पड़ोस में आईएस, भारत को खतरा
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पाकिस्तान की प्रसिद्ध लाल शहबाज कलंदर दरगाह पर पिछले दिनों हुए आईएस के हमले ने पूरे दुनिया को चेताया है कि यह खतरनाक आतंकी संगठन सीरिया एवं इराक के अलावा दक्षिण एशिया में भी अपनी पहुंच रखता है। पाकिस्तान में उसका यह पहला हमला नहीं है। उसने 2015 में कराची में एक बस पर हमला कर 46 शियाओं को तथा अक्तूबर, 2016 में बलूचिस्तान में पुलिस अकादमी पर हमला कर 61 लोगों को मार डाला था। अफगानिस्तान के जलालाबाद और काबुल में बीते साल आईएस द्वारा किए गए दो हमले उसकी बढ़ती ताकत के सबूत हैं। आईएस के बांग्लादेश में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करने की खबरें हैं।
अचानक पिछले दो वर्षों में दक्षिण एशिया के इस इलाके में आईएस की गतिविधि बढ़ने का बड़ा कारण यह है कि सीरिया तथा इराक में यह अपनी करीब एक तिहाई जमीन रूस समर्थित इराकी तथा सीरियाई सेना से हार चुका है। इसलिए इसने नए ठिकाने के रूप में अफगानिस्तान को चुना है, जो युद्ध से जर्जर है। इस क्षेत्र में आईएस चीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, मालद्वीप एवं भारत के युवाओं को युद्ध प्रशिक्षण देने तथा इन्हें बहावी कट्टरपंथी बनाने के अभियान में लगा है। इसका खुलासा पेरिस हमले के बाद गिरफ्तार फ्रेंच नागरिक रेडा हेम ने फ्रेंच पुलिस के सामने किया था। आईएस का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि उसने पाकिस्तान में शहबाज कलंदर की दरगाह पर हमला करने के दो दिन बाद ही अफगानिस्तान की एक सुरक्षा चौकी को निशाना बनाकर 17 अफगान सैनिकों की हत्या कर दी।
भारत के लिए यह चिंताजनक है, क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही आतंक की फैक्टरी बना हुआ है। कश्मीर में लश्कर तथा हिजबुल के आतंकियों के अलावा वह आईएस के आतंकियों को भी भेजने की कोशिश कर सकता है। घाटी में भारत-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पाक झंडों के साथ कई बार आईएस के झंडे भी दिखाई देते हैं। जैसा कि पिछले दिनों सेना के एक मेजर की शहादत के बाद देखने को मिला। भारतीय सेना प्रमुख जनरल रावत ने आईएसआई द्वारा तैयार किए इस प्रकार के देश-विरोधी पाक समर्थकों पर अंकुश लगाने के लिए ही चेतावनी दी थी कि आतंकियों से सहानुभूति रखने वाले या उन्हें सहायता पहुंचाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। अमेरिका खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी केबिन हेलवर्ट ने, जो इस्लामाबाद में सीआइए के स्टेशन चीफ रह चुके हैं, पाक दरगाह में हुए आतंकी हमले के बाद भारत में अमेरिका दूतावास के अपने नागरिकों तथा पश्चिमी देशों के नागरिकों को भारत में धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों पर आईएस के हमले की चेतावनी जारी कर दी है। इस चेतावनी में आशंका जताई गई है कि ये हमले खासकर पश्चिमी देशों के नागरिकों को निशाना बनाने के लिए होंगे। इस चेतावनी से भारत के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगने के आसार हैं।
दक्षिण एशिया और खासकर पाकिस्तान के बिगड़ते हालात तथा पाकिस्तान की भारत के प्रति दुश्मनी को देखते हुए भारत की सुरक्षा तथा गुप्तचर संस्थाओं को इस पर और भी सावधान तथा चौकन्ना रहकर देश में आईएस के खतरे को पनपने से पहले ही उखाड़ फेंकना चाहिए। अभी तक भारत के नौजवानों को इंटरनेट तथा संचार के अन्य साधनों से बरगला कर आईएस में शामिल करने की कोशिश होती रही है। इसलिए देश की साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करना अत्यंत जरूरी होगा।