्रियां आठ हजार डॉलर से लेकर अस्सी हजार डॉलर तक खर्च करके मैक्सिको, चीन, कोरिया और ताईवान जैसे देशों से उमड़ी चलीं आतीं!
इंग्लिश थिएटर, फिल्म, टेलीविजन और रेडियो के प्रतिष्ठित निर्देशक जॉन मैडन अपनी दो फिल्मों के माध्यम से भारत में 'टूरिज्म' के एक अनोखे पहलू को दर्शाने में भारतीय पर्यटन उद्योग के समस्त उद्यम से अधिक सफल हुए हैं। 2012 में इस दिशा में मैडन का प्रथम संकेत थी द बेस्ट एग्जॉटिक मैरिगोल्ड होटल जिसने लोकप्रिय उक्ति 'जहां न पहुंचे रवि तहं पहुंचे कवि' को चरितार्थ किया। 2015 में प्रदर्शित इसकी दूसरी कड़ी है, द सेकंड बेस्ट एग्जॉटिक मैरिगोल्ड होटल! उदयपुर से मोटर द्वारा लगभग घंटे, डेढ़ घंटे के सफर की दूरी पर घुड़सवारों के वांछित होटल रावला खेमपुर ग्रामीण महल को जॉन मैडन ने वानप्रस्थ के अनुकूल आश्रयस्थल के रूप में दर्शाया है।
कथानक का (काल्पनिक) आधार है जयपुर के किसी इलाके में खंडहर हुई जाती पुरखों की अचल संपत्ति जिसके वारिसों में से केवल एक, नवयुवक सन्नी कपूर (ब्रिटिश ऐक्टर देव पटेल), उसका जीर्णोद्धार करने के लिए उत्साहित है। सन्नी पुरखों की इमारत को एक ऐसे गेस्ट हाउस/होटल में परिवर्तित करना चाहता है, जिसमें विदेशी केवल सैर सपाटे के लिए ही नहीं, वाजिब किराये पर स्थायी रूप से रहने के लिए भी पधारें।
इंटरनेट पर सन्नी के आधुनिक विज्ञापन में वृद्धावस्था की ओर अग्रसर और तंगदस्ती से जूझते कुछ ब्रिटिश नागरिकों को आशा की किरण दिखती है। ब्रिटेन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा निःशुल्क तो है, किंतु सरकारी तंत्र की रफ्तार इतनी धीमी है कि सीमित साधनों वाली म्यूरिएल डॉनेली को अपने घुटनों की सर्जरी के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। भारत में यह शल्यक्रिया शीघ्र और कम पैसों में संभव होगी और देखभाल के लिए नौकरानी का प्रबंध भी होगा। अपने मृत पति द्वारा छोड़े भारी कर्ज से बौखलाईं विधवा एवेलिन ग्रीनस्लेड को भी भारत पलायन ही सूझता है, जहां उनके पति उन्नीस वर्ष तक रहकर ब्रिटेन लौटे थे। ऐसे ही अन्य पात्र हैं समय की आंधी में तिनकों से, नीड़ की खोज में। नीड़ का जुगाड़ करने वाला उत्साही किंतु अनुभवहीन युवक है सन्नी, जिसकी ठोस योजना आर्थिक रूप से कच्ची है, मगर निवेशक ढूंढकर सन्नी भी असंभव को किसी प्रकार संभव बना ही डालता है। द बेस्ट एग्जॉटिक मैरिगोल्ड होटल केवल खुलता ही नहीं, चल भी पड़ता है। सन्नी की मां बेटे की गर्लफ्रेंड सुनयना (टीना देसाई) को स्वीकार ही नहीं करतीं, बल्कि दोनों के विवाह के लिए राजी भी हो जातीं हैं।
दोनों फिल्मों में ब्रिटिश कॉमेडी और बॉलीवुड स्टाइल लटकों का मनोरंजक फ्यूजन है। व्हीलचेयर पर बैठे, छातियों में जमे बलगम की घरघराहट दबाते दर्शक फिल्म देखते हुए सोचते होंगे कि सुदूर भारत में सन्नी जैसा कोई सिरफिरा काश उनके लिए भी एक एग्जाटिक मैरिगोल्ड होटल का जुगाड़ कर देता, जहां वे 'भारत गेंदाफूल..' गुनगुनाते पैनकेक जैसे चीले का स्वाद जान पाते!