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क्या आतंकवाद के खात्मे के लिए गंभीर है पाकिस्तान

Tue, 08 Jul 2014 02:12 AM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Tue, 08 Jul 2014 02:12 AM IST
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Is Pakistan serious to fight terrorism

आतंकवाद के खात्मे के लिए पाकिस्तान ने उत्तरी वजीरिस्तान में स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया है, जो रमजान के महीने में भी जारी है। पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जनता को विश्वास दिलाया है कि यदि उनको काम करने दिया गया, तो वह पांच साल में मुल्क की तकदीर बदल देंगे। मुश्किल यह है कि पाक सरकार को सत्तासीन हुए एक साल से ऊपर का समय हो गया है, पर उसके पास उपलब्धि के नाम पर कुछ खास नहीं है।

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दरअसल नवाज शरीफ इस सैन्य अभियान से बचना चाहते थे। इसलिए वह पाकिस्तानी तालिबान से बातचीत के जरिये देश में शांति का प्रयास कर रहे थे। पर लंबी बातचीत के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। सरकार को डर था कि सैन्य अभियान चलाने पर कई शहर आतंकी हमलों की जद में आ जाएंगे। पर कराची हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद सरकार को फौज की मदद से आतंकियों का सफाया करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आशंका यह भी बनी हुई थी कि कहीं पाक भी अस्थिरता के शिकार अन्य मुस्लिम देशों इराक, सीरिया और अफगानिस्तान जैसा न बन जाए। वैसे में विदेशी पूंजी निवेश भी बंद हो जाएगा। सेना तो बहुत पहले से सरकार पर दबाव बना रही थी कि आतंकियों के सफाये के लिए सैन्य अभियान जरूरी है। जमायते इस्लामी पार्टी को छोड़ सभी दलों और जनता ने सरकार का समर्थन किया। अब तक 500 के लगभग विदेशी व स्थानीय आतंकवादी मारे गए हैं। आम ख्याल यह है कि सैकड़ों बेकुसूर नागरिक भी मारे गए होंगे। दाढ़ी-मूंछ व सिर के बाल मुंडवा कर छिपे हुए आतंकियों के सफाये के लिए अब सेना ने जमीनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
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सवाल उठता है कि क्या इस अभियान से पाक में फैली दहशतगर्दी खत्म हो जाएगी। अभियान शुरू होने से पहले ही बहुत से आतंकवादी उत्तरी वजीरिस्तान से भागकर इधर-उधर दूसरे कबाइली क्षेत्रों में या शरणार्थियों के वेश में अफगानिस्तान चले गये थे। सैन्य कार्रवाई खत्म होने के बाद वे फिर इस इलाके में अपने ठिकाने बना लेंगे। राजनीतिक पार्टियां सैन्य अभियान का समर्थन तो कर रही हैं, पर सरकार पर आरोप भी लगा रही हैं कि उसने तैयारी किए बिना ही इतना बड़ा अभियान छेड़ दिया। आरोप यह भी है कि फौज अच्छे और बुरे तालिबान के बीच फर्क कर रही है। हक्कानी नेटवर्क और भारत विरोधी आतंकियों के ठिकाने अभी तक निशाने पर नहीं आए हैं। पाक संसद ने हाल ही में एक कड़ा व विवादास्पद आतंकवाद-विरोधी कानून पारित किया है, जिसमें पुलिस को आतंकवाद, आगजनी और हत्या में संलिप्त संदिग्धों को देखते ही गोली मारने का अधिकार दे दिया है। इस कानून का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, इससे ताकत का बेजा इस्तेमाल होगा।
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ये तमाम कदम अच्छे तो हैं, लेकिन पाकिस्तान में आतंकवाद का पूरी तरह सफाया तभी होगा, जब फौज अच्छे और बुरे आतंकियों के बीच अंतर नहीं समझेगी। पड़ोसी के नाते भारत भी चाहेगा कि पाकिस्तान में आतंकवाद का पूरी तरह खात्मा हो। तभी दक्षिण एशिया में शांति बहाली में मदद मिलेगी।

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